29 जून 2026
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पाकिस्तान का आदेश: 10 जुलाई से बिना वैध वीज़ा अफगान नागरिकों की होगी तत्काल गिरफ्तारी

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पाकिस्तान का आदेश: 10 जुलाई से बिना वैध वीज़ा अफगान नागरिकों की होगी तत्काल गिरफ्तारी

सारांश

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने 10 जुलाई से बिना वैध वीज़ा वाले अफगान नागरिकों की तत्काल गिरफ्तारी का आदेश दिया है — यह अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद उठाया गया नया कदम है। संयुक्त राष्ट्र पहले ही जबरन निर्वासन को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता चुका है, और इस वर्ष अब तक 2,70,000 अफगान नागरिक वापस भेजे जा चुके हैं।

मुख्य बातें

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने 10 जुलाई 2026 से बिना वैध वीज़ा वाले अफगान नागरिकों को तत्काल गिरफ्तार करने का आदेश जारी किया।
यह आदेश 1 जून को IFRP समीक्षा बैठक में लिए गए फैसलों के अनुसार है; सभी प्रांतों और ICT को निर्देश दिए गए।
मंत्रालय ने 11 जुलाई तक बिना वीज़ा अफगान नागरिकों की संख्या और उनके विरुद्ध कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट माँगी है।
इस वर्ष अब तक करीब 2,70,000 अफगान नागरिक ईरान और पाकिस्तान से वापस भेजे जा चुके हैं — UNHCR के आँकड़ों के अनुसार।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने 22 मई को जबरन निर्वासन को नॉन-रिफाउलमेंट सिद्धांत का उल्लंघन बताते हुए देशों से अपील की।
UNAMA-OHCHR की 2025 रिपोर्ट 'No Safe Haven' के अनुसार, डिपोर्ट किए गए अफगानों को तालिबान द्वारा यातना, मनमानी गिरफ्तारी और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है।

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने 29 जून 2026 को एक सख्त निर्देश जारी करते हुए आदेश दिया है कि 10 जुलाई से बिना वैध वीज़ा के देश में रहने वाले किसी भी अफगान नागरिक को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव चरम पर है और पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद द्विपक्षीय संबंध और भी बिगड़ गए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

गृह मंत्रालय द्वारा सभी प्रांतों और इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र (ICT) के प्रशासन को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्देश 1 जून को इल्लीगल फॉरेनर्स रिपैट्रिएशन प्लान (IFRP) पर आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान लिए गए फैसलों के अनुसार है। अधिसूचना में कहा गया कि उस बैठक में सभी प्रांतीय सरकारों, विशेष क्षेत्र सरकारों और ICT प्रशासन को अफगान नागरिकों के प्रत्यावर्तन और निर्वासन में तेज़ी लाने का निर्देश दिया गया था, जिसमें वीज़ा की समय-सीमा पार कर चुके मामले भी शामिल हैं।

अधिसूचना में सीधे शब्दों में लिखा गया: '10 जुलाई से अगर कोई अफगान नागरिक बिना वैध वीज़ा के पाकिस्तान में रहता हुआ पाया जाता है, तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।'

प्रशासनिक तैयारी और रिपोर्टिंग ढाँचा

इन आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी डिप्टी कमिश्नरों, जिला प्रशासन, पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। इसके अलावा, मंत्रालय ने एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का भी आदेश दिया है जिसमें पाकिस्तान में बिना वैध वीज़ा के रह रहे अफगान नागरिकों की संख्या, उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई और 11 जुलाई तक उनकी मौजूदा स्थिति का ब्यौरा हो।

निर्वासन अभियान की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पाकिस्तान ने 2023 में अफगान नागरिकों के विरुद्ध निर्वासन अभियान शुरू किया था, जिसे पिछले साल अप्रैल में फिर से सक्रिय किया गया। उस दौरान पाकिस्तान सरकार ने अफगान नागरिकों के लाखों रेज़िडेंस परमिट रद्द कर दिए और चेतावनी दी कि स्वेच्छा से न जाने पर गिरफ्तारी होगी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (UNHCR) के आँकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत से अब तक करीब 2,70,000 अफगान नागरिकों को अफगानिस्तान वापस भेजा जा चुका है, जिनमें से अधिकांश ईरान और पाकिस्तान से हैं।

यह आँकड़ा पिछले वर्ष के आँकड़ों के अतिरिक्त है, जब ईरान से 12 लाख से अधिक और पाकिस्तान से 1,50,000 से अधिक अफगान शरणार्थियों को वापस भेजा गया था।

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी और मानवाधिकार चिंताएँ

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने 22 मई को मेज़बान देशों से अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजने के खिलाफ चेतावनी दी और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एवं शरणार्थी कानून का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा, 'अफगान महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को उन देशों से बाहर निकाला जा रहा है जहाँ वे सुरक्षा चाहते थे, जिससे उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध अफगानिस्तान लौटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है और वे गंभीर खतरे में पड़ रहे हैं।'

टर्क ने आगे कहा, 'जिन लोगों को मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर खतरा है, उन्हें बिना सहमति के अफगानिस्तान वापस भेजना नॉन-रिफाउलमेंट के मूल अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांतों के विरुद्ध है।' उन्होंने देशों से अपील की कि वे अपनी अंतरराष्ट्रीय कानूनी जिम्मेदारियों का पालन करें।

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायक मिशन (UNAMA) और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) की 2025 की रिपोर्ट 'No Safe Haven' के अनुसार, जबरन डिपोर्ट किए गए अफगान शरणार्थियों को तालिबान अधिकारियों द्वारा मनमानी गिरफ्तारी, हिरासत, यातना और दुर्व्यवहार सहित कई गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना करना पड़ा है। विशेष रूप से महिलाओं, लड़कियों, पूर्व सरकारी अधिकारियों, मीडियाकर्मियों, सिविल सोसाइटी और LGBTQ+ समुदाय के सदस्यों पर बदले की कार्रवाई का खतरा सबसे अधिक बताया गया है।

आगे क्या होगा

10 जुलाई की समयसीमा नज़दीक आने के साथ पाकिस्तान में रह रहे अफगान नागरिकों के लिए स्थिति और अनिश्चित हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की आलोचना के बावजूद पाकिस्तान अपने निर्वासन अभियान को और सख्त करता दिख रहा है। पाक-अफगान संबंधों में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह संकट आने वाले हफ्तों में और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वही आज उन्हें 'अवैध' घोषित कर रहा है — और यह तब हो रहा है जब अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तहत लौटने वालों के लिए खतरा संयुक्त राष्ट्र द्वारा दस्तावेज़ीकृत है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि IFRP का क्रियान्वयन चुनिंदा और राजनीतिक रूप से प्रेरित रहा है — 2023 से चल रहे इस अभियान की गति हर बार पाक-अफगान राजनयिक तनाव के साथ बढ़ती है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद पाकिस्तान की नीति में कोई बदलाव न आना यह संकेत देता है कि घरेलू राजनीति और सुरक्षा हित मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं पर भारी पड़ रहे हैं।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान ने अफगान नागरिकों की गिरफ्तारी का आदेश क्यों दिया?
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने 1 जून को IFRP समीक्षा बैठक के फैसलों के तहत यह आदेश जारी किया, जिसमें बिना वैध वीज़ा वाले अफगान नागरिकों के निर्वासन में तेज़ी लाने का निर्देश दिया गया था। यह कदम अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव की पृष्ठभूमि में उठाया गया है।
पाकिस्तान में अफगान नागरिकों की गिरफ्तारी कब से शुरू होगी?
गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार 10 जुलाई 2026 से बिना वैध वीज़ा वाले किसी भी अफगान नागरिक को तत्काल गिरफ्तार किया जाएगा। मंत्रालय ने 11 जुलाई तक ऐसे नागरिकों की संख्या और उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी माँगी है।
IFRP क्या है और यह अफगान नागरिकों को कैसे प्रभावित करता है?
इल्लीगल फॉरेनर्स रिपैट्रिएशन प्लान (IFRP) पाकिस्तान की वह नीति है जिसके तहत बिना वैध दस्तावेज़ वाले विदेशी नागरिकों — मुख्यतः अफगानों — को वापस उनके देश भेजा जाता है। यह योजना 2023 में शुरू हुई और अप्रैल 2025 में फिर से सक्रिय की गई, जिसके तहत लाखों रेज़िडेंस परमिट रद्द किए गए।
संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान के इस कदम पर क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने 22 मई को जबरन निर्वासन को नॉन-रिफाउलमेंट के अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांत का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को अफगानिस्तान में गंभीर खतरा है, उन्हें जबरन वापस भेजना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और शरणार्थी कानून के विरुद्ध है।
अफगानिस्तान वापस भेजे गए नागरिकों की स्थिति कैसी है?
UNAMA और OHCHR की 2025 की रिपोर्ट 'No Safe Haven' के अनुसार, जबरन डिपोर्ट किए गए अफगान नागरिकों को तालिबान अधिकारियों द्वारा मनमानी गिरफ्तारी, हिरासत, यातना और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है। महिलाओं, पूर्व सरकारी अधिकारियों, मीडियाकर्मियों और LGBTQ+ समुदाय के सदस्यों पर खतरा सबसे अधिक बताया गया है।
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