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पीओके चुनाव: यूके चाइल्ड ग्रूमिंग केस का आरोपी रुखसार अहमद जीता, शहबाज की पार्टी PML-N ने दिया था टिकट

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पीओके चुनाव: यूके चाइल्ड ग्रूमिंग केस का आरोपी रुखसार अहमद जीता, शहबाज की पार्टी PML-N ने दिया था टिकट

सारांश

यूके में बाल यौन शोषण के गंभीर आरोपों में जमानत पर रिहा पाकिस्तान के पूर्व राज्यमंत्री रुखसार अहमद ने पीओके विधानसभा चुनाव जीत लिया — PML-N के टिकट पर। स्वास्थ्य का हवाला देकर पुलिस के सामने पेश होने से इनकार करने वाले अहमद मीरपुर में चुनावी रैलियाँ करते दिखे। यह मामला ब्रिटेन-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव को और गहरा कर सकता है।

मुख्य बातें

रुखसार अहमद , जो जुलाई 2024 से मैनचेस्टर में चाइल्ड ग्रूमिंग और बाल यौन शोषण के आरोपों में जमानत पर हैं, ने पीओके की तथाकथित विधानसभा का चुनाव जीता।
अहमद को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी PML-N ने मीरपुर क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया था।
अहमद ने 'स्वास्थ्य कारणों' से मैनचेस्टर पुलिस के समक्ष पेश होने से इनकार किया, जबकि सोशल मीडिया तस्वीरों में वे पीओके में चुनावी प्रचार करते दिखे।
ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस (GMP) के पास अगले छह सप्ताह में उनकी गिरफ्तारी या प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करने का विकल्प है।
यह मामला तब सामने आया जब पाकिस्तान ने रोचडेल ग्रूमिंग गैंग के दोषी शबीर अहमद को वापस लेने से पहले ही इनकार कर दिया था, जिसे 30 मामलों में 22 वर्ष की सजा हुई थी।

पाकिस्तान के पूर्व राज्यमंत्री रुखसार अहमद, जो जुलाई 2024 में मैनचेस्टर में बाल यौन शोषण और चाइल्ड ग्रूमिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार हो चुके हैं और फिलहाल जमानत पर रिहा हैं, ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की तथाकथित विधानसभा का चुनाव जीत लिया है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, 62 वर्षीय अहमद को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने उम्मीदवार बनाया था। यह जीत ऐसे समय में आई है जब अहमद ब्रिटेन में पुलिस जांच के दायरे में हैं और उन पर जमानत की शर्तें लागू हैं।

मुख्य घटनाक्रम

18 जुलाई 2024 को ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस (GMP) ने रुखसार अहमद को मैनचेस्टर एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया था। उन पर मैनचेस्टर के रशोल्म इलाके में 1990 के दशक में नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म और यौन तस्करी के आरोप हैं। जांच के दौरान कम से कम दो महिलाओं ने आरोप लगाया कि जब वे नाबालिग थीं, तब अहमद ने उनका यौन शोषण किया और उन्हें तस्करी का शिकार बनाया। पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं को अहमद के पाकिस्तानी राजनीति से जुड़े होने की भी जानकारी मिली।

जमानत शर्तों का उल्लंघन और चुनावी प्रचार

द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, GMP ने अदालत से अहमद के विदेश यात्रा पर रोक लगाने की माँग की थी, लेकिन जुलाई 2024 में अदालत ने यह अनुरोध अस्वीकार कर दिया। अहमद को पिछले महीने मैनचेस्टर के एक पुलिस स्टेशन में जमानत की शर्तों के तहत पेश होना था, किंतु उन्होंने 'स्वास्थ्य कारणों' और 'हवाई यात्रा में असमर्थता' का हवाला देकर हाजिर होने से इनकार कर दिया। इसी दौरान सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में अहमद को पीओके के मीरपुर क्षेत्र में चुनावी सभाओं और प्रचार अभियान में सक्रिय देखा गया, जो उनके दावे से सीधे विरोधाभासी था।

ब्रिटेन-पाकिस्तान के बीच बढ़ता कूटनीतिक तनाव

रिपोर्टों के अनुसार, अहमद को अगले छह सप्ताह के भीतर पुनः पुलिस के समक्ष जमानत की शर्तों के तहत पेश होना है। यदि वह ऐसा नहीं करते, तो GMP उनकी गिरफ्तारी या प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर सकती है, जिससे ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक विवाद और गहरा हो सकता है। यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब पाकिस्तान ने हाल ही में ब्रिटेन के उस अनुरोध को ठुकरा दिया था, जिसमें रोचडेल चाइल्ड ग्रूमिंग गैंग के दोषी शबीर अहमद को वापस स्वीकार करने की माँग की गई थी।

रोचडेल मामले से जुड़ा व्यापक संदर्भ

द टेलीग्राफ के अनुसार, शबीर अहमद को 30 बाल यौन शोषण मामलों में दोषी ठहराया गया था और उसे 22 वर्ष की सजा हुई थी, जिसमें से 14 वर्ष जेल में काटने के बाद वह हाल ही में रिहा हुआ है। ब्रिटिश सरकार उसे पाकिस्तान निर्वासित करना चाहती है, लेकिन पाकिस्तान ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। पिछले महीने ब्रिटेन के कई राजनीतिक दलों ने लेबर सरकार से पाकिस्तान पर विदेशी सहायता रोकने और वीजा प्रतिबंध लगाने का दबाव बनाने की माँग की थी।

आगे क्या हो सकता है

रुखसार अहमद का पीओके विधानसभा में निर्वाचित होना और जमानत शर्तों के संभावित उल्लंघन का मामला ब्रिटेन की न्यायिक प्रणाली के लिए एक जटिल चुनौती बन गया है। गौरतलब है कि यह पाँच वर्षों में उनकी दूसरी जीत है, और PML-N द्वारा आरोपी व्यक्ति को टिकट देने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। ब्रिटेन-पाकिस्तान संबंधों पर इस मामले का दीर्घकालिक असर आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह दर्शाता है कि पाकिस्तान में जवाबदेही की कसौटी किस हद तक कमजोर है। शबीर अहमद के प्रत्यर्पण से इनकार और अब रुखसार अहमद का निर्वाचन — दोनों मिलकर ब्रिटेन-पाकिस्तान संबंधों में एक खतरनाक पैटर्न उभार रहे हैं। यदि GMP प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करती है, तो यह मामला दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संधियों और राजनयिक दबाव की असली परीक्षा बनेगा।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रुखसार अहमद कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
रुखसार अहमद पाकिस्तान के पूर्व राज्यमंत्री हैं जिन्हें 18 जुलाई 2024 को मैनचेस्टर एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया था। उन पर 1990 के दशक में मैनचेस्टर के रशोल्म इलाके में नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म और यौन तस्करी के आरोप हैं। वे फिलहाल जमानत पर रिहा हैं और ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस की जांच के दायरे में हैं।
पीओके चुनाव में रुखसार अहमद किस पार्टी से जीते?
रुखसार अहमद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के उम्मीदवार के रूप में पीओके की तथाकथित विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। यह उनकी पाँच वर्षों में दूसरी जीत है।
क्या रुखसार अहमद ने जमानत शर्तों का उल्लंघन किया?
द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, अहमद को मैनचेस्टर पुलिस स्टेशन में जमानत शर्तों के तहत पेश होना था, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इनकार कर दिया। इसी दौरान सोशल मीडिया तस्वीरों में वे पीओके के मीरपुर में चुनावी रैलियों में सक्रिय दिखे, जो उनके दावे से सीधे विरोधाभासी है।
ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस आगे क्या कदम उठा सकती है?
रिपोर्टों के अनुसार, अहमद को अगले छह सप्ताह के भीतर पुनः पुलिस के समक्ष पेश होना है। यदि वे ऐसा नहीं करते, तो GMP उनकी गिरफ्तारी या प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर सकती है, जिससे ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक विवाद खड़ा हो सकता है।
रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामले से इसका क्या संबंध है?
रोचडेल ग्रूमिंग गैंग के दोषी शबीर अहमद को 30 बाल यौन शोषण मामलों में 22 वर्ष की सजा हुई थी, जिसमें से 14 वर्ष जेल में काटने के बाद वह हाल ही में रिहा हुआ है। ब्रिटेन उसे पाकिस्तान निर्वासित करना चाहता है, लेकिन पाकिस्तान ने इनकार कर दिया है। रुखसार अहमद का मामला इसी पृष्ठभूमि में और संवेदनशील हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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