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रोशडेल ग्रूमिंग गैंग: पाकिस्तान ने शाबिर अहमद को नागरिक मानने से किया इनकार, निर्वासन अटका

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रोशडेल ग्रूमिंग गैंग: पाकिस्तान ने शाबिर अहमद को नागरिक मानने से किया इनकार, निर्वासन अटका

सारांश

30 नाबालिग लड़कियों से बलात्कार के दोषी शाबिर अहमद की रिहाई के बाद निर्वासन का रास्ता बंद हो गया है — पाकिस्तान ने उसे अपना नागरिक मानने से इनकार कर दिया है। पीड़ितों से किया गया वादा अधूरा है और ब्रिटेन दो कानूनी दीवारों के बीच फँसा है।

मुख्य बातें

शाबिर अहमद इस सप्ताह 30 नाबालिग लड़कियों से बलात्कार के मामलों में 14 साल की सजा पूरी कर रिहा हुआ।
पाकिस्तान सरकार ने उसे नागरिक मानने से इनकार किया — आधार: उसने अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट फाड़ दिया था।
उसे 2012 में 22 साल की सजा हुई थी; 2016 में ब्रिटिश पासपोर्ट रद्द किया गया था।
ब्रिटेन सरकार के अनुसार, 1971 के इमिग्रेशन एक्ट की बाधा से भी बड़ी अड़चन पाकिस्तान का इनकार है।
निजी संसदीय जांच रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन में कई दशकों तक कम से कम 2,50,000 लड़कियाँ संगठित यौन शोषण की शिकार हुईं।
पीड़ितों से निर्वासन का वादा किया गया था, जो अब अनिश्चितकाल के लिए टल गया है।

पाकिस्तान सरकार ने रोशडेल ग्रूमिंग गैंग के मुख्य दोषी शाबिर अहमद को अपना नागरिक मानने से इनकार कर दिया है, जिससे उसका निर्वासन फिलहाल अधर में लटक गया है। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी अधिकारियों और मंत्रियों का कहना है कि शाबिर अहमद ने अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट फाड़ दिया था, इसलिए वह अब पाकिस्तान का नागरिक नहीं है। शाबिर अहमद इसी सप्ताह 30 नाबालिग लड़कियों से बलात्कार के मामलों में 14 साल की सजा पूरी कर जेल से रिहा हुआ है।

मुख्य घटनाक्रम

शाबिर अहमद को 2012 में 22 साल की सजा सुनाई गई थी। 2016 में उसका ब्रिटिश पासपोर्ट रद्द कर दिया गया था, ताकि रिहाई के बाद निर्वासन की प्रक्रिया सुगम हो सके। पीड़ितों से वादा किया गया था कि उसे ब्रिटेन से बाहर भेजा जाएगा। गौरतलब है कि शाबिर अहमद 1960 के दशक के अंत में पाकिस्तान छोड़कर ब्रिटेन आया था और उसके पास दोनों देशों की नागरिकता थी।

निर्वासन में कानूनी अड़चनें

ब्रिटेन सरकार के सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान का इनकार 1971 के इमिग्रेशन एक्ट से उत्पन्न कानूनी बाधा से भी बड़ी समस्या बन गया है। वह कानूनी अड़चन कॉमनवेल्थ नागरिक होने के आधार पर शाबिर को ब्रिटेन से बाहर भेजने में रोक बन रही है। द टेलीग्राफ ने एक सरकारी सूत्र के हवाले से लिखा, "1971 के इमिग्रेशन एक्ट से जुड़ी समस्या का शायद कोई हल निकल सकता है, लेकिन पाकिस्तान वाला मामला उससे ज़्यादा मुश्किल है।"

व्यापक जांच का संदर्भ

यह मामला ब्रिटेन में बच्चों के संगठित यौन शोषण की व्यापक जांच की पृष्ठभूमि में सामने आया है। निजी रूप से वित्त-पोषित एक संसदीय जांच — जिसे 'सामूहिक दुष्कर्म इन्क्वायरी' नाम दिया गया — की 219 पन्नों की रिपोर्ट के अनुसार, कई दशकों तक कम से कम 2,50,000 लड़कियों को सामूहिक दुष्कर्म, तस्करी, यातना और जबरदस्ती गर्भवती किए जाने का शिकार बनाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकांश अपराधी पाकिस्तानी मुस्लिम मूल के थे और इस शोषण को सक्षम बनाने वाले संस्थान मुख्यतः ब्रिटिश सरकारी तंत्र के थे।

इस जांच की अध्यक्षता रिफॉर्म यूके के सांसद रूपर्ट लोव ने की, जबकि संचालन प्रमुख सर्वाइवर और सामाजिक कार्यकर्ता सैमी वुडहाउस थीं। 20,000 से अधिक लोगों ने इस जांच को आर्थिक सहयोग दिया। हालाँकि इस जांच को कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं थे, फिर भी इसमें पीड़ितों, व्हिसलब्लोअर्स, नेताओं और विशेषज्ञों की गवाही कई सार्वजनिक सुनवाइयों के दौरान दर्ज की गई।

आगे की राह

फिलहाल शाबिर अहमद की कानूनी स्थिति अनिश्चित बनी हुई है — वह ब्रिटेन में है, लेकिन उसके पास वैध ब्रिटिश पासपोर्ट नहीं है और पाकिस्तान उसे स्वीकार करने से मना कर रहा है। पीड़ितों के साथ किए गए वादे और वर्तमान कूटनीतिक गतिरोध, दोनों ब्रिटिश सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं कि वह इस मामले का स्थायी समाधान निकाले।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि नागरिकता एकतरफा दस्तावेज़ नष्ट करने से नहीं जाती। यह पहली बार नहीं है जब किसी देश ने इसी तर्क का सहारा लिया हो — यह एक परिचित राजनयिक रणनीति है जो जवाबदेही से बचने के लिए इस्तेमाल होती है। ब्रिटेन की असली विफलता यह है कि उसने 2016 में पासपोर्ट रद्द करते समय पाकिस्तान से बाध्यकारी समझौता नहीं कराया। अब पीड़ितों को न्याय की प्रतीक्षा में दो सरकारों की कूटनीतिक खींचतान का सामना करना पड़ रहा है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शाबिर अहमद कौन है और उसे किस मामले में सजा हुई थी?
शाबिर अहमद रोशडेल ग्रूमिंग गैंग का मुख्य दोषी है, जिसे 2012 में 30 नाबालिग लड़कियों से बलात्कार के मामलों में 22 साल की सजा सुनाई गई थी। वह 14 साल की सजा काटने के बाद इस सप्ताह जेल से रिहा हुआ है।
पाकिस्तान ने शाबिर अहमद को वापस लेने से क्यों इनकार किया?
पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि शाबिर अहमद ने अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट फाड़ दिया था, इसलिए वह अब पाकिस्तान का नागरिक नहीं है। इसी आधार पर पाकिस्तान उसे वापस लेने से मना कर रहा है।
ब्रिटेन शाबिर अहमद को निर्वासित क्यों नहीं कर पा रहा?
ब्रिटेन के सामने दो बाधाएँ हैं — पहली, 1971 के इमिग्रेशन एक्ट की कानूनी अड़चन जो कॉमनवेल्थ नागरिकों के निर्वासन को जटिल बनाती है; दूसरी और बड़ी बाधा, पाकिस्तान का नागरिकता से इनकार। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान का मामला कानूनी अड़चन से भी ज़्यादा मुश्किल है।
ब्रिटेन की ग्रूमिंग गैंग जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया?
निजी रूप से वित्त-पोषित 219 पन्नों की संसदीय जांच रिपोर्ट के अनुसार, कई दशकों तक कम से कम 2,50,000 लड़कियाँ सामूहिक दुष्कर्म, तस्करी, यातना और जबरदस्ती गर्भवती किए जाने की शिकार हुईं। रिपोर्ट में कहा गया कि अधिकांश अपराधी पाकिस्तानी मुस्लिम मूल के थे।
शाबिर अहमद के पीड़ितों के साथ क्या वादा किया गया था?
पीड़ितों से वादा किया गया था कि सजा पूरी होने के बाद शाबिर अहमद को ब्रिटेन से निर्वासित किया जाएगा। इसी उद्देश्य से 2016 में उसका ब्रिटिश पासपोर्ट रद्द किया गया था, लेकिन पाकिस्तान के इनकार के बाद यह वादा अधूरा रह गया है।
राष्ट्र प्रेस
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