पुर्तगाल में आवास संकट और महंगाई के खिलाफ जनाक्रोश, लिस्बन से पोर्टो तक हजारों सड़कों पर
सारांश
मुख्य बातें
पुर्तगाल के प्रमुख शहरों — लिस्बन, पोर्टो और कोयम्ब्रा — में 18 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को हजारों नागरिकों ने आवास संकट, आसमान छूते किराये और बढ़ती महंगाई के विरोध में सड़कों पर उतरकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य माँग है कि सरकार रियल एस्टेट निवेश फंडों पर सख्त नियामक कानून बनाए और सस्ता आवास उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाए। यह यूरोप में तेज हो रहे आवास अधिकार आंदोलनों की व्यापक लहर का हिस्सा है, जो हाल के महीनों में बेल्जियम, इटली, स्पेन और फ्रांस तक फैल चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम
लिस्बन के शहर केंद्र में प्रदर्शनकारियों ने तंबू लगाए और बैनर लेकर मार्च किया, जिनमें माँग की गई कि 'रियल एस्टेट में निवेश करने वाले बड़े फंडों' पर कड़े कानून बनाए जाएँ। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन संस्थागत निवेशकों की वजह से संपत्तियों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और आम नागरिकों के लिए घर खरीदना या किराये पर लेना दोनों ही कठिन होते जा रहे हैं।
कुछ बैनरों में पोर्टो में गुरुवार तड़के हुई पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख था, जब आवास अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाया गया था। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उस कार्रवाई में 37 लोग घायल हुए, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई गई। प्रदर्शनकारियों ने 'सिर मत फोड़ो, घर उपलब्ध कराओ' जैसे नारों वाले बैनर उठाए।
राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया
पुर्तगाल के राष्ट्रपति एंटोनियो जोस सेगुरो ने कहा कि किसी लोकतांत्रिक समाज में गरीबी को 'किस्मत या मजबूरी' मानकर स्वीकार नहीं किया जा सकता। राष्ट्रपति की वेबसाइट पर जारी एक संदेश में सेगुरो ने बताया कि पुर्तगाल में अभी भी लगभग 16.6 लाख लोग गरीबी के खतरे में जी रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 2015 के बाद यह पहली बार है जब यह संख्या 20 लाख से नीचे आई है, और जरूरी सेवाओं तक सभी की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए और ज्यादा प्रयास किए जाने चाहिए।
यूरोप में व्यापक असंतोष की लहर
यह ऐसे समय में आया है जब पूरे यूरोप में आवास और महंगाई को लेकर सड़क पर उतरने की प्रवृत्ति तेज हो रही है। फ्रांस में शनिवार को हुए प्रदर्शनों में गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के अनुसार करीब 5.5 लाख लोग शामिल हुए — बढ़ती महंगाई के खिलाफ और छात्रों की माँगों के समर्थन में। इटली में भी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की सरकार के विरोध में छात्र, शिक्षक और ट्रेड यूनियन सड़कों पर हैं — रोम सहित कई शहरों में स्कूलों पर कब्जे और पुलिस से झड़पें हुई हैं।
गौरतलब है कि यूरोपीय शहरों में संस्थागत रियल एस्टेट निवेश और अल्पकालिक किराया प्लेटफॉर्म (जैसे Airbnb) की वजह से आवास की कमी एक साझा समस्या बन चुकी है। पुर्तगाल इस संकट के सबसे प्रभावित देशों में से एक है, जहाँ पिछले दशक में पर्यटन-संचालित संपत्ति बाजार ने स्थानीय निवासियों को उनके पड़ोस से विस्थापित किया है।
आम जनता पर असर
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि घरों की कीमतें और किराया आम नागरिकों की पहुँच से बाहर होते जा रहे हैं। युवा पेशेवरों और कम आय वर्ग के परिवारों के लिए शहरी केंद्रों में रहना कठिन होता जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि सरकार की मौजूदा नीतियाँ निवेशकों के हितों की रक्षा तो करती हैं, लेकिन किफायती आवास की आपूर्ति बढ़ाने में नाकाम रही हैं।
आगे क्या
प्रदर्शन के बाद सरकार पर नीतिगत कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है। राष्ट्रपति सेगुरो के बयान से संकेत मिलता है कि सत्ता के उच्च स्तर पर भी इस असंतोष को अनदेखा करना अब मुश्किल होगा। पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि संसद ने रियल एस्टेट निवेश पर नियामक उपायों पर जल्द कदम नहीं उठाए, तो ये प्रदर्शन और बड़े रूप ले सकते हैं।