पाकिस्तान का आदेश: 10 जुलाई से बिना वैध वीज़ा अफगान नागरिकों की होगी तत्काल गिरफ्तारी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने 29 जून 2026 को एक सख्त निर्देश जारी करते हुए आदेश दिया है कि 10 जुलाई से बिना वैध वीज़ा के देश में रहने वाले किसी भी अफगान नागरिक को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव चरम पर है और पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद द्विपक्षीय संबंध और भी बिगड़ गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
गृह मंत्रालय द्वारा सभी प्रांतों और इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र (ICT) के प्रशासन को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्देश 1 जून को इल्लीगल फॉरेनर्स रिपैट्रिएशन प्लान (IFRP) पर आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान लिए गए फैसलों के अनुसार है। अधिसूचना में कहा गया कि उस बैठक में सभी प्रांतीय सरकारों, विशेष क्षेत्र सरकारों और ICT प्रशासन को अफगान नागरिकों के प्रत्यावर्तन और निर्वासन में तेज़ी लाने का निर्देश दिया गया था, जिसमें वीज़ा की समय-सीमा पार कर चुके मामले भी शामिल हैं।
अधिसूचना में सीधे शब्दों में लिखा गया: '10 जुलाई से अगर कोई अफगान नागरिक बिना वैध वीज़ा के पाकिस्तान में रहता हुआ पाया जाता है, तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।'
प्रशासनिक तैयारी और रिपोर्टिंग ढाँचा
इन आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी डिप्टी कमिश्नरों, जिला प्रशासन, पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। इसके अलावा, मंत्रालय ने एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का भी आदेश दिया है जिसमें पाकिस्तान में बिना वैध वीज़ा के रह रहे अफगान नागरिकों की संख्या, उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई और 11 जुलाई तक उनकी मौजूदा स्थिति का ब्यौरा हो।
निर्वासन अभियान की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने 2023 में अफगान नागरिकों के विरुद्ध निर्वासन अभियान शुरू किया था, जिसे पिछले साल अप्रैल में फिर से सक्रिय किया गया। उस दौरान पाकिस्तान सरकार ने अफगान नागरिकों के लाखों रेज़िडेंस परमिट रद्द कर दिए और चेतावनी दी कि स्वेच्छा से न जाने पर गिरफ्तारी होगी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (UNHCR) के आँकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत से अब तक करीब 2,70,000 अफगान नागरिकों को अफगानिस्तान वापस भेजा जा चुका है, जिनमें से अधिकांश ईरान और पाकिस्तान से हैं।
यह आँकड़ा पिछले वर्ष के आँकड़ों के अतिरिक्त है, जब ईरान से 12 लाख से अधिक और पाकिस्तान से 1,50,000 से अधिक अफगान शरणार्थियों को वापस भेजा गया था।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी और मानवाधिकार चिंताएँ
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने 22 मई को मेज़बान देशों से अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजने के खिलाफ चेतावनी दी और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एवं शरणार्थी कानून का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा, 'अफगान महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को उन देशों से बाहर निकाला जा रहा है जहाँ वे सुरक्षा चाहते थे, जिससे उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध अफगानिस्तान लौटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है और वे गंभीर खतरे में पड़ रहे हैं।'
टर्क ने आगे कहा, 'जिन लोगों को मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर खतरा है, उन्हें बिना सहमति के अफगानिस्तान वापस भेजना नॉन-रिफाउलमेंट के मूल अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांतों के विरुद्ध है।' उन्होंने देशों से अपील की कि वे अपनी अंतरराष्ट्रीय कानूनी जिम्मेदारियों का पालन करें।
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायक मिशन (UNAMA) और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) की 2025 की रिपोर्ट 'No Safe Haven' के अनुसार, जबरन डिपोर्ट किए गए अफगान शरणार्थियों को तालिबान अधिकारियों द्वारा मनमानी गिरफ्तारी, हिरासत, यातना और दुर्व्यवहार सहित कई गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना करना पड़ा है। विशेष रूप से महिलाओं, लड़कियों, पूर्व सरकारी अधिकारियों, मीडियाकर्मियों, सिविल सोसाइटी और LGBTQ+ समुदाय के सदस्यों पर बदले की कार्रवाई का खतरा सबसे अधिक बताया गया है।
आगे क्या होगा
10 जुलाई की समयसीमा नज़दीक आने के साथ पाकिस्तान में रह रहे अफगान नागरिकों के लिए स्थिति और अनिश्चित हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की आलोचना के बावजूद पाकिस्तान अपने निर्वासन अभियान को और सख्त करता दिख रहा है। पाक-अफगान संबंधों में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह संकट आने वाले हफ्तों में और गहरा हो सकता है।