ट्रंप का दावा: ईरान से नई डील जेसीपीओए से बेहतर होगी, जानें क्या था 2015 का परमाणु समझौता
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ प्रस्तावित नया परमाणु समझौता पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) से कहीं अधिक मज़बूत और प्रभावी होगा। ट्रंप ने यह बात अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर शनिवार को पोस्ट की, जिसमें उन्होंने 2015 के समझौते को अमेरिका के लिए 'खराब डील' करार दिया।
जेसीपीओए क्या था और कैसे हुआ था यह समझौता
2015 में ईरान और छह प्रमुख विश्व शक्तियों — अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, रूस और चीन — के बीच एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता संपन्न हुआ था। इसे 'संयुक्त व्यापक कार्ययोजना' यानी जेसीपीओए के नाम से जाना जाता है। इस समझौते का मूल उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाना और बदले में उस पर आरोपित अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देना था।
समझौते की प्रमुख शर्तें
जेसीपीओए के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कई अहम प्रतिबंध स्वीकार किए थे। संवर्धित यूरेनियम का भंडार 300 किलोग्राम से कम तक सीमित करना था, और यूरेनियम संवर्धन का स्तर 3.67 प्रतिशत तक रखना था। तुलनात्मक रूप से, परमाणु हथियार निर्माण के लिए लगभग 90 प्रतिशत संवर्धन आवश्यक होता है, जबकि नागरिक बिजली उत्पादन के लिए 3.67 प्रतिशत पर्याप्त माना जाता है।
इसके साथ ही, यूरेनियम संवर्धन में प्रयुक्त सेंट्रीफ्यूज मशीनों की संख्या लगभग 20,000 से घटाकर 6,104 करने पर सहमति बनी। ईरान के अराक हेवी वॉटर रिएक्टर को पुनः डिज़ाइन किया गया ताकि उससे हथियार-योग्य प्लूटोनियम का उत्पादन न हो सके।
अंतरराष्ट्रीय निगरानी और आर्थिक राहत
जेसीपीओए की एक उल्लेखनीय विशेषता यह थी कि इसने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को ईरान के परमाणु ठिकानों की व्यापक और कठोर निगरानी का अधिकार दिया। इसे उस समय दुनिया की सबसे सख्त परमाणु निरीक्षण व्यवस्थाओं में से एक माना गया था। बदले में, ईरान को अरबों डॉलर की आर्थिक राहत मिली, जिसमें 1.7 अरब डॉलर नकद शामिल थे।
ट्रंप की आपत्तियाँ और 2018 में वापसी
ट्रंप के अनुसार, जेसीपीओए की शर्तें पर्याप्त सख्त नहीं थीं और इस समझौते से मिली आर्थिक राहत का उपयोग ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम और 'आक्रामक नीतियों' को आगे बढ़ाने में किया। इसी आधार पर 2018 में ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका को जेसीपीओए से बाहर निकाल लिया और ईरान पर पुनः कड़े आर्थिक प्रतिबंध लागू कर दिए।
नई डील की स्थिति और आगे की राह
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि प्रस्तावित नया समझौता जेसीपीओए से बेहतर होगा, हालाँकि दोनों समझौतों में ठोस अंतर क्या होगा, यह अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कूटनीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें टिकी हुई हैं। आने वाले हफ्तों में दोनों पक्षों की वार्ता की दिशा यह तय करेगी कि नई डील की रूपरेखा क्या होगी।