अफगानिस्तान में 38 लाख लड़कियाँ स्कूल से बाहर, यूएन ने 'खोई हुई पीढ़ी' की चेतावनी दी
सारांश
मुख्य बातें
अफगानिस्तान में 38 लाख लड़कियाँ स्कूल से वंचित हैं और देश एक 'खोई हुई पीढ़ी' की कगार पर खड़ा है — यह चेतावनी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए यूएनएएमए (अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन) की कार्यवाहक प्रमुख जॉर्जेट गैगनन ने दी। तालिबान द्वारा 2021 में सत्ता पर काबिज होने के बाद से लड़कियों की शिक्षा पर लगाए गए प्रतिबंध लगातार पाँचवें वर्ष भी जारी हैं।
शिक्षा पर प्रतिबंध की स्थिति
जॉर्जेट गैगनन ने सुरक्षा परिषद को बताया कि 7 से 18 वर्ष की आयु की करीब 38 लाख लड़कियाँ स्कूल नहीं जा पा रही हैं। इनमें 26 लाख से अधिक किशोरियाँ हैं जिन्हें माध्यमिक शिक्षा से पूरी तरह वंचित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि हर साल लगभग 2.5 लाख अतिरिक्त लड़कियाँ माध्यमिक शिक्षा से बाहर हो रही हैं, जिससे यह संकट साल-दर-साल गहरा होता जा रहा है।
गौरतलब है कि मार्च 2026 में अफगानिस्तान में नया शैक्षणिक वर्ष शुरू हुआ, लेकिन लगातार पाँचवें वर्ष भी छठी कक्षा से ऊपर की लड़कियाँ स्कूल नहीं लौट सकीं।
विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा से भी बाहर लड़कियाँ
4 जून 2026 को काबुल में तालिबान के नियंत्रण वाले राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण ने 'कनकोर' नामक विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा का तीसरा चरण आयोजित किया। काबुल विश्वविद्यालय में हजारों उम्मीदवारों ने परीक्षा दी, लेकिन लगातार चौथे वर्ष भी लड़कियाँ इसमें शामिल नहीं हो सकीं।
राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण के प्रशासनिक और तकनीकी उप प्रमुख रहीमुल्लाह हक्कानी के अनुसार, परीक्षा के पहले तीन चरणों में पूरे अफगानिस्तान में 1.10 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए — किंतु इनमें कोई भी महिला नहीं थी।
सामाजिक और आर्थिक असर
गैगनन ने चेतावनी दी कि महिलाओं और लड़कियों पर लगातार थोपे जा रहे प्रतिबंधों का अफगानिस्तान के सामाजिक और आर्थिक विकास पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति में कुछ हद तक स्थिरता के संकेत ज़रूर दिखे हैं और राजस्व संग्रह में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन विकास की गति अभी भी बेहद धीमी है।
यह ऐसे समय में आया है जब 2026 में पड़ोसी देशों से करीब 28 लाख अफगान नागरिकों के स्वदेश लौटने की उम्मीद है, जिससे पहले से ही बेरोज़गारी, गरीबी और सीमित सरकारी सेवाओं से जूझ रहे देश पर दबाव और बढ़ेगा।
मानवीय संकट की गहराई
संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार, 2026 में अफगानिस्तान में लगभग 2.19 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की ज़रूरत होगी। मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओसीएचए) में संकट प्रतिक्रिया निदेशक एडेम वोसोर्नू ने बताया कि 47 लाख लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा के खतरे का सामना कर रहे हैं, जबकि 37 लाख बच्चे तीव्र कुपोषण से पीड़ित हैं। धन की कमी के कारण राहत कार्य बाधित हो रहे हैं।
तालिबान के प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि
2021 में सत्ता पर काबिज होने के बाद से तालिबान ने महिलाओं और लड़कियों पर कई प्रतिबंध लगाए हैं — जिनमें लड़कियों को छठी कक्षा के बाद स्कूल जाने से रोकना, महिलाओं के विश्वविद्यालय में पढ़ने पर पाबंदी, और रोज़गार व सार्वजनिक स्थानों तक उनकी पहुँच को सीमित करना शामिल है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठन इन प्रतिबंधों को 'लैंगिक रंगभेद' की संज्ञा देते हैं। यदि शिक्षा तक पहुँच शीघ्र बहाल नहीं हुई, तो आने वाले दशकों में अफगानिस्तान की मानव पूँजी पर इसका अपूरणीय असर पड़ सकता है।