रोचडेल गैंग सरगना शबीर अहमद को वापस लेने से पाकिस्तान का इनकार, ब्रिटेन की प्रतिबंध की चेतावनी बेअसर
सारांश
मुख्य बातें
बाल यौन शोषण के दोषी शबीर अहमद — रोचडेल ग्रूमिंग गैंग के सरगना — को वापस लेने से पाकिस्तान ने साफ इनकार कर दिया है, जिससे ब्रिटेन और इस्लामाबाद के बीच कूटनीतिक तनाव गहरा गया है। अहमद को बच्चों से बलात्कार के 30 मामलों में दोषी ठहराते हुए 2012 में 22 साल की सजा सुनाई गई थी और जुलाई 2025 की शुरुआत में 14 साल जेल में बिताने के बाद उसे रिहा किया गया।
पाकिस्तान का सार्वजनिक इनकार
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया कि पाकिस्तान सरकार अहमद को वापस स्वीकार नहीं करेगी। रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद ने अहमद की वापसी के बदले ब्रिटेन से दो राजनीतिक विरोधियों को सौंपने की शर्त रखी है — एक ऐसी माँग जिसे ब्रिटिश सरकार ने अस्वीकार्य माना है।
ब्रिटेन की कार्रवाई की चेतावनी
इस हफ्ते की शुरुआत में ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने हाउस ऑफ कॉमन्स की विदेश मामलों की समिति के समक्ष कहा कि सरकार 'सभी संभव तरीकों' पर विचार करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि ब्रिटेन पहले भी कई देशों को विदेशी अपराधियों को वापस लेने के लिए राजी करने में सफल रहा है — और इसके लिए प्रतिबंधों की चेतावनी भी दी गई थी।
कानूनी पेचीदगी और निर्वासन की बाधा
अहमद की ब्रिटिश नागरिकता 2016 में रद्द कर दी गई थी ताकि रिहाई के बाद उसे देश से निर्वासित किया जा सके। पीड़ितों से भी यही वादा किया गया था। हालाँकि, 1971 के इमिग्रेशन एक्ट में एक 55 साल पुराना प्रावधान उन लोगों को सुरक्षा देता है जो 1973 से पहले ब्रिटेन आए थे और कम से कम पाँच साल वहाँ रहे थे — जिसके कारण अहमद को अभी भी पाकिस्तान नहीं भेजा जा सकता।
ब्रिटेन को पाकिस्तान की विदेशी सहायता पर सवाल
इस विवाद के बीच, उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार पाकिस्तान को अगले तीन वर्षों में 15.5 करोड़ पाउंड (लगभग ₹1,650 करोड़) की ब्रिटिश विदेशी सहायता मिलने की उम्मीद है। इस पृष्ठभूमि में ब्रिटेन के भीतर यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस सहायता को अहमद की वापसी से जोड़ा जाना चाहिए।
व्यापक संदर्भ: ब्रिटेन में संगठित बाल यौन शोषण
एक निजी कोष से तैयार 219 पन्नों की संसदीय जाँच रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन में कई दशकों में कम से कम 2.5 लाख लड़कियाँ — और संभवतः इससे भी अधिक बच्चे — गैंग रेप, मानव तस्करी, यातना और जबरन गर्भधारण जैसे अपराधों के शिकार हुए। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि आरोपियों में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी मुस्लिम पृष्ठभूमि के लोग थे, जबकि इन्हें रोकने में नाकाम रहने वाली संस्थाएँ मुख्यतः ब्रिटिश राज्य की थीं।
यह मामला ब्रिटेन-पाकिस्तान संबंधों में एक नई जटिलता जोड़ता है और पीड़ितों के साथ किए गए वादों की पूर्ति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।