10 अक्टूबर 2026
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यूक्रेन विदेश मंत्री सिबिहा की अमेरिका-रूस तेल समझौते पर कड़ी आलोचना, बोले- 'तुष्टिकरण कभी शांति नहीं लाता'

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यूक्रेन विदेश मंत्री सिबिहा की अमेरिका-रूस तेल समझौते पर कड़ी आलोचना, बोले- 'तुष्टिकरण कभी शांति नहीं लाता'

सारांश

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के रूस से डीजल खरीद समझौते के बाद यूक्रेन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री सिबिहा ने 'तुष्टिकरण कभी शांति नहीं लाता' कहते हुए पश्चिमी एकता पर सवाल उठाए, जबकि जेलेंस्की ने अमेरिका से निष्पक्ष और मजबूत भूमिका की माँग की।

मुख्य बातें

यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने एक्स पर अमेरिका-रूस तेल समझौते को 'कमजोर रणनीति' बताया।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने समझौते को 'मजबूत साझेदारों का कमजोर फैसला' करार दिया और कहा कि इससे रूस को युद्ध लंबा खींचने का अवसर मिलेगा।
जेलेंस्की ने रूस के ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने की पेशकश की, बशर्ते रूस यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले बंद करे।
यूक्रेन ने अमेरिका से दोनों पक्षों के बीच पारस्परिक समझौता कराने की अपील की।
बिना स्थायी तनाव-घटाने वाले समझौते के प्रतिबंधों में ढील को यूक्रेन ने कमजोरी का संकेत बताया।

यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने 10 अक्टूबर 2026 को अमेरिका-रूस तेल समझौते की कड़ी आलोचना करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'कमजोर रणनीतियां कभी मजबूत नतीजे नहीं देती, जैसे तुष्टिकरण कभी शांति नहीं लाता।' यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस से डीजल खरीदने के समझौते के बाद आई, जिसने कूटनीतिक हलकों में दोहरे मानदंड की बहस को और तेज कर दिया है।

समझौते की पृष्ठभूमि और यूक्रेन की आपत्ति

सिबिहा ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की उस टिप्पणी का खुलकर समर्थन किया, जिसमें जेलेंस्की ने अमेरिका-रूस तेल समझौते को 'मजबूत साझेदारों का कमजोर फैसला' करार दिया था। जेलेंस्की ने आगाह किया कि यदि किसी स्पष्ट और स्थायी तनाव-घटाने वाले समझौते के बिना रूस पर लगी पाबंदियां हटाई जाती हैं, तो यह कमजोरी का संकेत होगा।

यह ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के संभावित समाधान को लेकर पश्चिमी देशों में आपसी मतभेद उभरते दिख रहे हैं। गौरतलब है कि रूस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों का मूल उद्देश्य उसकी सैन्य क्षमता को आर्थिक रूप से कमजोर करना रहा है — ऐसे में अमेरिका द्वारा रूसी ईंधन खरीद को यूक्रेन उस नीति के विरुद्ध मान रहा है।

जेलेंस्की की चेतावनी: रूस को मिलेगा गलत संदेश

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि इस समझौते से रूस को फायदा होगा — उसे और लोगों की जान लेने, युद्ध को लंबा खींचने, अमेरिका का कम सम्मान करने तथा दुनिया को अधिक नुकसान पहुंचाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'पुतिन को दिए गए तोहफे न तो शांति लाएंगे और न ही सभ्य दुनिया को कोई फायदा पहुंचाएंगे। रूस इस डीजल का जवाब और ज्यादा आतंक तथा धोखे से देगा।'

जेलेंस्की ने रूस को पेट्रोलियम उत्पाद बेचने की अनुमति देने की तुलना ऐसे युद्ध में निवेश करने से की, जिसे खत्म किया जाना चाहिए, न कि आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

पारस्परिक युद्धविराम का प्रस्ताव

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने एकतरफा रियायत की जगह दोनों पक्षों से समान और वास्तविक कदम उठाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि यदि रूस यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले बंद करता है, तो यूक्रेन भी रूसी तेल सुविधाओं पर हमले रोकने को तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका से इस संबंध में दोनों पक्षों के बीच एक पारस्परिक समझौता कराने की अपील की।

अमेरिका से निष्पक्ष भूमिका की माँग

जेलेंस्की ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि अमेरिका हमारे लोगों और हमारे जीवन की रक्षा के लिए निष्पक्ष समर्थन देगा। साथ ही हम चाहते हैं कि अमेरिका रूस से भी उतनी ही मजबूती से बात करे — मजबूत तरीके से, न कि कमजोर तरीके से।' विदेश मंत्री सिबिहा की एक्स पोस्ट को यूक्रेन की उसी स्थिति की आधिकारिक पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा

यूक्रेन का यह कूटनीतिक दबाव ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब शांति वार्ता की संभावनाओं को लेकर विभिन्न मंचों पर बातचीत जारी है। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका-रूस तेल समझौते से पश्चिमी एकता पर सवाल उठ सकते हैं और आगामी कूटनीतिक प्रयासों की दिशा प्रभावित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा की कवरेज उस असली सवाल से चूक जाती है — क्या अमेरिका एक साथ यूक्रेन का समर्थक और रूस का व्यापारिक भागीदार बन सकता है? यह विरोधाभास आगामी शांति प्रयासों की विश्वसनीयता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका-रूस तेल समझौता क्या है और यूक्रेन इसका विरोध क्यों कर रहा है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस से डीजल खरीदने का समझौता किया गया है। यूक्रेन इसका विरोध कर रहा है क्योंकि उसके अनुसार यह उन पश्चिमी प्रतिबंधों के विरुद्ध है जो रूस की सैन्य-आर्थिक क्षमता को कमजोर करने के लिए लगाए गए थे।
यूक्रेन के विदेश मंत्री सिबिहा ने क्या कहा?
विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने एक्स पर लिखा कि 'कमजोर रणनीतियां कभी मजबूत नतीजे नहीं देती, जैसे तुष्टिकरण कभी शांति नहीं लाता।' उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की की आलोचना का समर्थन किया और समझौते को 'कमजोर फैसला' बताया।
जेलेंस्की ने रूस से कौन-सा पारस्परिक प्रस्ताव रखा?
जेलेंस्की ने कहा कि यदि रूस यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले बंद करता है, तो यूक्रेन भी रूसी तेल सुविधाओं पर हमले रोकने को तैयार है। उन्होंने अमेरिका से इस पारस्परिक समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की अपील की।
यूक्रेन के अनुसार रूस पर प्रतिबंध हटाने से क्या खतरा है?
जेलेंस्की के अनुसार, बिना किसी स्पष्ट और स्थायी तनाव-घटाने वाले समझौते के प्रतिबंध हटाना कमजोरी का संकेत होगा। उनका कहना है कि इससे रूस को युद्ध लंबा खींचने, अधिक जनहानि करने और अमेरिका का कम सम्मान करने का अवसर मिलेगा।
यूक्रेन अमेरिका से क्या चाहता है?
यूक्रेन चाहता है कि अमेरिका रूस के साथ उतनी ही कड़ाई से पेश आए जितना वह यूक्रेन का समर्थन करता है। जेलेंस्की ने अमेरिका से निष्पक्ष समर्थन और रूस के साथ मजबूत कूटनीतिक रुख अपनाने की मांग की है।
राष्ट्र प्रेस
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