30 सितंबर 2026
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ट्रंप का बड़ा बयान: उत्तर कोरिया के पास 'काफी बड़ा' परमाणु भंडार, किम को मेरे रहते कोई खतरा नहीं

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ट्रंप का बड़ा बयान: उत्तर कोरिया के पास 'काफी बड़ा' परमाणु भंडार, किम को मेरे रहते कोई खतरा नहीं

सारांश

ट्रंप ने खुलेआम स्वीकार किया कि किम जोंग-उन के पास 'काफी बड़ा' परमाणु भंडार है — और साथ में दे दिया अभयदान। ईरान पर कड़ा रुख रखने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान परमाणु अप्रसार नीति पर गहरे सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 30 सितंबर 2026 को व्हाइट हाउस में स्वीकार किया कि किम जोंग-उन के पास 'काफी बड़ा' परमाणु हथियार भंडार है।
ट्रंप ने कहा — 'जब तक मैं आसपास हूँ, किम ठीक रहेंगे' — क्योंकि किम उनका सम्मान करते हैं।
यह बयान AI कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से संवाद में आया।
ट्रंप ने परमाणु भंडार की कोई सटीक संख्या नहीं बताई।
आलोचकों का कहना है कि ईरान और उत्तर कोरिया पर ट्रंप का रुख दोहरे मानदंड को दर्शाता है।
किसी नई वार्ता या बैठक की घोषणा नहीं की गई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 30 सितंबर 2026 को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्वीकार किया कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के पास 'काफी बड़ा' परमाणु हथियार भंडार है। ट्रंप ने कहा कि जब तक वे स्वयं पद पर हैं, किम 'ठीक' रहेंगे — क्योंकि उनके अनुसार किम उनका सम्मान करते हैं और उन्हें पसंद करते हैं। यह बयान उत्तर कोरियाई परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी रुख पर नई बहस छेड़ सकता है।

बयान का संदर्भ

ट्रंप ने यह टिप्पणी व्हाइट हाउस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद मीडिया से संवाद के दौरान की। पत्रकारों ने उनसे सवाल किया था कि जहाँ वे ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं देने की बात करते हैं, वहीं उत्तर कोरिया के मामले में उनका दोहरा रुख क्यों है।

इस पर ट्रंप ने कहा, 'किम जोंग-उन के पास काफी बड़ा परमाणु क्षमता वाला भंडार है। जब तक मैं आसपास हूँ, वह ठीक रहेगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि किम उनके प्रति सम्मान और सकारात्मक भावना रखते हैं, जो इस संबंध की बुनियाद है।

ईरान बनाम उत्तर कोरिया: दोहरे मानदंड का सवाल

ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर अमेरिकी परमाणु नीति में विरोधाभास को उजागर किया है। एक ओर वाशिंगटन ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए है और उसे परमाणु हथियार बनाने देने से इनकार करता है, वहीं दूसरी ओर ट्रंप ने उत्तर कोरिया के विद्यमान परमाणु भंडार को कथित तौर पर व्यक्तिगत कूटनीति के आधार पर स्वीकार्य बताया।

आलोचकों का कहना है कि ट्रंप की यह नीति परमाणु अप्रसार के वैश्विक ढाँचे को कमज़ोर करती है और अन्य देशों को यह संदेश दे सकती है कि परमाणु हथियार रखना कूटनीतिक लाभ दिला सकता है।

ट्रंप-किम व्यक्तिगत कूटनीति की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि ट्रंप और किम जोंग-उन के बीच पहले भी कई दौर की ऐतिहासिक व्यक्तिगत कूटनीति हो चुकी है — जिसमें 2018 में सिंगापुर और 2019 में हनोई व पनमुनजोम की बैठकें शामिल हैं। हालाँकि उन वार्ताओं से कोई ठोस परमाणु निरस्त्रीकरण समझौता नहीं हुआ था। ट्रंप के ताज़ा बयान में किसी नई बैठक या वार्ता की घोषणा नहीं की गई है।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया लगातार अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाता रहा है। किम जोंग-उन इस कार्यक्रम को देश की सुरक्षा नीति का अनिवार्य हिस्सा बताते आए हैं।

परमाणु भंडार की संख्या अस्पष्ट

ट्रंप ने अपने बयान में उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों की कोई सटीक संख्या नहीं बताई। रिपोर्टों के अनुसार उनके बयान में परमाणु भंडार का आकार अनिर्दिष्ट रहा। विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर कोरिया के पास अनुमानित रूप से कई दर्जन परमाणु वारहेड हो सकते हैं, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं है।

आगे की संभावनाएँ

ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिकी कांग्रेस और सहयोगी देशों — विशेषकर दक्षिण कोरिया और जापान — की प्रतिक्रिया महत्त्वपूर्ण होगी। यह देखना बाकी है कि क्या यह बयान किसी नई कूटनीतिक पहल की भूमिका है या केवल ट्रंप की व्यक्तिगत शैली का प्रतिबिंब।

संपादकीय दृष्टिकोण

मध्य-पूर्व और पूर्वी एशिया के देशों को गलत संदेश दे सकता है कि परमाणु हथियार कूटनीतिक ढाल बन सकते हैं। ट्रंप-किम की पिछली तीन शिखर बैठकें बिना किसी ठोस निरस्त्रीकरण समझौते के समाप्त हुई थीं — और इस बयान में भी उसी पैटर्न की झलक दिखती है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है: 'व्यक्तिगत कूटनीति' को नीति का विकल्प बना देना दीर्घकाल में अमेरिकी साख को उतना ही नुकसान पहुँचाता है जितना किम के परमाणु कार्यक्रम को प्रत्यक्ष समर्थन।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने उत्तर कोरिया के परमाणु भंडार पर क्या कहा?
ट्रंप ने 30 सितंबर 2026 को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि किम जोंग-उन के पास 'काफी बड़ा' परमाणु क्षमता वाला भंडार है और जब तक वे पद पर हैं, किम 'ठीक' रहेंगे। उन्होंने इसकी वजह किम द्वारा उनके प्रति सम्मान और सकारात्मक भावना बताई।
ट्रंप का यह बयान कहाँ और किस संदर्भ में आया?
यह बयान व्हाइट हाउस में AI कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से संवाद के दौरान आया। पत्रकारों ने पूछा था कि ईरान और उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों पर ट्रंप का रुख अलग-अलग क्यों है।
क्या ट्रंप ने उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों की संख्या बताई?
नहीं, ट्रंप ने परमाणु भंडार की कोई सटीक संख्या नहीं बताई। उनके बयान में केवल 'काफी बड़ा' शब्द का उपयोग किया गया और रिपोर्टों के अनुसार कोई आँकड़ा नहीं दिया गया।
ट्रंप और किम जोंग-उन के बीच पहले कैसे संबंध रहे हैं?
ट्रंप और किम के बीच 2018 में सिंगापुर, 2019 में हनोई और पनमुनजोम में ऐतिहासिक शिखर बैठकें हो चुकी हैं। हालाँकि इन वार्ताओं से कोई ठोस परमाणु निरस्त्रीकरण समझौता नहीं हुआ। ट्रंप के ताज़ा बयान में किसी नई बैठक की घोषणा नहीं की गई है।
इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रतिक्रिया हो सकती है?
दक्षिण कोरिया और जापान जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों की प्रतिक्रिया महत्त्वपूर्ण होगी, जो उत्तर कोरियाई परमाणु खतरे के सबसे निकट हैं। आलोचकों का कहना है कि यह बयान परमाणु अप्रसार की वैश्विक व्यवस्था को कमज़ोर कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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