10 अक्टूबर 2026
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दक्षिण कोरिया ने यूक्रेन से वापस बुलाया राजदूत, उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों के खुलासे पर भड़का सोल

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दक्षिण कोरिया ने यूक्रेन से वापस बुलाया राजदूत, उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों के खुलासे पर भड़का सोल

सारांश

यूक्रेन ने संयुक्त राष्ट्र में वह राज़ खोल दिया जिसे सोल ने छुपाए रखा था — दो उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों की दक्षिण कोरिया में मौजूदगी। अब सोल ने राजदूत वापस बुला लिया है, जो 2008 के बाद पहला ऐसा दुर्लभ कदम है। यूक्रेन की माफी 'नाकाफी' बताई गई।

मुख्य बातें

दक्षिण कोरिया के राजदूत पार्क की-चांग 10 अक्टूबर 2026 को यूक्रेन से वापस बुलाए गए।
विवाद की जड़ में राष्ट्रपति जेलेंस्की का संयुक्त राष्ट्र महासभा में दो उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों के दक्षिण कोरिया भेजे जाने का खुलासा है।
दोनों सैनिक जनवरी 2025 में रूस के कुर्स्क क्षेत्र में पकड़े गए और सितंबर 2026 में दक्षिण कोरिया पहुँचे।
विदेश मंत्री चो ह्यून के अनुसार यूक्रेन की माफी सोल की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं थी।
यूक्रेन ने गोपनीयता की किसी सहमति से इनकार किया है; दक्षिण कोरिया ने 2008 के बाद पहली बार इतना कड़ा राजनयिक कदम उठाया।
दोनों देशों ने राजनयिक संबंध समाप्त करने की घोषणा नहीं की; परामर्श जारी रहेगा।

दक्षिण कोरिया के यूक्रेन में तैनात राजदूत पार्क की-चांग 10 अक्टूबर 2026 को स्वदेश लौट आए, जब सोल और कीव के बीच राजनयिक तनाव उस समय चरम पर पहुँच गया जब यूक्रेन ने दो उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों को दक्षिण कोरिया भेजे जाने की जानकारी सार्वजनिक कर दी। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने इस कदम की आधिकारिक पुष्टि की है। यह कार्रवाई विदेश मंत्रालय द्वारा राजदूत वापस बुलाने के फैसले की घोषणा के ठीक दो दिन बाद हुई।

विवाद की जड़: जेलेंस्की का संयुक्त राष्ट्र में खुलासा

इस राजनयिक संकट की शुरुआत तब हुई जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पिछले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए यह सार्वजनिक रूप से घोषित किया कि दो उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों को दक्षिण कोरिया भेजा जा चुका है। सोल का कहना है कि दोनों देशों के बीच इस पूरे मामले को गोपनीय रखने पर पहले ही सहमति बन चुकी थी।

दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के अनुसार, ये दोनों उत्तर कोरियाई सैनिक जनवरी 2025 में रूस के कुर्स्क क्षेत्र में लड़ाई के दौरान यूक्रेनी बलों की कैद में आए थे। ये सैनिक रूस की ओर से युद्धभूमि में थे और सितंबर 2026 के मध्य में दक्षिण कोरिया पहुँचे।

गोपनीयता पर दोनों देशों में मतभेद

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने स्पष्ट किया कि मामले को सार्वजनिक न करने का अनुरोध शुरुआत में स्वयं यूक्रेन की ओर से किया गया था। सोल के अनुसार, यह सावधानी उन सैनिकों और उत्तर कोरिया में रह रहे उनके परिवारों की सुरक्षा को देखते हुए बरती गई थी।

हालाँकि, यूक्रेन ने ऐसी किसी भी गोपनीयता संबंधी सहमति से साफ इनकार कर दिया है। इसी मतभेद ने दोनों देशों के बीच तनाव को और गहरा कर दिया। दक्षिण कोरिया ने यूक्रेन से आधिकारिक माफी और स्पष्टीकरण की माँग की।

माफी पर्याप्त नहीं: सोल का रुख

विदेश मंत्री चो ह्यून ने 6 अक्टूबर 2026 को बताया कि उन्हें यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा की ओर से माफी का संदेश मिला है, लेकिन वह दक्षिण कोरिया की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं था। इसके बाद सोल ने कड़े राजनयिक कदम उठाने का फैसला किया, जिसकी परिणति राजदूत वापस बुलाने के रूप में सामने आई।

दुर्लभ राजनयिक कदम

किसी देश के राजदूत को वापस बुलाना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में विरोध दर्ज कराने का एक अत्यंत असाधारण और गंभीर तरीका माना जाता है। उल्लेखनीय है कि दक्षिण कोरिया ने इससे पहले 2008 में जापान के साथ विवाद के दौरान ऐसा कदम उठाया था। यह ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों की संलिप्तता एक संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।

गौरतलब है कि इस पूरे विवाद के बावजूद दोनों देशों ने राजनयिक संबंध समाप्त करने की कोई घोषणा नहीं की है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह विभिन्न मुद्दों का सौहार्दपूर्ण समाधान चाहता है और यूक्रेन के साथ परामर्श जारी रखेगा।

आगे की राह

इस संकट का व्यापक असर रूस-यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई भागीदारी को लेकर वैश्विक चर्चा पर भी पड़ सकता है। दक्षिण कोरिया के लिए यह मामला केवल कूटनीतिक शिष्टाचार का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और उत्तर कोरियाई नागरिकों की सुरक्षा का भी प्रश्न है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में दोनों पक्षों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सोल के लिए वह क्षण उन सैनिकों और उनके परिवारों के लिए खतरे की घड़ी बन गया जो अभी भी उत्तर कोरिया में हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि यूक्रेन को दक्षिण कोरिया से हथियार आपूर्ति और राजनयिक समर्थन की दरकार है, ऐसे में इस कदम का रणनीतिक मूल्यांकन दोनों पक्षों के लिए जटिल है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि इस घटना ने उत्तर कोरिया और रूस के सैन्य सहयोग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ज़्यादा दृश्यमान बना दिया है, जो लंबे समय से अनुमान की बात थी।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण कोरिया और यूक्रेन के बीच यह राजनयिक विवाद किस बात पर है?
विवाद इस बात पर है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में सार्वजनिक रूप से यह खुलासा कर दिया कि दो उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों को दक्षिण कोरिया भेजा गया है। दक्षिण कोरिया का दावा है कि इस जानकारी को गोपनीय रखने पर सहमति बनी थी, जबकि यूक्रेन ने ऐसी किसी सहमति से इनकार किया है।
ये उत्तर कोरियाई युद्धबंदी कहाँ पकड़े गए थे और दक्षिण कोरिया कब पहुँचे?
दोनों उत्तर कोरियाई सैनिकों को जनवरी 2025 में रूस के कुर्स्क क्षेत्र में लड़ाई के दौरान यूक्रेनी बलों ने पकड़ा था। वे रूस की ओर से युद्ध में शामिल थे और सितंबर 2026 के मध्य में दक्षिण कोरिया पहुँचे।
दक्षिण कोरिया ने राजदूत क्यों वापस बुलाया?
दक्षिण कोरिया ने यूक्रेन के इस कदम के विरोध में राजदूत पार्क की-चांग को वापस बुलाया, जो एक दुर्लभ राजनयिक कदम है। विदेश मंत्री चो ह्यून के मुताबिक यूक्रेन की ओर से मिली माफी सोल की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं थी, जिसके बाद यह कड़ा कदम उठाया गया।
क्या दक्षिण कोरिया और यूक्रेन के बीच संबंध पूरी तरह टूट गए हैं?
नहीं, दोनों देशों ने राजनयिक संबंध समाप्त करने की कोई घोषणा नहीं की है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह मुद्दों का सौहार्दपूर्ण समाधान चाहता है और यूक्रेन के साथ परामर्श जारी रखेगा।
दक्षिण कोरिया ने इससे पहले कब राजदूत वापस बुलाया था?
दक्षिण कोरिया ने इससे पहले 2008 में जापान के साथ विवाद के दौरान अपने राजदूत को वापस बुलाया था। यह इस तरह का अत्यंत दुर्लभ राजनयिक कदम है, जो किसी देश के प्रति गहरी नाराज़गी दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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