सुदान गुरुंग की नेपाल के गृह मंत्री पद पर वापसी संभव, पीएम बालेंद्र शाह ने राष्ट्रपति को भेजी सिफारिश
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने 9 जून 2026 को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को सुदान गुरुंग को पुनः गृह मंत्री नियुक्त करने की सिफारिश भेजी है। गुरुंग ने 22 अप्रैल को कथित वित्तीय लेन-देन विवाद के बाद यह पद छोड़ा था, और तब से प्रधानमंत्री शाह स्वयं गृह मंत्रालय का कामकाज संभाल रहे थे।
जांच समिति की रिपोर्ट और मंत्रिमंडल की स्वीकृति
प्रधानमंत्री शाह ने यह सिफारिश उस समिति की रिपोर्ट को मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद की है, जिसे गुरुंग से जुड़े मामलों की जांच के लिए गठित किया गया था। रिपोर्ट अभी तक आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं हुई है। हालांकि, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जांच समिति को गुरुंग के किसी भी गलत वित्तीय लेन-देन का ठोस सबूत नहीं मिला।
राष्ट्रपति कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'हमें गुरुंग को नया गृहमंत्री बनाने के लिए प्रधानमंत्री से सिफारिश पत्र मिला है। इसी तरह, पूर्व मंत्री और सांसद महाबीर भी विज्ञान, तकनीक और नवाचार मंत्री बनेंगे।'
शपथ ग्रहण की तैयारी
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल गुरुंग को पद की शपथ दिलाएंगे। राष्ट्रपति कार्यालय के अधिकारी ने स्पष्ट किया, 'शपथ ग्रहण समारोह का सही समय अभी तय नहीं हुआ है।' यह नियुक्ति होते ही प्रधानमंत्री शाह के पास डेढ़ महीने से अधिक समय से चल रहे अतिरिक्त गृह मंत्रालय के प्रभार का बोझ समाप्त हो जाएगा।
विवाद की पृष्ठभूमि
इस साल अप्रैल में तत्कालीन गृह मंत्री गुरुंग विवादित व्यवसायी दीपक भट्टा के साथ कथित व्यावसायिक संबंधों को लेकर जांच के दायरे में आए थे। भट्टा इस समय मनी-लॉन्ड्रिंग के आरोपों में न्यायिक हिरासत में हैं। 22 अप्रैल को गुरुंग ने फेसबुक पर एक पोस्ट के ज़रिए अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए लिखा था, 'मुझसे जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और पद पर रहते हुए किसी भी तरह के हितों के टकराव या प्रक्रिया पर किसी भी तरह के असर से बचने के लिए मैंने आज से गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है।'
गौरतलब है कि गुरुंग 5 मार्च के चुनावों के बाद 27 मार्च को बनी शाह सरकार के एक महीने के भीतर पद छोड़ने वाले दूसरे कैबिनेट मंत्री थे। वे पिछले साल सितंबर में उभरे जेनजी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक रहे हैं।
राजनीतिक महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल की नई सरकार अपने शुरुआती महीनों में स्थिरता स्थापित करने की कोशिश कर रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर गुरुंग की वापसी सरकार के लिए एक राजनीतिक संकेत है कि आंतरिक जवाबदेही तंत्र काम कर रहा है — हालांकि आलोचकों का कहना है कि रिपोर्ट का सार्वजनिक न होना पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। यदि नियुक्ति संपन्न होती है, तो गुरुंग नेपाल के उन विरले मंत्रियों में शामिल हो जाएंगे जो विवाद के बाद जांच की प्रक्रिया पूरी कर पद पर लौटे हों।