क्या ट्रंप ने चागोस द्वीप का मुद्दा उठाया और यूके के फैसले को 'बेवकूफी भरा' बताया?

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क्या ट्रंप ने चागोस द्वीप का मुद्दा उठाया और यूके के फैसले को 'बेवकूफी भरा' बताया?

सारांश

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चागोस द्वीप के मुद्दे को उठाया है, जिसमें उन्होंने ब्रिटेन के एक महत्वपूर्ण निर्णय को 'बेवकूफी' बताया। जानिए इस विवाद की पृष्ठभूमि और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।

Key Takeaways

  • ट्रंप ने चागोस द्वीप के मुद्दे को उठाया।
  • ब्रिटेन का मॉरीशस को चागोस सौंपना विवादास्पद है।
  • यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव डाल सकता है।
  • यूके ने इस मुद्दे पर 99 वर्ष का समझौता किया है।
  • चागोसियन लोगों के लिए फंड स्थापित किया गया है।

नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश में लगे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चागोस द्वीप से संबंधित मुद्दा उठाया है। ट्रंप के अनुसार, ब्रिटेन का मॉरीशस को चागोस द्वीप समूह सौंपने का निर्णय उन कारणों में से एक है जो अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा कि चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने की ब्रिटेन की योजना "बहुत बड़ी बेवकूफी है।" उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, "यह हैरानी की बात है कि हमारा "शानदार" नाटो सहयोगी, यूनाइटेड किंगडम, डिएगो गार्सिया द्वीप को मॉरीशस को देने की योजना बना रहा है, जो एक महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य अड्डा है, और वह भी बिना किसी औचित्य के।"

ट्रंप ने चीन और रूस के लाभ का उल्लेख करते हुए कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि चीन और रूस ने इस कमजोरी पर ध्यान दिया है। ये अंतर्राष्ट्रीय शक्तियां केवल ताकत को पहचानती हैं, यही कारण है कि मेरे नेतृत्व में संयुक्त राज्य अमेरिका का मान पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा है।"

आगे ट्रंप ने कहा कि यूके का इतनी महत्वपूर्ण भूमि देना बहुत "बड़ी बेवकूफी है," और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के कई कारणों में से एक है जिनकी वजह से ग्रीनलैंड को हासिल करना जरूरी है। डेनमार्क और उसके यूरोपीय सहयोगियों को सही निर्णय लेना होगा।

चागोस द्वीप समझौता क्या है, जिसे ट्रंप ने ग्रीनलैंड के संदर्भ में उठाया है? दरअसल, मई 2025 में, यूके ने चागोस द्वीपों पर संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन सबसे बड़े द्वीप, डिएगो गार्सिया को 99 वर्षों के लिए लीज पर ले लिया ताकि वहां एक संयुक्त यूएस-यूके सैन्य अड्डा स्थापित किया जा सके।

यह समझौता पिछले कंजर्वेटिव सरकार के तहत शुरू हुई लंबी बातचीत के बाद हुआ, जब अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने 2019 में कहा था कि यूके को नियंत्रण छोड़ देना चाहिए।

द्वीपों से निकाले गए चागोसियन लोगों के लिए 40 मिलियन पाउंड का कोष स्थापित करने के साथ-साथ, यूके ने 99 वर्ष के समझौते के दौरान मॉरीशस को सालाना कम से कम 120 मिलियन पाउंड का भुगतान करने पर सहमति जताई है, जिसकी कुल लागत नकद शर्तों में कम से कम 13 बिलियन पाउंड होगी।

कंजर्वेटिव पार्टी ने इस सौदे को देश के लिए हानिकारक बताया है। द गार्डियन के अनुसार, यूके के प्रधानमंत्री, कीर स्टारमर ने उस समय इस समझौते का समर्थन करते हुए कहा था कि इस समझौते का "कोई विकल्प नहीं" है क्योंकि यह "हमें सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक" था और इसे "संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ यूके के सुरक्षा संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण योगदानों में से एक" बताया।

यूके ने 1968 में चागोस द्वीप समूह को 3 मिलियन पाउंड में खरीदा और यूके-यूएस सशस्त्र बलों को ठिकाना बनाने के लिए 2,000 लोगों को जबरन विस्थापित किया था।

Point of View

एक राष्ट्रीय संपादक के रूप में, यह स्पष्ट है कि ट्रंप के बयान और ब्रिटेन का निर्णय दोनों ही वैश्विक राजनीति के महत्वपूर्ण पहलू हैं। चागोस द्वीपों का मुद्दा केवल एक द्वीप का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों और सुरक्षा का प्रश्न भी है।
NationPress
20/01/2026

Frequently Asked Questions

चागोस द्वीप क्या है?
चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर में स्थित है और यह ब्रिटेन के नियंत्रण में है।
यूके ने मॉरीशस को चागोस द्वीप क्यों सौंपा?
यूके ने अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के आदेश के बाद मॉरीशस को चागोस द्वीप की संप्रभुता सौंपने का निर्णय लिया।
डोनाल्ड ट्रंप का इस मुद्दे पर क्या कहना है?
ट्रंप ने इसे 'बेवकूफी' बताया और इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा।
क्या इस मुद्दे का अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर होगा?
जी हां, यह मुद्दा चीन और रूस जैसी शक्तियों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
चागोसियन लोगों के लिए क्या किया गया है?
चागोसियन लोगों के लिए 40 मिलियन पाउंड का कोष स्थापित किया गया है।
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