18 जुलाई 2026
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तालिबान के बाल विवाह कानून की संयुक्त राष्ट्र ने निंदा की, 'चुप्पी को सहमति' प्रावधान को बताया मानवाधिकार उल्लंघन

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तालिबान के बाल विवाह कानून की संयुक्त राष्ट्र ने निंदा की, 'चुप्पी को सहमति' प्रावधान को बताया मानवाधिकार उल्लंघन

सारांश

तालिबान ने 14 मई को एक ऐसा कानून जारी किया जो यौवनारंभ के बाद लड़कियों के विवाह को वैध बनाता है और उनकी चुप्पी को सहमति मानता है। संयुक्त राष्ट्र की बाल अधिकार समिति ने इसे मानवाधिकारों का 'गंभीर और व्यवस्थित उल्लंघन' बताते हुए तत्काल वापसी की माँग की है।

मुख्य बातें

तालिबान ने 14 मई 2026 को नया विवाह कानून जारी किया, जिसमें यौवनारंभ के बाद लड़कियों के विवाह को वैध बनाया गया।
कानून में लड़की की चुप्पी को विवाह की सहमति मानने का प्रावधान है, जिसे CRC ने अस्वीकार्य बताया।
18 स्वतंत्र विशेषज्ञों वाली संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समिति ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का 'गंभीर और व्यवस्थित उल्लंघन' करार दिया।
समिति ने चेतावनी दी कि इससे लड़कियों को हिंसा, शोषण, कम उम्र में गर्भधारण और शिक्षा से वंचित होने का खतरा है।
CRC ने तालिबान से बाल अधिकारों का उल्लंघन करने वाले सभी कानून तत्काल वापस लेने और लड़कियों की शिक्षा व समानता के अधिकार बहाल करने की माँग की।

संयुक्त राष्ट्र की बाल अधिकार समिति (CRC) ने अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा 14 मई 2026 को जारी नए विवाह कानून की कड़े शब्दों में निंदा की है, जिसमें यौवनारंभ के बाद लड़कियों के विवाह को वैध ठहराया गया है और लड़की की चुप्पी को विवाह की सहमति माना गया है। 18 स्वतंत्र बाल अधिकार विशेषज्ञों वाली इस समिति ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का 'गंभीर और व्यवस्थित उल्लंघन' करार दिया है।

तालिबान के कानून में क्या है

तालिबान प्रशासन द्वारा जारी इस फरमान में दो प्रमुख प्रावधान हैं — पहला, यौवनारंभ के बाद लड़कियों के विवाह को कानूनी वैधता देना, और दूसरा, विवाह के समय लड़की की चुप्पी को उसकी सहमति के रूप में स्वीकार करना। CRC ने स्पष्ट किया कि यौवनारंभ को वयस्कता या विवाह की कानूनी क्षमता का आधार नहीं माना जा सकता।

समिति ने कहा, '18 वर्ष से कम आयु में होने वाला विवाह बाल विवाह माना जाता है, जो एक हानिकारक प्रथा और जबरन विवाह का रूप है, क्योंकि बच्चों में विवाह के लिए पूर्ण, स्वतंत्र और जान-बूझकर सहमति देने की क्षमता नहीं होती।'

लड़कियों पर असर

समिति ने चेतावनी दी कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि मूल मानवाधिकारों का हनन है। इससे लड़कियों को हिंसा, शोषण, कम उम्र में गर्भधारण, शिक्षा में बाधा तथा गंभीर मानसिक और शारीरिक नुकसान का खतरा होता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि इन नीतियों ने लाखों अफगान लड़कियों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित किया है, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक भागीदारी सीमित हुई है और देश में गरीबी व असमानता और गहरी हुई है।

व्यापक भेदभावपूर्ण नीतियों का हिस्सा

बाल अधिकार विशेषज्ञों ने इस कानून को तालिबान की उस व्यापक नीति का अंग बताया जिसके तहत लड़कियों की माध्यमिक और उच्च शिक्षा पर पहले से ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है। गौरतलब है कि 2021 में सत्ता में वापसी के बाद से तालिबान ने महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों पर एक के बाद एक प्रतिबंध लगाए हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बार-बार आलोचना की है।

समिति ने आगाह किया कि कोई भी कानूनी व्यवस्था जो बाल विवाह को सामान्य या वैध बनाती है, वह बच्चों की गरिमा, स्वतंत्रता और भविष्य के अवसरों को छीन लेती है।

संयुक्त राष्ट्र की माँग

CRC ने तालिबान प्रशासन से सभी ऐसे कानूनों को तत्काल वापस लेने की अपील की है जो बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। समिति ने लड़कियों के शिक्षा, सुरक्षा, समानता और समाज में पूर्ण भागीदारी के अधिकारों को बहाल करने की माँग की, यह रेखांकित करते हुए कि ये दायित्व संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार संधि के तहत अफगानिस्तान की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी का हिस्सा हैं।

यह निंदा ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद तालिबान ने अपनी नीतियों में कोई बदलाव नहीं किया है, और मानवाधिकार संगठन अफगानिस्तान की स्थिति को लगातार बिगड़ता हुआ बता रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तालिबान की नीतियाँ बदलने के बजाय और कठोर होती गई हैं — जो वैश्विक मानवाधिकार तंत्र की सीमाओं को उजागर करता है। असली सवाल यह है कि निंदा के आगे क्या — जब तक ठोस जवाबदेही का कोई तंत्र नहीं बनता, ये बयान अफगान लड़कियों के जीवन में कोई फर्क नहीं डालते।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तालिबान के नए बाल विवाह कानून में क्या प्रावधान हैं?
14 मई 2026 को जारी इस कानून में यौवनारंभ के बाद लड़कियों के विवाह को कानूनी वैधता दी गई है और विवाह के समय लड़की की चुप्पी को उसकी सहमति माना गया है। संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समिति ने दोनों प्रावधानों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के विरुद्ध बताया है।
संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समिति ने इस कानून पर क्या कहा?
18 स्वतंत्र विशेषज्ञों वाली CRC ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का 'गंभीर और व्यवस्थित उल्लंघन' बताया। समिति ने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु में विवाह बाल विवाह है और बच्चों में स्वतंत्र सहमति देने की क्षमता नहीं होती।
इस कानून से अफगान लड़कियों पर क्या असर पड़ेगा?
CRC के अनुसार, इस कानून से लड़कियों को हिंसा, शोषण, कम उम्र में गर्भधारण, शिक्षा में बाधा और गंभीर मानसिक व शारीरिक नुकसान का खतरा बढ़ेगा। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इससे देश में गरीबी और सामाजिक असमानता और गहरी होगी।
क्या यह कानून तालिबान की किसी बड़ी नीति का हिस्सा है?
हाँ, विशेषज्ञों के अनुसार यह कानून तालिबान की उस व्यापक भेदभावपूर्ण नीति का अंग है जिसके तहत 2021 से लड़कियों की माध्यमिक और उच्च शिक्षा पर भी प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इन नीतियों ने लाखों अफगान लड़कियों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित किया है।
संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान से क्या माँग की है?
CRC ने तालिबान प्रशासन से बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले सभी कानूनों को तत्काल वापस लेने की अपील की है। साथ ही लड़कियों की शिक्षा, सुरक्षा, समानता और समाज में पूर्ण भागीदारी के अधिकार बहाल करने की माँग की है, जो संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार संधि के तहत अफगानिस्तान की जिम्मेदारी है।
राष्ट्र प्रेस
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