10 अगस्त 2026
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अफगान शरणार्थियों की जबरन वापसी रोको — एमनेस्टी इंटरनेशनल की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

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अफगान शरणार्थियों की जबरन वापसी रोको — एमनेस्टी इंटरनेशनल की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

सारांश

दुनिया भर में इस साल 2,70,000 से अधिक अफगान नागरिकों को जबरन वापस भेजा जा चुका है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने चेतावनी दी है कि यह नॉन-रिफाउलमेंट के अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांत का उल्लंघन है और लौटने वालों को तालिबान के हाथों गंभीर खतरा है।

मुख्य बातें

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 21 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगान शरणार्थियों की गैर-कानूनी निष्कासन प्रक्रिया तत्काल रोकने की अपील की।
इस वर्ष अब तक करीब 2,70,000 अफगान नागरिकों को वापस भेजा जा चुका है — अधिकांश ईरान और पाकिस्तान से।
पिछले वर्ष ईरान से 12 लाख और पाकिस्तान से 1,50,000 से अधिक अफगान शरणार्थियों को निष्कासित किया गया था।
OHCHR प्रमुख वोल्कर टर्क ने व्यक्तिगत जोखिम आकलन के बिना किसी भी अनैच्छिक वापसी के विरुद्ध चेतावनी दी।
UNAMA-OHCHR की 2025 की रिपोर्ट 'No Safe Haven' के अनुसार, डिपोर्ट किए गए शरणार्थियों को तालिबान द्वारा मनमानी गिरफ्तारी, यातना और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।
यूरोपीय संघ के प्रस्तावित नए वापसी नियमों पर भी चिंता जताई गई है कि ये मानवाधिकार सुरक्षा उपायों को कमजोर कर सकते हैं।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 21 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे अफगान शरणार्थियों को गैर-कानूनी तरीके से निकालना तत्काल बंद करें और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। मानवाधिकार संगठन ने चेतावनी दी कि होस्ट देशों में शरणार्थियों को मनमानी गिरफ्तारी और परिवार-विच्छेद का सामना करना पड़ रहा है, जबकि अफगानिस्तान लौटने पर उन्हें गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन झेलने पड़ रहे हैं।

एमनेस्टी का बयान और मुख्य माँगें

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'दुनिया भर में लाखों अफगान शरणार्थियों को निकाला जा रहा है और यह संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। होस्ट देशों में उन्हें मनमानी गिरफ्तारी और परिवार से अलग होने का सामना करना पड़ रहा है; लौटने पर, उन्हें दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक के बीच मानवाधिकार उल्लंघन का सामना करना पड़ रहा है।'

संगठन ने स्पष्ट रूप से कहा कि 'अफगान लोगों को गैर-कानूनी तरीके से निकालना बंद होना चाहिए और जिन लोगों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत है, उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के अनुसार सुरक्षित रखा जाना चाहिए।'

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी और आँकड़े

यह अपील ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ पड़ोसी देशों से अफगान शरणार्थियों के निष्कासन में तेज़ी की रिपोर्ट कर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) के प्रमुख वोल्कर टर्क ने मई 2026 की शुरुआत में ही अफगान शरणार्थियों और शरण चाहने वालों को जबरन अफगानिस्तान वापस भेजने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी थी और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एवं शरणार्थी कानून का सीधा उल्लंघन करार दिया था।

टर्क के अनुसार, 'अफगान महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को उन देशों से बाहर निकाला जा रहा है जहाँ वे सुरक्षा चाहते थे, जिससे उन्हें अपनी मर्जी के विरुद्ध अफगानिस्तान लौटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है और वे गंभीर खतरे में पड़ रहे हैं।'

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के आँकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत से अब तक करीब 2,70,000 अफगान नागरिकों को वापस भेजा जा चुका है — जिनमें से अधिकांश ईरान और पाकिस्तान से हैं, जबकि तुर्किए और ताजिकिस्तान से संख्या अपेक्षाकृत कम है। यह पिछले वर्ष ईरान से 12 लाख और पाकिस्तान से 1,50,000 से अधिक अफगान शरणार्थियों को वापस भेजे जाने के अतिरिक्त है।

सबसे अधिक खतरे में कौन

OHCHR ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि महिलाओं और लड़कियों, पूर्व अफगान सरकार एवं उसके सुरक्षा बलों से जुड़े लोगों, मीडिया कर्मियों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों और LGBTQ+ समुदाय के लोगों पर तालिबान द्वारा बदले की कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर खतरा बना हुआ है।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायक मिशन (UNAMA) और OHCHR की 2025 की संयुक्त रिपोर्ट — जिसका शीर्षक 'No Safe Haven' है — के अनुसार, जबरन डिपोर्ट किए गए अफगान शरणार्थियों को तालिबान अधिकारियों द्वारा मनमानी गिरफ्तारी, हिरासत, यातना और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है।

यूरोपीय संघ की नीतियों पर चिंता

यूरोपीय संघ के कई सदस्य देश अफगान नागरिकों की वापसी के लिए समन्वित प्रयास कर रहे हैं। वोल्कर टर्क ने चिंता जताई कि यूरोप के कुछ देश अफगानिस्तान में मानवाधिकार की गंभीर स्थिति के बावजूद डिपोर्टेशन फिर से शुरू कर रहे हैं या इस पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि EU के प्रस्तावित नए वापसी नियम — जो अभी समीक्षाधीन हैं — मानवाधिकार सुरक्षा उपायों को कमजोर कर सकते हैं।

टर्क ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मैं व्यक्तिगत जोखिम आकलन (personalized risk assessment) के बिना अफगानिस्तान में सभी अनैच्छिक वापसी के विरुद्ध पूरी तरह से चेतावनी देता हूँ, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और शरणार्थी कानून के अनुसार अनिवार्य है।'

आगे क्या होगा

UNHCR और IOM ने बार-बार दोहराया है कि अफगान शरणार्थियों की वापसी सुरक्षित और सम्मानजनक होनी चाहिए तथा लौटने वालों के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय समर्थन की आवश्यकता है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की यह अपील अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर नैतिक और कानूनी दबाव बढ़ाती है कि वे नॉन-रिफाउलमेंट के मूल सिद्धांत का पालन करें — जो किसी व्यक्ति को ऐसी जगह वापस भेजने पर रोक लगाता है जहाँ उसे गंभीर खतरा हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

70,000 निष्कासन का यह आँकड़ा महज एक संख्या नहीं — यह उस वैश्विक राजनीतिक दबाव का प्रतिबिंब है जिसमें शरणार्थी कानून को 'प्रवासन प्रबंधन' के नाम पर दरकिनार किया जा रहा है। विडंबना यह है कि जो देश अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों के हस्ताक्षरकर्ता हैं, वही नॉन-रिफाउलमेंट के सिद्धांत को व्यवहार में तोड़ रहे हैं। EU के प्रस्तावित नियम इस प्रवृत्ति को संस्थागत रूप देने का जोखिम उठाते हैं। असली सवाल यह है कि जब सबसे कमजोर — महिलाएँ, पत्रकार, LGBTQ+ समुदाय — तालिबान के हाथों खतरे में हों, तो 'सुरक्षित वापसी' की परिभाषा कौन तय करेगा और उसकी जवाबदेही कौन लेगा?
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अफगान शरणार्थियों के बारे में क्या अपील की है?
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 21 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगान शरणार्थियों को गैर-कानूनी तरीके से निकालना बंद करने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की। संगठन ने चेतावनी दी कि जबरन वापसी से शरणार्थियों को तालिबान के हाथों गंभीर खतरा है।
इस साल कितने अफगान शरणार्थियों को वापस भेजा गया है?
UNHCR के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत से अब तक करीब 2,70,000 अफगान नागरिकों को वापस भेजा जा चुका है, जिनमें से अधिकांश ईरान और पाकिस्तान से हैं। यह पिछले वर्ष ईरान से 12 लाख और पाकिस्तान से 1,50,000 से अधिक निष्कासनों के अतिरिक्त है।
नॉन-रिफाउलमेंट सिद्धांत क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
नॉन-रिफाउलमेंट अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी कानून का एक मूल सिद्धांत है जो किसी व्यक्ति को ऐसे देश में वापस भेजने पर रोक लगाता है जहाँ उसे गंभीर खतरा हो। OHCHR प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा है कि व्यक्तिगत जोखिम आकलन के बिना अफगानिस्तान में की जा रही अनैच्छिक वापसी इस सिद्धांत का उल्लंघन है।
अफगानिस्तान लौटने पर शरणार्थियों को किन खतरों का सामना करना पड़ता है?
UNAMA और OHCHR की 2025 की रिपोर्ट 'No Safe Haven' के अनुसार, जबरन डिपोर्ट किए गए शरणार्थियों को तालिबान द्वारा मनमानी गिरफ्तारी, हिरासत, यातना और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है। महिलाओं, लड़कियों, पत्रकारों, LGBTQ+ समुदाय और पूर्व सरकारी कर्मचारियों को सबसे अधिक खतरा है।
यूरोपीय संघ की नीतियों पर क्या चिंता जताई गई है?
वोल्कर टर्क ने कहा कि EU के कुछ सदस्य देश अफगानिस्तान में मानवाधिकार की गंभीर स्थिति के बावजूद डिपोर्टेशन फिर से शुरू कर रहे हैं। EU के प्रस्तावित नए वापसी नियम — जो अभी समीक्षाधीन हैं — मानवाधिकार सुरक्षा उपायों को कमजोर कर सकते हैं और लोगों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
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