मॉस्को तेल रिफाइनरी पर यूक्रेन का दूसरा हमला, जेलेंस्की बोले — रूस की युद्ध मशीन को बनाया निशाना
सारांश
मुख्य बातें
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने 18 जून 2026 को दावा किया कि यूक्रेनी सेना ने एक सप्ताह में दूसरी बार मॉस्को क्षेत्र की तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया है। जेलेंस्की के अनुसार, इन लंबी दूरी के हमलों में रोस्तोव क्षेत्र और यूक्रेन के अस्थायी रूप से कब्जे वाले इलाकों में भी लक्ष्यों पर प्रहार किया गया। यह हमले ऐसे समय में हुए हैं जब फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन में यूक्रेन को अंतरराष्ट्रीय साझेदारों का महत्वपूर्ण समर्थन मिला था।
मुख्य घटनाक्रम
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'पिछली रात हमारी लंबी दूरी की कार्रवाइयाँ एक बार फिर मॉस्को क्षेत्र तक पहुँचीं। इस हफ्ते दूसरी बार मॉस्को की तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। इसके अलावा, रोस्तोव क्षेत्र और यूक्रेन के अस्थायी रूप से कब्जे वाले इलाकों में भी लक्ष्यों पर हमला किया गया।' गौरतलब है कि यह उसी सप्ताह का दूसरा बड़ा हमला है, जो रूस की ऊर्जा अवसंरचना को कमज़ोर करने की यूक्रेनी रणनीति का हिस्सा कथित तौर पर माना जा रहा है।
जेलेंस्की का बयान — 'जायज जवाब'
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इन हमलों को रूस द्वारा यूक्रेनी शहरों और समुदायों पर किए जा रहे हमलों का 'पूरी तरह जायज जवाब' बताया। उन्होंने कहा, 'यह उन ठिकानों के खिलाफ हमारी सेना की एक और महत्वपूर्ण सफलता है, जो रूस की युद्ध मशीन को चलाने में मदद करते हैं।' जेलेंस्की ने यूक्रेन की सुरक्षा सेवा, मानव रहित प्रणाली बल, विशेष अभियान बल, रक्षा खुफिया विभाग और मिसाइल ब्रिगेड को उनके 'समन्वित और सटीक प्रयासों' के लिए धन्यवाद दिया।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन और जी-7 संदर्भ
जेलेंस्की ने एवियन जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के दौरान बताया था कि रूस पर दबाव बढ़ाने और यूक्रेन की रक्षा को मजबूत बनाने के लिए कई अहम कदमों पर सहमति बनी है। उन्होंने यह भी कहा कि 'पिछले कुछ दिनों में हमारे सभी साझेदारों ने हमारी मध्यम और लंबी दूरी की कार्रवाइयों की सटीकता और प्रभावशीलता को नोट किया है।' यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता की सीमाओं पर पुनर्विचार कर रहे हैं।
युद्धविराम की माँग
जेलेंस्की ने अपने बयान में यह भी कहा कि 'अब समय आ गया है कि यह युद्ध समाप्त हो और रूस को कूटनीतिक स्तर पर जरूरी कदम उठाने चाहिए।' यह संकेत देता है कि यूक्रेन सैन्य दबाव को कूटनीतिक वार्ता के साथ जोड़ने की रणनीति अपना रहा है। हालाँकि, रूस की ओर से इन हमलों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या
यूक्रेन की ओर से लंबी दूरी के हमलों की बढ़ती आवृत्ति और जी-7 का समर्थन मिलने के बाद, विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में रूस की ऊर्जा अवसंरचना पर और दबाव बढ़ सकता है। दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम की संभावना अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।