इंटरपोल रिपोर्ट 2026: दक्षिण अफ्रीका में अफ्रीका के 92% रैनसमवेयर हमले, एआई से बढ़ा खतरा
सारांश
मुख्य बातें
इंटरपोल की 'अफ्रीकन साइबरथ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट 2026' के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका अब पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा निशाना बन चुका है — रैनसमवेयर, फिशिंग और बिजनेस ईमेल धोखाधड़ी के अधिकांश मामले यहीं दर्ज किए जा रहे हैं। 5 अगस्त 2026 को सार्वजनिक हुई इस 40 पन्नों की रिपोर्ट में 36 अफ्रीकी देशों से जुटाए गए आँकड़ों के आधार पर दक्षिणी अफ्रीका को 'महाद्वीप का सबसे अधिक डिजिटल रूप से विकसित और सबसे ज़्यादा निशाना बनाया जाने वाला क्षेत्र' करार दिया गया है।
चौंकाने वाले आँकड़े
रिपोर्ट में उद्धृत साइबर सुरक्षा कंपनी ट्रेंडएआई के आँकड़ों के अनुसार, अफ्रीका के कुल रैनसमवेयर मामलों में से 92 प्रतिशत अकेले दक्षिण अफ्रीका में पाए गए। इसके अलावा देश में 2,13,523 डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल-ऑफ-सर्विस (DDoS) हमले दर्ज हुए, जिनमें एक हमले की गति 312 गीगाबिट प्रति सेकंड तक पहुँची — जो महाद्वीप में अब तक दर्ज सबसे तीव्र हमलों में से एक है।
साइबर सुरक्षा कंपनी एसओसीरडार के आँकड़ों के आधार पर रिपोर्ट में बताया गया कि अफ्रीका के कुल फिशिंग मामलों में से लगभग 40 प्रतिशत दक्षिण अफ्रीका से जुड़े थे। वहीं, ट्रेंडएआई के 2025 के आँकड़ों के अनुसार बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज (BEC) के 70 प्रतिशत मामले भी इसी देश से संबंधित थे।
एआई ने बदली साइबर अपराध की तस्वीर
रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि अफ्रीका में साइबर अपराध अब छिटपुट घटनाओं तक सीमित नहीं रहा — यह एक 'संगठित और सीमाओं से परे फैला हुआ नेटवर्क' बन चुका है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और स्वचालित तकनीकों का बढ़ता उपयोग इस नेटवर्क को और अधिक ताकतवर बना रहा है।
इंटरपोल की साइबर अपराध इकाई के निदेशक नील जेटन ने कहा, 'साइबर अपराध इस क्षेत्र के लिए सबसे गंभीर आपराधिक खतरों में से एक बन चुका है।' उन्होंने आगे कहा, 'एआई साइबर हमले के हर चरण को ऑटोमेट कर रहा है — चाहे वह जानकारी जुटाना हो, फिशिंग करना हो, पैसे की वसूली करना हो या सुरक्षा से बच निकलना हो।'
यह ऐसे समय में आया है जब 2025 में ऑनलाइन ठगी और धोखाधड़ी अफ्रीका में सबसे अधिक रिपोर्ट किए जाने वाले साइबर अपराध रहे। अपराधी मोबाइल मनी प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और एआई तकनीक का इस्तेमाल कर आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।
आर्थिक नुकसान और संगठित स्कैम नेटवर्क
रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका में साइबर अपराध से होने वाला आर्थिक नुकसान 2024 के बाद से दोगुने से भी अधिक बढ़ गया है — यह 19.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 48.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है। गौरतलब है कि सर्वे में शामिल 72 प्रतिशत अफ्रीकी देशों ने बताया कि उनके यहाँ ऑनलाइन ठगी से जुड़े संगठित स्कैम सेंटर सक्रिय हैं, जिनकी सबसे अधिक संख्या दक्षिणी और पश्चिमी अफ्रीका में पाई गई।
सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत, फिर भी असुरक्षित
रिपोर्ट में एक महत्त्वपूर्ण विरोधाभास भी उजागर हुआ है — भले ही दक्षिणी अफ्रीका के देशों के पास महाद्वीप की कुछ सबसे मज़बूत साइबर सुरक्षा व्यवस्थाएँ मौजूद हैं, फिर भी एआई की मदद से होने वाले तीव्र और बड़े पैमाने के साइबर हमलों के सामने वे अभी भी काफी हद तक असुरक्षित बने हुए हैं। नील जेटन ने हालाँकि यह भी कहा कि जब देश मिलकर काम करते हैं, तो साइबर अपराधियों के नेटवर्क की पहचान की जा सकती है, उन्हें बाधित किया जा सकता है और समाप्त भी किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एआई-प्रतिरोधी साइबर ढाँचे के निर्माण पर आने वाले महीनों में नीति-निर्माताओं का ध्यान केंद्रित रहेगा।