यूक्रेन सेना का रूसी ठिकानों पर बड़ा हमला: कुर्स्क में पुल तबाह, क्रीमिया में EW टावर निशाने पर
सारांश
मुख्य बातें
यूक्रेन रक्षा मंत्रालय ने 4 अगस्त 2026 की रात रूस के विरुद्ध व्यापक सैन्य अभियान की पुष्टि की, जिसमें कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों और रूस की सीमा के भीतर स्थित सामरिक ढाँचों को एक साथ निशाना बनाया गया। मंत्रालय के अनुसार यह कार्रवाई रूसी सेना की रसद आपूर्ति श्रृंखला को कमज़ोर करने की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
यूक्रेन रक्षा मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी कि 'रात भर में यूक्रेन की सेना के जवानों ने देश के अंदर कब्जे वाले इलाकों और रूस के अंदर मौजूद रूसी सैन्य ढांचों पर कई हमले किए।' मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इसी तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
हमलों की श्रृंखला में खेरसॉन क्षेत्र के शचास्लीवत्सेवे में स्थित एफएसबी यूनिट का तैनाती केंद्र प्रमुख लक्ष्य रहा। इसके समानांतर रूस के कुर्स्क क्षेत्र में ज्वानोये के निकट सेइम नदी पर बने सड़क पुल को भी तबाह किया गया।
अन्य निशाने और सामरिक महत्व
यूक्रेनी रक्षा बलों ने जापोरिज्जिया क्षेत्र के स्विटलोडोलिंस्के के पास मोलोचना नदी पर स्थित रेलवे पुल को भी क्षतिग्रस्त किया। इसके अतिरिक्त वोवचांस्के और विल्ने में मरम्मत इकाइयाँ, कब्जे वाले क्रीमिया के ओलेनिव्का में शहेद/गेर्बेरा रिले के लिए संचार एवं बिजली केंद्र, आर्टेमिव्का में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) टावर तथा डोनेट्स्क क्षेत्र के बाखमुत में कमांड पोस्ट और संचार केंद्र को भी निशाना बनाया गया।
मंत्रालय ने पुष्टि की कि दोनों नष्ट किए गए पुल रूसी सेना की रसद आपूर्ति और अतिरिक्त सैनिकों की आवाजाही के लिए नियमित रूप से उपयोग में लाए जाते थे। इन पुलों के ध्वस्त होने से रूसी सेना की अग्रिम पंक्ति तक सामग्री पहुँचाने की क्षमता पर सीधा असर पड़ेगा, रक्षा विश्लेषकों का यही मानना है।
रणनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन लगातार रूस के उन ठिकानों को निशाना बना रहा है जो युद्ध में उसकी सैन्य क्षमता को सहारा देते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले शनिवार की रात भी यूक्रेन ने रूस पर हमले किए थे और एक ईंधन भंडारण केंद्र को निशाना बनाया था। यूक्रेन की यह रणनीति रूसी रसद नेटवर्क को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर करने पर केंद्रित दिखती है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पहले भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि यूक्रेन अपनी लंबी दूरी की क्षमताओं का उपयोग करते हुए रूस के उन ठिकानों को निशाना बनाता रहेगा जो आक्रमण के लिए धन और सामग्री जुटाते हैं। यह अभियान उसी घोषित नीति की अगली कड़ी है।
आगे क्या
यूक्रेन रक्षा मंत्रालय ने संकेत दिया है कि रूसी सैन्य ढाँचे पर इस प्रकार के लक्षित हमले भविष्य में भी जारी रहेंगे। सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, यूक्रेन की यह रणनीति संघर्ष के दीर्घकालिक स्वरूप को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि रसद आपूर्ति में बाधा युद्धक्षेत्र में रूसी दबाव को कम करने में सहायक होती है।