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चीन के हमले से बचाव को ताइवान तैयार कर रहा 2,10,000 ड्रोन और मानवरहित नौकाओं का बेड़ा

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चीन के हमले से बचाव को ताइवान तैयार कर रहा 2,10,000 ड्रोन और मानवरहित नौकाओं का बेड़ा

सारांश

ताइवान चीन के संभावित हमले को रोकने के लिए 'हेलस्केप' रणनीति अपना रहा है — 2030 तक प्रतिमाह 1,00,000 ड्रोन उत्पादन और 2,10,000 हवाई-समुद्री ड्रोन का लक्ष्य। यूक्रेन की असममित युद्ध-शैली से प्रेरित यह तैयारी ताइवान को वैश्विक ड्रोन शक्ति बनाने की महत्वाकांक्षा भी रखती है।

मुख्य बातें

ताइवान चीन की संभावित सैन्य कार्रवाई से बचाव के लिए बड़े पैमाने पर मानवरहित ड्रोन और बिना चालक वाली नौकाओं का बेड़ा तैयार कर रहा है।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों द्वारा विकसित 'हेलस्केप' रणनीति के तहत ड्रोन, मिसाइलों और तोपखाने की लहरों से आक्रामक सेना को भारी जोखिम में डाला जाएगा।
ताइवान सरकार का लक्ष्य 2030 तक प्रतिमाह 1,00,000 ड्रोन उत्पादन; ताइवानी सेना 2,10,000 हवाई और समुद्री ड्रोन हासिल करने की योजना पर काम कर रही है।
चीन ताइवान से लगभग 110 मील दूर है और उसने बल-प्रयोग की संभावना कभी नकारी नहीं; PLA भी अपना ड्रोन बेड़ा और ड्रोन-रोधी तकनीक मज़बूत कर रही है।
ताइवान ने हाल ही में 'लिटोरल कॉम्बैट कमांड' की स्थापना की, जो ड्रोन, मोबाइल मिसाइल और तोपखाने को एकीकृत कर तटीय सुरक्षा कवच बनाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रोन खरीद के साथ-साथ सैन्य संरचना, प्रशिक्षण और युद्ध-रणनीतियों में आमूल बदलाव भी अनिवार्य है।

चीन की संभावित सैन्य कार्रवाई का मुकाबला करने के लिए ताइवान बड़े पैमाने पर मानवरहित ड्रोन और बिना चालक वाली हमलावर नौकाओं का बेड़ा तैयार कर रहा है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ताइपेई यूक्रेन संघर्ष से सीखी गई असममित युद्ध-रणनीति को तेज़ी से अपनाने में जुटा है, जिसका लक्ष्य किसी भी आक्रामक चीनी सेना को भारी जोखिम का एहसास कराना है।

क्या है 'हेलस्केप' रणनीति

रिपोर्ट के अनुसार, इस रक्षा अवधारणा को विकसित करने वाले अमेरिकी सैन्य अधिकारी इसे 'हेलस्केप' कहते हैं। इसके तहत ड्रोन, मिसाइलों और तोपखाने की लगातार लहरों के ज़रिए किसी भी हमलावर सेना पर इतना भारी दबाव बनाया जाएगा कि चीनी नेतृत्व सैन्य कदम उठाने से पहले कई बार सोचने पर मजबूर हो। इसके लिए ताइवानी सैनिकों को तेज़ी से स्थान बदलने और शत्रु के हमले से पहले ही कार्रवाई करने में सक्षम बनाया जा रहा है।

ड्रोन उत्पादन और अधिग्रहण का लक्ष्य

रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान सरकार का लक्ष्य 2030 तक हर महीने 1,00,000 ड्रोन का उत्पादन करना है, जिनमें से लगभग आधे निर्यात किए जाएंगे। इसके साथ ही, ताइवानी सेना 2,10,000 हवाई और समुद्री ड्रोन हासिल करने की योजना पर काम कर रही है। ताइपेई चाहता है कि ताइवान वैश्विक ड्रोन उद्योग में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरे।

यूक्रेन की 'डेविड बनाम गोलियथ' रणनीति से प्रेरणा

रिपोर्ट में बताया गया है कि ताइवान यूक्रेन की उस रणनीति से प्रेरित है जिसमें कम लागत वाले और तेज़ गति से संचालित होने वाले ड्रोन का उपयोग करके कहीं बड़े और ताकतवर प्रतिद्वंद्वी के विरुद्ध सामरिक संतुलन बनाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया के सेवानिवृत्त मेजर जनरल मिक रायन, जिन्होंने यूक्रेन और ताइवान दोनों की रक्षा रणनीतियों का अध्ययन किया है, के अनुसार यूक्रेन की लंबी दूरी के हमलों में मिली सफलता यह संकेत देती है कि यदि चीन समुद्री मार्ग से हमला करता है, तो ताइवान भी चीन के बंदरगाहों से निकलने वाले जहाज़ों को निशाना बना सकता है।

चीन से खतरे का स्वरूप

चीन, जो ताइवान से लगभग 110 मील की दूरी पर स्थित है, इस स्वशासित द्वीप को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। चीनी नेतृत्व ने कभी भी बल-प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया है। हालांकि, रिपोर्ट में कई विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अभी इतनी सक्षम नहीं है कि वह आसानी से ताइवान पर आक्रमण कर सके। हाल के वर्षों में PLA के शीर्ष नेतृत्व में हुई उथल-पुथल ने उसकी युद्ध-तैयारी को भी प्रभावित किया है। गौरतलब है कि चीन भी अपने मानवरहित विमान और नौकाओं के बेड़े का विस्तार कर रहा है और ड्रोन-रोधी तकनीकों में भारी निवेश कर रहा है।

सैन्य ढाँचे में बदलाव की ज़रूरत

विशेषज्ञों के अनुसार, ताइवान के लिए केवल ड्रोन खरीद लेना पर्याप्त नहीं होगा — उसे अपनी सैन्य संरचना, प्रशिक्षण और युद्ध-संबंधी रणनीतियों में भी आमूल बदलाव करने होंगे। बड़ी संख्या में ड्रोन को एक साथ संचालित करना, उनसे प्राप्त सूचनाओं का त्वरित विश्लेषण और साझाकरण, तथा शत्रु की जैमिंग क्षमता से बचाव — ये सभी चुनौतियाँ हैं जिन्हें हल करना अनिवार्य है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ताइवान ने हाल ही में एक 'लिटोरल कॉम्बैट कमांड' की स्थापना की है, जो ड्रोन, मोबाइल मिसाइल प्रणालियों और तोपखाने को एकीकृत कर तटीय सुरक्षा का समग्र कवच तैयार करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यूक्रेन और ताइवान के भू-सामरिक संदर्भ में ज़मीन-आसमान का फ़र्क है — यूक्रेन की लड़ाई थल-सीमा पर है, जबकि ताइवान को 110 मील चौड़ी जलसंधि पार करने वाले उभयचर हमले का सामना करना है। 2,10,000 ड्रोन का लक्ष्य प्रभावशाली लगता है, परंतु असली कसौटी यह होगी कि ताइवान चीन की उन्नत इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और ड्रोन-रोधी तकनीक के सामने इन्हें कितना कारगर बना पाता है। PLA के शीर्ष नेतृत्व में हालिया उथल-पुथल से मिली अस्थायी राहत को स्थायी सुरक्षा-कवच नहीं माना जा सकता। ताइवान की सबसे बड़ी चुनौती हार्डवेयर नहीं, बल्कि वह सैन्य संस्कृति और प्रशिक्षण ढाँचा है जो इन ड्रोनों को वास्तविक युद्ध में प्रभावी बना सके।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ताइवान चीन के हमले से बचाव के लिए कितने ड्रोन तैयार कर रहा है?
ताइवानी सेना 2,10,000 हवाई और समुद्री ड्रोन हासिल करने की योजना पर काम कर रही है। इसके साथ ही सरकार का लक्ष्य 2030 तक प्रतिमाह 1,00,000 ड्रोन का उत्पादन करना है, जिनमें से लगभग आधे निर्यात किए जाएंगे।
'हेलस्केप' रणनीति क्या है और इसे किसने विकसित किया?
'हेलस्केप' एक सैन्य अवधारणा है जिसे अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने विकसित किया है। इसके तहत ड्रोन, मिसाइलों और तोपखाने की लगातार लहरों के ज़रिए किसी भी आक्रामक सेना पर इतना भारी दबाव बनाया जाता है कि शत्रु का नेतृत्व हमले से पहले कई बार सोचने पर मजबूर हो।
ताइवान ने यूक्रेन की रणनीति से क्या सीखा है?
ताइवान यूक्रेन की 'डेविड बनाम गोलियथ' रणनीति से प्रेरित है, जिसमें कम लागत वाले ड्रोन से बड़े प्रतिद्वंद्वी के विरुद्ध सामरिक संतुलन बनाया जाता है। सेवानिवृत्त मेजर जनरल मिक रायन के अनुसार, यदि चीन समुद्री मार्ग से हमला करे तो ताइवान चीन के बंदरगाहों से निकलने वाले जहाज़ों को भी निशाना बना सकता है।
क्या चीन अभी ताइवान पर हमला करने में सक्षम है?
रिपोर्ट में कई विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अभी इतनी सक्षम नहीं है कि वह आसानी से ताइवान पर आक्रमण कर सके। हाल के वर्षों में PLA के शीर्ष नेतृत्व में हुई उथल-पुथल ने उसकी युद्ध-तैयारी को भी प्रभावित किया है, हालांकि चीन भी अपना ड्रोन बेड़ा और ड्रोन-रोधी तकनीक लगातार मज़बूत कर रहा है।
ताइवान की 'लिटोरल कॉम्बैट कमांड' क्या है?
ताइवान ने हाल ही में 'लिटोरल कॉम्बैट कमांड' की स्थापना की है। यह इकाई ड्रोन, मोबाइल मिसाइल प्रणालियों और तोपखाने को एकीकृत कर चीन के संभावित हमले के विरुद्ध तटीय सुरक्षा का समग्र कवच तैयार करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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