एससीओ महासचिव येरमेकबायेव: 25 वर्षों में संगठन ने 29 क्षेत्रों में सहयोग तंत्र स्थापित किया
सारांश
मुख्य बातें
शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) के महासचिव नुरलान येरमेकबायेव ने कहा है कि पिछले 25 वर्षों में एससीओ ने क्षेत्रीय सहयोग का एक नया और प्रभावी मार्ग तैयार किया है। 2026 बिश्केक शिखर सम्मेलन से पूर्व दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने संगठन की उपलब्धियों, आर्थिक सहयोग की संभावनाओं और वैश्विक शासन में एससीओ की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। येरमेकबायेव के अनुसार, संगठन अब 29 विशिष्ट क्षेत्रों में सक्रिय सहयोग तंत्र के साथ काम कर रहा है।
25 वर्षों की उपलब्धियाँ
येरमेकबायेव ने कहा कि एससीओ की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही है कि उसने विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाले देशों के बीच आपसी विश्वास और समान संवाद की व्यवस्था विकसित की है। इस ढाँचे ने जटिल मुद्दों पर आम सहमति बनाने में सहायता की है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि संगठन सदस्य देशों के आकार या आर्थिक शक्ति के आधार पर कोई भेद नहीं करता, बल्कि आम सहमति के सिद्धांत को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
बिश्केक शिखर सम्मेलन की तैयारियाँ
आगामी बिश्केक शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए महासचिव ने उम्मीद जताई कि इसमें कई व्यावहारिक दस्तावेज़ पारित किए जाएंगे, जो सदस्य देशों के बीच स्थायी शांति और समृद्धि के लिए सहयोग को और सुदृढ़ करेंगे। गौरतलब है कि यह शिखर सम्मेलन एससीओ की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित हो रहा है, जो इसे विशेष महत्व देता है।
आर्थिक सहयोग और उभरती प्रौद्योगिकियाँ
येरमेकबायेव ने बताया कि पिछले वर्ष चीन के थ्येनचिन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में बहुपक्षीय परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए एससीओ विकास बैंक की स्थापना का राजनीतिक निर्णय लिया गया था, जिसमें बुनियादी ढाँचे की कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हरित विकास संगठन की वर्तमान प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं। इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए चीन-एससीओ ऊर्जा सहयोग केंद्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुप्रयोग केंद्र की स्थापना की जा चुकी है।
व्यापार और बहुपक्षीय क्षमता
महासचिव ने बताया कि वर्ष 2026 से एससीओ सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार 700 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि बहुपक्षीय परियोजनाओं की क्षमता का अभी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है और इस दिशा में और अधिक प्रयास आवश्यक हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक व्यापार तनाव के बीच क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण की माँग बढ़ रही है।
वैश्विक शासन और 'शांगहाई भावना'
येरमेकबायेव ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की 'वैश्विक शासन पहल' की सराहना करते हुए कहा कि यह 'शांगहाई भावना' के अनुरूप है। उनके अनुसार, यह पहल समानता, जन-केंद्रित विकास, सांस्कृतिक विविधता के सम्मान और साझा विकास के मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने यह भी बताया कि एससीओ सदस्य देशों ने ब्रिक्स और अन्य बहुपक्षीय तंत्रों के साथ सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है, ताकि एक अधिक न्यायसंगत और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि एससीओ का यह विस्तारित दृष्टिकोण पश्चिमी नेतृत्व वाली व्यवस्था के समानांतर एक वैकल्पिक बहुपक्षीय ढाँचे की दिशा में संगठन की बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।