एप्पल CEO टिम कुक ने PM अल्बनीज को फोन किया, ऑस्ट्रेलियाई बाल सुरक्षा नीति से प्रेरित हैं नए फीचर्स
सारांश
मुख्य बातें
एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज को फोन कर सूचित किया कि कंपनी के नए बाल ऑनलाइन सुरक्षा फीचर्स आंशिक रूप से ऑस्ट्रेलिया की सख्त सोशल मीडिया आयु-प्रतिबंध नीति से प्रेरित हैं। कैनबरा से जारी एक आधिकारिक बयान में प्रधानमंत्री अल्बनीज ने इस बातचीत का खुलासा किया और देश की डिजिटल बाल सुरक्षा पहल को वैश्विक मान्यता मिलने पर संतोष व्यक्त किया।
ऑस्ट्रेलिया की अग्रणी नीति
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश है जिसने 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर कानूनी रोक लगाई है — और इसे सख्ती से लागू भी कराया है। अल्बनीज के अनुसार, अब तक 50 लाख से अधिक सोशल मीडिया खाते — जो 16 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के थे — या तो हटाए जा चुके हैं, निष्क्रिय किए जा चुके हैं, या उन पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि यह काम आसान नहीं था, लेकिन परिणाम स्पष्ट हैं।
टिम कुक का संदेश और एप्पल की नई पहल
प्रधानमंत्री के बयान के अनुसार, टिम कुक ने फोन पर बताया कि एप्पल बच्चों पर सोशल मीडिया के प्रभावों पर सक्रिय रूप से शोध कर रही है और इसी शोध के आधार पर नए सुरक्षा फीचर्स विकसित किए जा रहे हैं। कुक ने ऑस्ट्रेलियाई नीति को इन फीचर्स की आंशिक प्रेरणा बताया। हालाँकि, इन फीचर्स का विस्तृत तकनीकी विवरण सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया गया है।
अल्बनीज को एप्पल मुख्यालय का निमंत्रण
टिम कुक ने प्रधानमंत्री अल्बनीज को अमेरिका यात्रा के दौरान एप्पल के मुख्यालय आने का निमंत्रण दिया है, ताकि वे नई तकनीक को प्रत्यक्ष रूप से देख सकें और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के बेहतर उपायों पर गहन चर्चा हो सके। यह निमंत्रण इस बात का संकेत है कि वैश्विक तकनीकी कंपनियाँ अब सरकारी नीतियों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकतीं।
वैश्विक प्रभाव और अभिभावकों की भूमिका
अल्बनीज ने इस पूरी पहल का श्रेय ऑस्ट्रेलियाई अभिभावकों की माँग और उनके सतत प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि अब कई देश ऑस्ट्रेलियाई मॉडल को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं — जो यह दर्शाता है कि यह नीति वैश्विक डिजिटल शासन के लिए एक संदर्भ-बिंदु बन रही है। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप और अमेरिका में भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर कानूनी बहस तेज़ हो रही है।
सरकार की प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया कंपनियों की यह जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें, और सरकार इस मामले में किसी भी ढिलाई को बर्दाश्त नहीं करेगी। उनके शब्दों में, बच्चों को सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण देना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जिम्मेदारी है। आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि एप्पल के ये नए फीचर्स किस रूप में उपयोगकर्ताओं तक पहुँचते हैं और अन्य तकनीकी कंपनियाँ इस दिशा में क्या कदम उठाती हैं।