रूस ने स्टीफन हबर्ड को बिना शर्त रिहा किया, ट्रंप बोले — पुतिन से फोन पर माँगा था
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अक्टूबर 2026 को पुष्टि की कि रूस ने अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड को बिना किसी शर्त के रिहा कर दिया है। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई फोन वार्ता में यूक्रेन युद्धविराम चर्चा के दौरान हबर्ड की रिहाई का मुद्दा उठाया था, जिस पर पुतिन ने सहमति जताई।
व्हाइट हाउस में ट्रंप का बयान
वाशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी पर आयोजित एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, 'मैं व्लादिमीर पुतिन से यूक्रेन युद्ध को खत्म करने पर बात कर रहा था। मुझे लगता है कि हम समझौते के पहले से कहीं ज़्यादा करीब पहुँच गए हैं। उसी दौरान मैंने उनसे कहा कि कृपया स्टीफन हबर्ड को रिहा कर दीजिए। उन्होंने इसके लिए हामी भर दी।' ट्रंप ने बताया कि हबर्ड रिहाई के बाद विमान से अमेरिका लौट रहे हैं और उनके साथ अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ तथा उनका परिवार भी है।
बदले में कुछ नहीं दिया — ट्रंप का दावा
ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा कि इस रिहाई के लिए अमेरिका ने रूस को कोई भी काउंटर-रियायत नहीं दी। उन्होंने कहा, 'हमने बदले में कुछ नहीं दिया, जो बहुत दुर्लभ बात है। अगर आप एक बार बदले में कुछ देना शुरू कर दें, तो समस्या और बढ़ जाती है।' यह दावा कथित तौर पर उन आलोचकों के बरक्स है जो मानते थे कि बंधकों की रिहाई के लिए किसी-न-किसी रूप में सौदेबाज़ी ज़रूरी होती है। ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने बुधवार सुबह हबर्ड से सीधे बात की। उनके परिवार को आशंका थी कि वे अगले 20 से 25 साल तक रूसी कैद में रह सकते हैं।
रूस के खिलाफ कड़े कदम न उठाने का तर्क
ट्रंप ने स्वीकार किया कि कुछ आलोचक चाहते थे कि वे रूस के खिलाफ और सख्त रुख अपनाएँ। उन्होंने कहा, 'अगर मैं वही करता जो कुछ लोग चाहते थे, तो हबर्ड आज रिहा नहीं होते — शायद उन्हें और 20 साल जेल में रहना पड़ता।' ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वे यूक्रेन शांति वार्ता को पटरी से उतारने वाला कोई भी कदम नहीं उठाना चाहते थे। हालाँकि उन्होंने यह नहीं बताया कि आलोचक रूस के खिलाफ कौन-से विशेष कदमों की माँग कर रहे थे।
ईरान पर ट्रंप के तीखे दावे
उसी संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति को लेकर बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कार्रवाइयों के बाद ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और कई अन्य सैन्य क्षमताएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, और ईरान की अर्थव्यवस्था भी 'गंभीर दबाव' में है। ये दावे स्वतंत्र स्रोतों द्वारा तत्काल सत्यापित नहीं हो पाए हैं।
रूस और चीन की भूमिका पर ट्रंप की प्रतिक्रिया
ट्रंप ने रूस और चीन की ईरान संघर्ष में 'सीमित भागीदारी' को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा, 'रूस और चीन दोनों ही इस युद्ध को खत्म होते देखना चाहते हैं। हम रूस के साथ इस दिशा में काम कर रहे हैं और चीन भी इसमें शामिल है।' हालाँकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस बयान में वे किस युद्ध का जिक्र कर रहे थे और चीन की भूमिका की प्रकृति क्या है — जो कूटनीतिक विश्लेषकों के लिए अनुत्तरित प्रश्न बना हुआ है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-रूस संबंधों और यूक्रेन शांति प्रक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र टिकी है।