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जॉर्डन में अमेरिकी मध्यस्थता: सीरिया-इजरायल वार्ता में तनाव घटाने और सुरक्षा समझौते पर चर्चा

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जॉर्डन में अमेरिकी मध्यस्थता: सीरिया-इजरायल वार्ता में तनाव घटाने और सुरक्षा समझौते पर चर्चा

सारांश

जॉर्डन में अमेरिकी मध्यस्थता में सीरिया और इजरायल के बीच हुई बैठक महज एक औपचारिकता नहीं — यह वर्षों की खाई को पाटने की पहली ठोस कोशिश है। दमिश्क ने संप्रभुता पर कोई समझौता न करने का संकेत दिया, जबकि 1974 समझौते की बहाली उसकी तात्कालिक माँग है।

मुख्य बातें

24 अगस्त 2025 को जॉर्डन में अमेरिका की मध्यस्थता में सीरिया और इजरायल के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत हुई।
सीरियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मामलों के प्रमुख असाद अल-शैबानी ने किया; इसमें खुफिया एजेंसियों के प्रमुख भी शामिल थे।
दमिश्क ने माँग की कि इजरायली सेना 8 दिसंबर 2024 से पहले वाली स्थिति में वापस जाए और 1974 के डिसएंगेजमेंट समझौते को बहाल किया जाए।
सीरिया ने गोलान हाइट्स पर अपना दावा दोहराया, लेकिन अंतिम स्थिति पर तत्काल चर्चा को जल्दबाजी बताया।
इजरायल ने बैठक से पहले अबू अल-दुहूर सैन्य हवाई अड्डे पर हमला किया था; सीरिया और तुर्किये ने इजरायल के दावों को खारिज किया।

जॉर्डन में 24 अगस्त 2025 को अमेरिका की मध्यस्थता में सीरिया और इजरायल के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडलों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई। इस बैठक में दक्षिणी सीरिया में बढ़ते तनाव को कम करने और एक संभावित सुरक्षा समझौते की दिशा में वार्ता प्रक्रिया को पुनः शुरू करने के व्यावहारिक उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

प्रतिनिधिमंडल और बैठक की पृष्ठभूमि

सीरिया की सरकारी समाचार एजेंसी साना ने एक राजनयिक सूत्र के हवाले से बताया कि सीरियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मामलों के प्रमुख असाद अल-शैबानी ने किया। इस दल में देश की सामान्य और सैन्य खुफिया एजेंसियों के प्रमुख भी शामिल थे। इजरायल की ओर से भी एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया।

यह बैठक ऐसे समय में आयोजित हुई जब हाल के दिनों में इजरायल ने सीरियाई क्षेत्र पर कई हमले किए हैं और दक्षिणी सीरिया में तनाव का माहौल बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि बैठक से कुछ ही दिन पहले इजरायल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया के अबू अल-दुहूर सैन्य हवाई अड्डे पर हमला किया था, जिसमें इजरायल ने दावा किया था कि दमिश्क वहाँ तुर्की सेना की तैनाती की तैयारी कर रहा है। हालाँकि, सीरिया और तुर्किये दोनों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।

बातचीत में उठाए गए मुद्दे

वार्ता के दौरान ऐसे व्यावहारिक उपायों पर चर्चा हुई जिनसे इजरायली हमलों, गिरफ्तारियों और लक्षित कार्रवाइयों को रोका जा सके। साथ ही, किसी भावी व्यापक समझौते की नींव रखने के उद्देश्य से सुरक्षा वार्ता को पुनः आरंभ करने पर भी विचार हुआ।

राजनयिक सूत्र के अनुसार, बातचीत में तुर्की और इजरायल के बीच मतभेद कम करने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई, ताकि दोनों क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तनाव का असर सीरियाई भूमि पर न पड़े।

सीरिया का संप्रभुता पर कड़ा रुख

सीरियाई प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि सीरिया एक संप्रभु देश है और उसे अपनी राष्ट्रीय सेना के पुनर्निर्माण और विकास का पूरा अधिकार है। सूत्र ने बताया कि दमिश्क ऐसी किसी भी व्यवस्था या तंत्र को स्वीकार नहीं करेगा जो उसके इन संप्रभु अधिकारों को सीमित करे।

सीरिया ने यह भी दोहराया कि इजरायल के कब्जे वाला गोलान हाइट्स सीरियाई क्षेत्र है। हालाँकि, उसने यह भी कहा कि फिलहाल इस क्षेत्र की अंतिम स्थिति और इसके समाधान के रास्ते पर चर्चा करना जल्दबाजी होगी।

दमिश्क की तात्कालिक माँगें

दमिश्क ने बैठक में स्पष्ट किया कि उसकी तत्काल प्राथमिकता यह है कि इजरायली सेना 8 दिसंबर 2024 से पहले वाली अपनी स्थिति में वापस जाए और 1974 के डिसएंगेजमेंट समझौते को पूरी तरह बहाल कर लागू किया जाए। सीरिया ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी सुरक्षा व्यवस्था में उसकी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।

आगे की राह

यह बातचीत क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में एक प्रारंभिक कदम मानी जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार गोलान हाइट्स जैसे मूलभूत मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेद बने हुए हैं। अमेरिकी मध्यस्थता की भूमिका और वार्ता की अगली कड़ी पर अभी स्पष्टता नहीं है, परंतु यह बैठक एक महत्वपूर्ण राजनयिक संकेत के रूप में देखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे सफलता मानना अभी जल्दबाजी होगी। दमिश्क ने संप्रभुता और 1974 समझौते की बहाली पर जो कड़ा रुख अपनाया है, वह इजरायल की सुरक्षा प्राथमिकताओं से सीधे टकराता है। गोलान हाइट्स का मुद्दा दशकों से अनसुलझा है और दोनों पक्षों की 'लाल रेखाएँ' अभी भी बरकरार हैं। अमेरिकी मध्यस्थता की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वाशिंगटन दोनों पक्षों पर कितना प्रभावी दबाव बना सकता है — और क्या तुर्किये का कारक इस समीकरण को और जटिल बनाएगा।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जॉर्डन में सीरिया-इजरायल वार्ता क्यों हुई?
हाल के दिनों में इजरायल के सीरियाई क्षेत्र पर हमलों और दक्षिणी सीरिया में बढ़ते तनाव के बाद हालात को शांत करने के लिए यह बैठक आयोजित की गई। इसका मकसद तनाव घटाने के व्यावहारिक उपाय तलाशना और सुरक्षा वार्ता को पुनः शुरू करना था।
सीरिया की तात्कालिक माँगें क्या हैं?
दमिश्क ने माँग की है कि इजरायली सेना 8 दिसंबर 2024 से पहले वाली अपनी स्थिति में वापस जाए और 1974 के डिसएंगेजमेंट समझौते को पूरी तरह बहाल किया जाए। सीरिया ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी सुरक्षा व्यवस्था में उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।
गोलान हाइट्स पर सीरिया का क्या रुख है?
सीरिया ने दोहराया कि इजरायल के कब्जे वाला गोलान हाइट्स सीरियाई क्षेत्र है। हालाँकि, उसने यह भी कहा कि फिलहाल इस क्षेत्र की अंतिम स्थिति पर चर्चा करना जल्दबाजी होगी।
अबू अल-दुहूर हवाई अड्डे पर हमले का इस वार्ता से क्या संबंध है?
बैठक से कुछ दिन पहले इजरायल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया के अबू अल-दुहूर सैन्य हवाई अड्डे पर हमला किया था। इजरायल ने दावा किया था कि दमिश्क वहाँ तुर्की सेना की तैनाती की तैयारी कर रहा है, लेकिन सीरिया और तुर्किये दोनों ने इस दावे को खारिज किया — यही तनाव इस वार्ता की तात्कालिक पृष्ठभूमि बना।
इस वार्ता में तुर्किये का विषय क्यों उठा?
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, बातचीत में तुर्की और इजरायल के बीच मतभेद कम करने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि दोनों क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तनाव का असर सीरियाई भूमि पर न पड़े।
राष्ट्र प्रेस
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