रूस संसदीय चुनाव 2026: यूनाइटेड रशिया को 57.86% वोट, पुतिन समर्थित पार्टी की बड़ी जीत
सारांश
मुख्य बातें
रूस की संसद स्टेट ड्यूमा के चुनावों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली यूनाइटेड रशिया पार्टी ने 57.86 प्रतिशत मत हासिल कर भारी बहुमत की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। 90.43 प्रतिशत मतपत्रों की गिनती पूरी होने के बाद जारी केंद्रीय निर्वाचन आयोग के आँकड़ों के अनुसार आधिकारिक परिणाम की घोषणा अभी शेष है। यह फरवरी 2022 में यूक्रेन के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद रूस का पहला संसदीय चुनाव है।
मुख्य चुनाव परिणाम
उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार दूसरे स्थान पर LDPR नहीं बल्कि CRPF रही, जिसे 13.84 प्रतिशत मत मिले। तीसरे स्थान पर LDPR को 8.9 प्रतिशत, जबकि न्यू पीपल को 7.94 प्रतिशत और ए जस्ट रशिया को 4.95 प्रतिशत वोट मिले। तुलनात्मक रूप से, 2021 के पिछले संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने 450 में से 324 सीटें जीती थीं। देशभर में 56.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि मास्को में मतदान रिकॉर्ड स्तर पर रहा।
स्टेट ड्यूमा: रूसी संसद की संरचना
स्टेट ड्यूमा रूस की संसद का निचला सदन है — ठीक उसी तरह जैसे भारत में लोकसभा होती है। इसमें कुल 450 सीटें हैं, जिनमें 225 सीटें पार्टी को मिले वोटों के आधार पर और 225 सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में सीधे चुनाव के ज़रिए तय होती हैं। यह सदन देश के कानून बनाता है और पुराने कानूनों में संशोधन करता है।
चुनाव का राजनीतिक संदर्भ
पुतिन ने इस चुनाव को यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन से सीधे तौर पर जोड़कर पेश किया था। गौरतलब है कि युद्ध-विरोधी पार्टी याब्लोको को इस बार चुनाव मैदान में उतरने से रोक दिया गया था, हालांकि उसके कुछ नेताओं को व्यक्तिगत रूप से चुनाव लड़ने की अनुमति मिली। कथित तौर पर कई सरकार-विरोधी उम्मीदवारों को भी चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया। आलोचकों का कहना है कि इन प्रतिबंधों ने चुनाव की प्रतिस्पर्धात्मक प्रकृति को सीमित किया।
ड्रोन हमलों के बीच संपन्न मतदान
चुनाव के अंतिम दिन रविवार को यूक्रेन ने कथित तौर पर मास्को और उसके आसपास के इलाकों में 1,600 से अधिक ड्रोन भेजे। मास्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने दावा किया कि राजधानी को निशाना बनाकर 450 ड्रोन भेजे गए थे। इन परिस्थितियों के बावजूद मतदान प्रक्रिया बाधित नहीं हुई।
पुतिन और यूनाइटेड रशिया का संबंध
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति पुतिन यूनाइटेड रशिया पार्टी के औपचारिक सदस्य नहीं हैं। वे 2008 से 2012 तक इसके अध्यक्ष ज़रूर रहे, लेकिन उस दौरान भी उनकी औपचारिक पार्टी-सदस्यता नहीं थी — क्योंकि पार्टी के नियमों के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए सदस्यता अनिवार्य नहीं है। 2012 में पुतिन ने अध्यक्ष पद छोड़ा और इसकी कमान दिमित्री मेदवेदेव को सौंपी। आधिकारिक परिणाम घोषित होने के बाद ड्यूमा का नया संगठन स्पष्ट होगा, जो आने वाले वर्षों में रूस की घरेलू और विदेश नीति को आकार देगा।