द ग्रेट एस्केप: नाजी शिविर से भागने की साहसिक कहानी

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द ग्रेट एस्केप: नाजी शिविर से भागने की साहसिक कहानी

सारांश

1944 में नाजी जर्मनी के युद्धबंदी शिविर से 70 से अधिक सैनिकों का भागना एक अद्भुत साहसिक घटना है। जानें कैसे महीनों की योजना ने उन्हें स्वतंत्रता दिलाई और इसके पीछे की कहानी।

Key Takeaways

  • मनोबल: कैदियों का मनोबल उच्च था, जो उनकी स्वतंत्रता की चाह को दर्शाता है।
  • रणनीति: भागने के लिए महीनों की योजना बनाई गई थी।
  • साहस: कैदियों ने अपने साहस का प्रदर्शन किया।
  • युद्ध अपराध: पकड़े गए कैदियों को गोली मारना युद्ध कानून का उल्लंघन था।
  • प्रतिरोध: यह भागना प्रतिरोध का प्रतीक था।

नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नाजी जर्मनी के अत्यधिक सुरक्षा वाले युद्धबंदी शिविर स्टालाग लुफ्ट तृतीय से 70 से अधिक मित्र राष्ट्रों के सैनिकों का सुरंग के माध्यम से भाग निकलना इतिहास में 'द ग्रेट एस्केप' के नाम से मशहूर है। 24 मार्च 1944 की रात को हुई यह साधारण भागने की योजना नहीं थी, बल्कि महीनों की गुप्त योजना, इंजीनियरिंग कौशल और अद्वितीय साहस का परिणाम थी।

इस साहसिक अभियान में ब्रिटिश वायुसेना के अधिकारी रोजर बुशेल, जिन्हें “बिग एक्स” के नाम से जाना जाता है, का प्रमुख योगदान था। उन्होंने एक साथ तीन सुरंगें—"टॉम", "डिक" और "हैरी"—खोदने की योजना बनाई, ताकि यदि एक पकड़ी जाए तो अन्य का उपयोग किया जा सके। कैदियों ने बिस्तरों के तख्तों, खाने के डिब्बों और साधारण औजारों का उपयोग करके लगभग 100 मीटर लंबी सुरंग तैयार की, जिसमें हवा के लिए पाइप, रोशनी के लिए अस्थायी बिजली और मिट्टी छुपाने के जटिल तरीके शामिल थे।

इस भागने में कुल 76 कैदी सफल रहे, लेकिन यह आजादी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी। नाजी शासन के प्रमुख एडोल्फ हिटलर के आदेश पर पकड़े गए 50 कैदियों को बाद में गोली मार दी गई—जो युद्ध कानूनों का गंभीर उल्लंघन था और इसे बाद में युद्ध अपराध माना गया।

इस घटना का सबसे विश्वसनीय विवरण पॉल ब्रिकहिल की किताब "द ग्रेट एस्केप" में मिलता है। ब्रिकहिल खुद उस शिविर में कैदी थे। वे लिखते हैं कि यह भागना केवल स्वतंत्रता के लिए नहीं था, बल्कि यह दिखाने के लिए था कि कैदियों का मनोबल नहीं टूटा है—"यह स्वतंत्रता से अधिक, प्रतिरोध का प्रतीक था।"

इस भावना को रोजर बुशेल के एक प्रसिद्ध कथन में भी देखा जा सकता है—"हमारा कर्तव्य केवल भागना नहीं, बल्कि जितने अधिक जर्मन संसाधनों को इसमें उलझाना है, उतना ही युद्ध में योगदान देना है।"

इस प्रकार “द ग्रेट एस्केप” केवल एक साहसी कहानी नहीं, बल्कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मनोबल, रणनीति और प्रतिरोध की एक अनोखी मिसाल बन गई। इस पर 1963 में एक फिल्म भी बनी थी जिसने शानदार कमाई की थी।

Point of View

बल्कि एक प्रतिरोध का भी प्रतीक था।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

द ग्रेट एस्केप क्या है?
द ग्रेट एस्केप नाजी जर्मनी के युद्धबंदी शिविर से 70 से अधिक सैनिकों के भागने की साहसिक कहानी है।
इस भागने में कितने सैनिक सफल हुए?
इस भागने में कुल 76 सैनिक सफल हुए।
रोजर बुशेल कौन हैं?
रोजर बुशेल ब्रिटिश वायुसेना के अधिकारी थे, जिन्होंने इस भागने की योजना बनाई थी।
क्या इस घटना के बाद कैदियों का क्या हुआ?
पकड़े गए 50 कैदियों को नाजी शासन के आदेश पर गोली मार दी गई।
द ग्रेट एस्केप पर क्या फिल्म बनी है?
हाँ, इस पर 1963 में एक प्रसिद्ध फिल्म बनी थी।
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