26 जुलाई 2026
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नेपाल: बालेंद्र शाह ने किया मंत्रिमंडल विस्तार, सुधन गुरुंग फिर गृह मंत्री — जांच में क्लीन चिट के बाद वापसी

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नेपाल: बालेंद्र शाह ने किया मंत्रिमंडल विस्तार, सुधन गुरुंग फिर गृह मंत्री — जांच में क्लीन चिट के बाद वापसी

सारांश

जांच समिति की क्लीन चिट के बाद नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरुंग की वापसी हुई है — करीब डेढ़ महीने बाद। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने मंत्रिमंडल विस्तार में महावीर पुन को विज्ञान मंत्री भी बनाया। संपत्ति विवाद के बाद यह पुनर्नियुक्ति नेपाल की नई सरकार की स्थिरता की परीक्षा भी है।

मुख्य बातें

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने 9 जून 2026 को मंत्रिमंडल विस्तार किया।
सुधन गुरुंग को पुनः गृह मंत्री बनाया गया — पूर्व न्यायाधीश अच्युत प्रसाद भंडारी की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने क्लीन चिट दी।
गुरुंग ने 22 अप्रैल को विवादित कारोबारी दीपक भट्टा से कथित संबंधों के आरोपों के बाद इस्तीफा दिया था।
महावीर पुन — म्याग्दी जिले के स्वतंत्र सांसद — को विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री नियुक्त किया गया।
27 मार्च को गठित नई सरकार में गुरुंग एक माह के भीतर इस्तीफा देने वाले दूसरे मंत्री थे।
गुरुंग जेन-जेड आंदोलन (सितंबर 2025) के प्रमुख नेताओं में से एक हैं।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने मंगलवार, 9 जून 2026 को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए सुधन गुरुंग को पुनः गृह मंत्री नियुक्त किया और महावीर पुन को विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री का पद सौंपा। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने काठमांडू स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में दोनों नेताओं को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

गुरुंग की वापसी: इस्तीफे से पुनर्नियुक्ति तक

गुरुंग ने 22 अप्रैल को अपने वित्तीय लेन-देन को लेकर उठे विवाद के बाद गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन पर आरोप था कि उनके मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में न्यायिक हिरासत में बंद विवादित कारोबारी दीपक भट्टा के साथ व्यावसायिक संबंध हैं। इस्तीफे के बाद से प्रधानमंत्री शाह स्वयं करीब डेढ़ महीने तक गृह मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभालते रहे।

11 मई को कैबिनेट ने पूर्व न्यायाधीश अच्युत प्रसाद भंडारी की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंप दी, जिसमें स्पष्ट किया गया कि गुरुंग और दीपक भट्टा के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध साबित नहीं हुआ और न ही दोनों के बीच किसी वित्तीय लेन-देन का बैंक रिकॉर्ड मिला। इसी क्लीन चिट के आधार पर उनकी पुनर्नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ।

विवाद की पृष्ठभूमि: संपत्ति और कारोबारी संबंध

12 अप्रैल को जब प्रधानमंत्री शाह और अन्य मंत्रियों ने अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक किया, तब गुरुंग मंत्रिमंडल के सबसे अमीर सदस्यों में से एक पाए गए। उनके पास बड़ी मात्रा में नकद जमा, कई कंपनियों के शेयर और काफी जमीन-जायदाद थी, जो कथित तौर पर कानूनी सीमा से अधिक थी।

जांच समिति के समक्ष दिए गए बयान में गुरुंग ने कहा कि उन्होंने काठमांडू के प्रमुख पर्यटन क्षेत्र ठमेल में एक होटल चलाकर आय अर्जित की थी और बाद में उसी धन को शेयरों और सोने में निवेश किया था। समिति ने अपनी जांच में इस स्पष्टीकरण को आधार माना। हालांकि, यह भी सामने आया कि उन्होंने भट्टा द्वारा प्रोत्साहित एक माइक्रो-इंश्योरेंस कंपनी में निवेश किया था, जिससे उनके कारोबारी संबंधों को लेकर सवाल बने रहे।

गुरुंग ने अपनी संपत्ति को लेकर उठे सवालों के जवाब में सोशल मीडिया पर लिखा था: 'अगर आप गरीब पैदा होते हैं तो यह आपकी गलती नहीं है, लेकिन अगर आप गरीब ही मरते हैं तो यह आपकी गलती है। सरकार में आने से पहले बिना भ्रष्टाचार के धन कमाना कोई पाप नहीं है, लेकिन सरकार में आने के बाद भ्रष्टाचार करके धन कमाना पाप है।'

महावीर पुन: स्वतंत्र सांसद से मंत्री तक

नवनियुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री महावीर पुन पश्चिमी नेपाल के म्याग्दी जिले से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में संसद के लिए निर्वाचित हुए थे। इससे पहले वे पूर्व प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में भी मंत्री पद संभाल चुके हैं।

राजनीतिक संदर्भ: जेन-जेड आंदोलन और नई सरकार

गौरतलब है कि 5 मार्च के चुनावों के बाद 27 मार्च को गठित नई सरकार में गुरुंग एक महीने से भी कम समय में इस्तीफा देने वाले दूसरे मंत्री बने थे। यह ऐसे समय में आया जब नई सरकार अपनी स्थिरता सिद्ध करने की कोशिश में थी।

गुरुंग उन प्रमुख नेताओं में भी शामिल हैं जिन्होंने पिछले साल सितंबर में शुरू हुए जेन-जेड आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। गुरुंग गोरखा-1 संसदीय क्षेत्र से प्रतिनिधि सभा के सदस्य हैं। उनकी पुनर्नियुक्ति से सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद राजनीतिक विश्वसनीयता बहाल मानी जाती है — हालांकि आलोचकों का कहना है कि संपत्ति संबंधी सवाल अभी पूरी तरह नहीं सुलझे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस्तीफा, जांच, पुनर्नियुक्ति। जांच समिति ने भले ही प्रत्यक्ष वित्तीय संबंध नहीं पाया, लेकिन माइक्रो-इंश्योरेंस निवेश और कानूनी सीमा से अधिक संपत्ति के सवाल अनुत्तरित हैं। असली सवाल यह है कि क्या नेपाल की नई सरकार जवाबदेही के लिए स्वतंत्र और पारदर्शी तंत्र बना सकती है, या हर बार 'क्लीन चिट' ही राजनीतिक पुनर्वास का पर्याय बनती रहेगी।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुधन गुरुंग को फिर से गृह मंत्री क्यों बनाया गया?
पूर्व न्यायाधीश अच्युत प्रसाद भंडारी की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि गुरुंग और विवादित कारोबारी दीपक भट्टा के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध या वित्तीय लेन-देन का बैंक रिकॉर्ड नहीं मिला। इस क्लीन चिट के आधार पर प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने उन्हें 9 जून 2026 को पुनः गृह मंत्री नियुक्त किया।
सुधन गुरुंग ने गृह मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया था?
गुरुंग ने 22 अप्रैल को इस्तीफा दिया था, क्योंकि उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में न्यायिक हिरासत में बंद कारोबारी दीपक भट्टा के साथ व्यावसायिक संबंध होने के आरोप लगे थे। उन्होंने कहा था कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और हितों के टकराव से बचने के लिए वे पद छोड़ रहे हैं।
महावीर पुन कौन हैं और उन्हें कौन सा मंत्रालय मिला?
महावीर पुन पश्चिमी नेपाल के म्याग्दी जिले से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में संसद के लिए निर्वाचित हुए हैं। उन्हें विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री बनाया गया है। वे पूर्व प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की अंतरिम सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।
नेपाल की नई सरकार का गठन कब हुआ और इसमें अब तक क्या बदलाव हुए?
5 मार्च के चुनावों के बाद 27 मार्च 2026 को बालेंद्र शाह के नेतृत्व में नई सरकार बनी थी। गुरुंग इस सरकार में एक महीने के भीतर इस्तीफा देने वाले दूसरे मंत्री बने थे। 9 जून को किए गए मंत्रिमंडल विस्तार में दो नए मंत्रियों की शपथ के साथ सरकार ने स्थिरता की दिशा में कदम बढ़ाया है।
सुधन गुरुंग की संपत्ति को लेकर क्या विवाद था?
12 अप्रैल को संपत्ति विवरण सार्वजनिक होने पर गुरुंग मंत्रिमंडल के सबसे अमीर सदस्यों में पाए गए — उनके पास बड़ी नकद जमा, कई कंपनियों के शेयर और जमीन-जायदाद थी, जो कथित तौर पर कानूनी सीमा से अधिक थी। उन्होंने ठमेल में होटल व्यवसाय से अर्जित आय को इसका स्रोत बताया, जिसे जांच समिति ने आधार माना।
राष्ट्र प्रेस
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