ईरान-अमेरिका संघर्ष ने उत्तर कोरिया निरस्त्रीकरण की राह और कठिन की: दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम को त्यागने की संभावना को और धुंधला कर दिया है। ब्रिटिश पत्रिका 'द इकोनॉमिस्ट' को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य प्योंगयांग को अपने परमाणु शस्त्रागार बनाए रखने के लिए और अधिक प्रोत्साहित कर रहा है।
ईरान संघर्ष का कोरियाई प्रायद्वीप पर असर
राष्ट्रपति ली के अनुसार, पश्चिम एशिया में उभरे सैन्य संकट ने उत्तर कोरिया को एक स्पष्ट संदेश दिया है — परमाणु हथियार ही राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे पक्की गारंटी हैं। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के निकट एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद ईरान के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई शुरू की। जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित करीब 22 अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में व्यापक सैन्य टकराव की आशंकाओं को गहरा कर दिया है।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध समाप्त करने के लिए किसी समझौते की संभावनाओं पर काम करने की बात कहते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
ट्रंप की भूमिका और वार्ता की संभावना
ली ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का 'विशिष्ट व्यक्तित्व' उत्तर कोरिया को दोबारा वार्ता की मेज पर लाने में सहायक साबित हो सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संवाद के माध्यम से कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम करने के प्रयास आगे बढ़ सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरिया स्वयं परमाणु हथियार हासिल करने के पक्ष में नहीं है — उनके शब्दों में यह न तो वांछनीय है और न ही व्यावहारिक।
रक्षा नीति और आत्मनिर्भरता पर जोर
रक्षा नीति पर राष्ट्रपति ली ने स्पष्ट किया, 'देश की सुरक्षा के मामले में दक्षिण कोरिया को अपनी जिम्मेदारियाँ स्वयं उठानी होंगी और अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत करना होगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं की विश्वसनीयता पर वैश्विक स्तर पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
आंतरिक राजनीति और कानूनी मामले
ली ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल द्वारा 2024 में लगाए गए मार्शल लॉ से उत्पन्न राजनीतिक उथल-पुथल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया अब असामान्य परिस्थितियों को सामान्य मानने की प्रवृत्ति से आगे बढ़ सकता है और भविष्य में विश्व का नेतृत्व करने वाले देशों में शामिल हो सकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद उनके विरुद्ध चल रहे कानूनी मामलों के आधार पर महाभियोग या कारावास की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, हालाँकि वर्तमान में राष्ट्रपति पद पर रहते हुए सभी मुकदमों की सुनवाई स्थगित है।
आर्थिक एजेंडा: AI लाभ और सार्वभौमिक आय
आर्थिक मुद्दों पर राष्ट्रपति ली ने यूनिवर्सल बेसिक इनकम जैसी योजनाओं का समर्थन किया। उनका कहना था कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकी उछाल के कारण सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी चिप कंपनियों को हुए अतिरिक्त लाभ का एक हिस्सा आम जनता तक भी पहुँचना चाहिए। यह बयान दक्षिण कोरिया में बढ़ती आर्थिक असमानता की चिंताओं के बीच आया है।
कोरियाई प्रायद्वीप पर स्थायी शांति की संभावना अब केवल द्विपक्षीय कूटनीति पर नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया सहित व्यापक वैश्विक सुरक्षा समीकरणों पर भी निर्भर होती दिख रही है।