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अफगानिस्तान में 38 लाख लड़कियाँ स्कूल से बाहर, यूएन ने 'खोई हुई पीढ़ी' की चेतावनी दी

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अफगानिस्तान में 38 लाख लड़कियाँ स्कूल से बाहर, यूएन ने 'खोई हुई पीढ़ी' की चेतावनी दी

सारांश

अफगानिस्तान में 38 लाख लड़कियाँ स्कूल से बाहर हैं और हर साल 2.5 लाख और जुड़ रही हैं — यूएनएएमए ने इसे 'खोई हुई पीढ़ी' का संकट बताया। तालिबान के प्रतिबंध लगातार पाँचवें साल जारी हैं, और 2.19 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की दरकार है।

मुख्य बातें

38 लाख लड़कियाँ अफगानिस्तान में स्कूल से बाहर हैं, जिनमें 26 लाख से अधिक किशोरियाँ माध्यमिक शिक्षा से वंचित हैं।
हर साल लगभग 2.5 लाख अतिरिक्त लड़कियाँ माध्यमिक शिक्षा से बाहर हो रही हैं।
यूएनएएमए की कार्यवाहक प्रमुख जॉर्जेट गैगनन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को 'खोई हुई पीढ़ी' की चेतावनी दी।
4 जून 2026 को आयोजित 'कनकोर' परीक्षा में लगातार चौथे वर्ष लड़कियाँ शामिल नहीं हो सकीं।
2026 में 2.19 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की ज़रूरत; 47 लाख गंभीर खाद्य असुरक्षा में, 37 लाख बच्चे कुपोषण से पीड़ित।
28 लाख अफगान नागरिकों के 2026 में पड़ोसी देशों से लौटने की उम्मीद, जिससे संकट और गहराने की आशंका।

अफगानिस्तान में 38 लाख लड़कियाँ स्कूल से वंचित हैं और देश एक 'खोई हुई पीढ़ी' की कगार पर खड़ा है — यह चेतावनी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए यूएनएएमए (अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन) की कार्यवाहक प्रमुख जॉर्जेट गैगनन ने दी। तालिबान द्वारा 2021 में सत्ता पर काबिज होने के बाद से लड़कियों की शिक्षा पर लगाए गए प्रतिबंध लगातार पाँचवें वर्ष भी जारी हैं।

शिक्षा पर प्रतिबंध की स्थिति

जॉर्जेट गैगनन ने सुरक्षा परिषद को बताया कि 7 से 18 वर्ष की आयु की करीब 38 लाख लड़कियाँ स्कूल नहीं जा पा रही हैं। इनमें 26 लाख से अधिक किशोरियाँ हैं जिन्हें माध्यमिक शिक्षा से पूरी तरह वंचित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि हर साल लगभग 2.5 लाख अतिरिक्त लड़कियाँ माध्यमिक शिक्षा से बाहर हो रही हैं, जिससे यह संकट साल-दर-साल गहरा होता जा रहा है।

गौरतलब है कि मार्च 2026 में अफगानिस्तान में नया शैक्षणिक वर्ष शुरू हुआ, लेकिन लगातार पाँचवें वर्ष भी छठी कक्षा से ऊपर की लड़कियाँ स्कूल नहीं लौट सकीं।

विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा से भी बाहर लड़कियाँ

4 जून 2026 को काबुल में तालिबान के नियंत्रण वाले राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण ने 'कनकोर' नामक विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा का तीसरा चरण आयोजित किया। काबुल विश्वविद्यालय में हजारों उम्मीदवारों ने परीक्षा दी, लेकिन लगातार चौथे वर्ष भी लड़कियाँ इसमें शामिल नहीं हो सकीं।

राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण के प्रशासनिक और तकनीकी उप प्रमुख रहीमुल्लाह हक्कानी के अनुसार, परीक्षा के पहले तीन चरणों में पूरे अफगानिस्तान में 1.10 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए — किंतु इनमें कोई भी महिला नहीं थी।

सामाजिक और आर्थिक असर

गैगनन ने चेतावनी दी कि महिलाओं और लड़कियों पर लगातार थोपे जा रहे प्रतिबंधों का अफगानिस्तान के सामाजिक और आर्थिक विकास पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति में कुछ हद तक स्थिरता के संकेत ज़रूर दिखे हैं और राजस्व संग्रह में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन विकास की गति अभी भी बेहद धीमी है।

यह ऐसे समय में आया है जब 2026 में पड़ोसी देशों से करीब 28 लाख अफगान नागरिकों के स्वदेश लौटने की उम्मीद है, जिससे पहले से ही बेरोज़गारी, गरीबी और सीमित सरकारी सेवाओं से जूझ रहे देश पर दबाव और बढ़ेगा।

मानवीय संकट की गहराई

संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार, 2026 में अफगानिस्तान में लगभग 2.19 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की ज़रूरत होगी। मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओसीएचए) में संकट प्रतिक्रिया निदेशक एडेम वोसोर्नू ने बताया कि 47 लाख लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा के खतरे का सामना कर रहे हैं, जबकि 37 लाख बच्चे तीव्र कुपोषण से पीड़ित हैं। धन की कमी के कारण राहत कार्य बाधित हो रहे हैं।

तालिबान के प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि

2021 में सत्ता पर काबिज होने के बाद से तालिबान ने महिलाओं और लड़कियों पर कई प्रतिबंध लगाए हैं — जिनमें लड़कियों को छठी कक्षा के बाद स्कूल जाने से रोकना, महिलाओं के विश्वविद्यालय में पढ़ने पर पाबंदी, और रोज़गार व सार्वजनिक स्थानों तक उनकी पहुँच को सीमित करना शामिल है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठन इन प्रतिबंधों को 'लैंगिक रंगभेद' की संज्ञा देते हैं। यदि शिक्षा तक पहुँच शीघ्र बहाल नहीं हुई, तो आने वाले दशकों में अफगानिस्तान की मानव पूँजी पर इसका अपूरणीय असर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया मुख्यतः बयानबाज़ी तक सीमित रही है — ठोस दबाव तंत्र नदारद है। 38 लाख का आँकड़ा केवल शैक्षणिक त्रासदी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक विनाश का खाका है: अनुमान है कि महिला कार्यबल की अनुपस्थिति अफगानिस्तान की GDP को दशकों तक दबाए रखेगी। हर साल 2.5 लाख नई लड़कियों का शिक्षा से बाहर होना यह स्पष्ट करता है कि यह संकट स्थिर नहीं, बल्कि बढ़ता हुआ है। मानवीय सहायता पर बढ़ती निर्भरता और 28 लाख शरणार्थियों की वापसी की आशंका मिलकर एक ऐसे दुष्चक्र की नींव रख रहे हैं, जिसे केवल संयुक्त राष्ट्र के भाषणों से नहीं तोड़ा जा सकता।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अफगानिस्तान में कितनी लड़कियाँ स्कूल से बाहर हैं?
यूएनएएमए के अनुसार, अफगानिस्तान में 7 से 18 वर्ष की आयु की करीब 38 लाख लड़कियाँ स्कूल नहीं जा पा रही हैं। इनमें 26 लाख से अधिक किशोरियाँ हैं जिन्हें माध्यमिक शिक्षा से पूरी तरह वंचित किया गया है।
तालिबान ने लड़कियों की शिक्षा पर कब से प्रतिबंध लगाया है?
2021 में सत्ता पर काबिज होने के बाद से तालिबान ने लड़कियों को छठी कक्षा के बाद स्कूल जाने से रोका हुआ है। 2026 में नया शैक्षणिक वर्ष शुरू होने के बावजूद यह प्रतिबंध लगातार पाँचवें वर्ष भी जारी है।
अफगानिस्तान में मानवीय संकट कितना गहरा है?
संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार, 2026 में अफगानिस्तान में लगभग 2.19 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की ज़रूरत होगी। 47 लाख लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा और 37 लाख बच्चे तीव्र कुपोषण से जूझ रहे हैं, जबकि धन की कमी के कारण राहत कार्य बाधित हो रहे हैं।
'कनकोर' परीक्षा में लड़कियाँ क्यों शामिल नहीं हो सकीं?
तालिबान के प्रतिबंधों के कारण लड़कियाँ लगातार चौथे वर्ष 4 जून 2026 को आयोजित 'कनकोर' विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा में भाग नहीं ले सकीं। यह परीक्षा केवल 12वीं कक्षा पास पुरुष उम्मीदवारों के लिए आयोजित की गई थी।
शिक्षा प्रतिबंध का अफगानिस्तान के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा?
यूएनएएमए की कार्यवाहक प्रमुख जॉर्जेट गैगनन के अनुसार, इन प्रतिबंधों का अफगानिस्तान के सामाजिक और आर्थिक विकास पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। हर साल 2.5 लाख अतिरिक्त लड़कियों का शिक्षा से बाहर होना देश को 'खोई हुई पीढ़ी' की ओर धकेल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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