अमेरिकी आतंक सूची से सीरिया का नाम हटा, दमिश्क ने बताया 'नए युग की शुरुआत'
सारांश
मुख्य बातें
सीरिया ने 25 अगस्त 2026 को अमेरिका के उस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत किया, जिसके तहत उसे आतंकवाद प्रायोजक देशों की अमेरिकी सूची से औपचारिक रूप से हटा दिया गया है। दमिश्क ने इसे दशकों की अंतरराष्ट्रीय अलग-थलग स्थिति के अंत की दिशा में एक निर्णायक कदम करार दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
अमेरिका के सीरिया और इराक मामलों के विशेष राष्ट्रपति दूत टॉम बैरक ने सोमवार को पुष्टि की कि वॉशिंगटन ने औपचारिक रूप से सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची से बाहर कर दिया है। यह सूची 1979 में बनाई गई थी, जब सीरिया को पहली बार इसमें शामिल किया गया था। उस समय अमेरिका का आरोप था कि तत्कालीन सीरियाई सरकार के लेबनान के हिज़्बुल्लाह, कुछ फिलिस्तीनी संगठनों और ईरान से संबंध थे।
इस सूची में ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया जैसे देश भी शामिल हैं। सीरिया लगभग चार दशकों से अधिक समय तक इस सूची में बना रहा।
सरकार की प्रतिक्रिया
सीरिया के विदेश मामलों से जुड़े प्राधिकरण ने इस फैसले को 'सीरिया के अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत' बताया। प्राधिकरण के अनुसार, इस कदम से देश की आर्थिक बहाली को गति मिलेगी, पुनर्निर्माण के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा और सीरिया में स्थिरता एवं सुरक्षा को मज़बूती मिलेगी।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, 'ट्रेजरी विभाग राष्ट्रपति ट्रंप के उस वादे को पूरा कर रहा है, जिसमें उन्होंने सीरिया की जनता को आगे बढ़ने का अवसर देने की बात कही थी। आज का यह कदम सीरिया में अतिरिक्त निवेश को प्रोत्साहित करेगा और राजनीतिक तथा आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देगा।'
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, 'ये सभी कदम राष्ट्रपति अहमद अल शारा के नेतृत्व वाली सीरियाई सरकार की ओर से उठाए गए सकारात्मक कदमों और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से पूरी तरह दूरी बनाने की उसकी प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखकर उठाए गए हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष में सीरिया की सरकार ने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
विशेष दूत टॉम बैरक ने कहा कि यह सूचीबद्ध दर्जा लंबे समय से सीरियाई जनता को उस निवेश, कारोबार और अवसरों से दूर रखे हुए था, जिनकी देश के पुनर्निर्माण के लिए ज़रूरत थी। उन्होंने कहा, 'आज एक और दीवार गिर गई है।' आलोचकों का मानना है कि इस फैसले से सीरिया में विदेशी निवेश का रास्ता खुलेगा और युद्ध-प्रभावित बुनियादी ढाँचे की बहाली में तेज़ी आएगी।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सीरिया वर्षों के गृहयुद्ध के बाद पुनर्निर्माण की कोशिशों में जुटा है और नई सरकार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संबंध सामान्य करने की दिशा में काम कर रही है।
क्या होगा आगे
इस फैसले के बाद सीरिया के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच आसान होने की उम्मीद है। राष्ट्रपति अहमद अल शारा के नेतृत्व में सीरियाई सरकार के लिए यह कदम कूटनीतिक पुनर्वास की प्रक्रिया को और गति दे सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, अगला कदम अमेरिकी प्रतिबंधों की समीक्षा और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों की बहाली हो सकता है।