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तालिबान के नए तलाक आदेश पर संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: अफगान महिलाओं और लड़कियों के अधिकार खतरे में

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तालिबान के नए तलाक आदेश पर संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: अफगान महिलाओं और लड़कियों के अधिकार खतरे में

सारांश

तालिबान के अप्रैल 2026 के अलगाव आदेश ने संयुक्त राष्ट्र को सचेत कर दिया है — यह आदेश दिसंबर 2021 की उस प्रगति को पलटता दिखता है जिसमें वयस्क महिला की सहमति अनिवार्य थी। अब लड़कियाँ युवावस्था तक हिंसक विवाह झेलने को मजबूर हो सकती हैं।

मुख्य बातें

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने 19 जून 2026 को तालिबान के नए अलगाव आदेश पर गंभीर चिंता जताई।
तालिबान-नियंत्रित न्याय मंत्रालय ने अप्रैल 2026 में 'पति-पत्नी के अलगाव' संबंधी आदेश जारी किया।
नया आदेश दिसंबर 2021 के उस प्रावधान के विपरीत है जिसमें विवाह के लिए वयस्क महिला की सहमति अनिवार्य थी।
लड़कियाँ युवावस्था आने तक अलगाव की माँग नहीं कर सकतीं — जिससे वर्षों तक शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण का खतरा।
शिया समुदाय और धार्मिक अल्पसंख्यक समूह भी इस आदेश से प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों ने तालिबान से इन भेदभावपूर्ण प्रावधानों को वापस लेने की अपील की है।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने 19 जून 2026 को चेतावनी दी है कि तालिबान के न्याय मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2026 में जारी 'पति-पत्नी के अलगाव' संबंधी नए आदेश से अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के मौलिक अधिकारों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदेश न केवल बाल विवाह को कथित तौर पर मान्यता देता है, बल्कि हिंसक और शोषणकारी विवाहों से बाहर निकलने के रास्ते भी बंद करता है।

नया आदेश क्या कहता है

तालिबान-नियंत्रित न्याय मंत्रालय के अप्रैल 2026 के इस आदेश में वैवाहिक अलगाव की शर्तें इस प्रकार निर्धारित की गई हैं कि एक लड़की शादी के बाद युवावस्था आने पर ही अलग होने की माँग कर सकती है। इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि बाल-विवाह को रोकने के बजाय, उसे वर्षों तक झेलने के बाद ही राहत पाने का विकल्प दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रावधान बाल विवाह को कानूनी स्वीकृति देने जैसा प्रतीत होता है।

पिछले आदेश से विरोधाभास

गौरतलब है कि दिसंबर 2021 में तालिबान के पहले आदेश में विवाह के लिए 'एक वयस्क महिला' की सहमति को अनिवार्य बताया गया था, जिसका संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने स्वागत किया था। नया आदेश उसी दिशा से पीछे हटता दिखता है। विशेषज्ञों ने यह भी स्वीकार किया कि पिछली सरकार के समय भी अफगानिस्तान में कम उम्र में विवाह एक गंभीर सामाजिक समस्या रही है, लेकिन नए आदेश से स्थिति और भी बिगड़ने की आशंका है।

महिलाओं और लड़कियों पर असर

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि इस आदेश से अभिभावकों और संरक्षकों को अपनी शक्ति के दुरुपयोग का अधिक अवसर मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, 'लड़कियाँ कई वर्षों तक शारीरिक, मानसिक, यौन और आर्थिक नुकसान झेलने के लिए विवश हो सकती हैं, उसके बाद ही वे राहत की माँग कर पाएंगी।' घरेलू हिंसा की शिकायत करना और अलगाव की अनुमति प्राप्त करना इस नए ढाँचे में लगभग असंभव हो सकता है। इसका प्रतिकूल प्रभाव शिया समुदाय और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों पर भी पड़ने की आशंका जताई गई है।

अंतरराष्ट्रीय दायित्व की याद

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने तालिबान अधिकारियों को याद दिलाया कि अफगानिस्तान कई अंतरराष्ट्रीय संधियों का पक्षकार है — जिनमें महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव उन्मूलन का समझौता, यातना-विरोधी समझौता, और बाल अधिकार समझौता शामिल हैं। विशेषज्ञों ने स्पष्ट कहा, 'शादी सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और कानूनी मामला हो सकता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत तालिबान अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे महिलाओं और बच्चों को हिंसा से बचाएं और उनके सम्मान, समानता और सुरक्षा के अधिकारों की रक्षा करें।'

आगे क्या

विशेषज्ञों ने तालिबान से इन भेदभावपूर्ण प्रावधानों को वापस लेने की अपील की है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफगानिस्तान में महिला अधिकारों की स्थिति को लेकर पहले से ही गहरी चिंता में है। अब देखना यह होगा कि संयुक्त राष्ट्र की यह अपील तालिबान की नीतियों पर कोई प्रभाव डाल पाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसे भी अब पलटा जा रहा है — यानी जो थोड़ी प्रगति दिखी थी, वह भी कागज़ी साबित हो रही है। संयुक्त राष्ट्र की अपीलें पहले भी आती रही हैं, लेकिन तालिबान पर उनका व्यावहारिक प्रभाव नगण्य रहा है; असली सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बार चेतावनी से आगे जाकर कोई ठोस दबाव बनाएगा या नहीं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तालिबान का नया अलगाव आदेश क्या है?
यह तालिबान-नियंत्रित न्याय मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2026 में जारी एक आदेश है जो पति-पत्नी के अलगाव की शर्तें तय करता है। इसके तहत एक लड़की युवावस्था आने पर ही अलगाव की माँग कर सकती है, जिससे बाल विवाह को कथित तौर पर मान्यता मिलती है।
संयुक्त राष्ट्र ने इस आदेश पर चिंता क्यों जताई?
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदेश महिलाओं और लड़कियों को शोषण और हिंसा के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है। यह दिसंबर 2021 के उस प्रावधान को भी पलटता है जिसमें विवाह के लिए वयस्क महिला की सहमति अनिवार्य थी।
इस आदेश से अफगान लड़कियों पर क्या असर पड़ेगा?
रिपोर्ट के अनुसार, लड़कियाँ युवावस्था तक शारीरिक, मानसिक, यौन और आर्थिक शोषण झेलने के लिए मजबूर हो सकती हैं, उसके बाद ही वे राहत माँग सकती हैं। घरेलू हिंसा की शिकायत करना और अलगाव की अनुमति पाना भी इस नए ढाँचे में अत्यंत कठिन हो सकता है।
क्या अफगानिस्तान किसी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधि का सदस्य है?
हाँ, अफगानिस्तान महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव उन्मूलन समझौते, यातना-विरोधी समझौते और बाल अधिकार समझौते का पक्षकार है। संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने तालिबान को इन अंतरराष्ट्रीय दायित्वों की याद दिलाई है।
संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान से क्या माँग की है?
विशेषज्ञों ने तालिबान अधिकारियों से इन भेदभावपूर्ण प्रावधानों को वापस लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत तालिबान की जिम्मेदारी है कि वे महिलाओं और बच्चों के सम्मान, समानता और सुरक्षा के अधिकारों की रक्षा करें।
राष्ट्र प्रेस
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