यूनेस्को रिपोर्ट: अरब देशों में संघर्ष से 10 करोड़ से अधिक बच्चों की शिक्षा संकट में, गाजा में 97.5% स्कूल तबाह
सारांश
मुख्य बातें
यूनेस्को ने 4 मई 2026 को जारी अपनी नवीनतम रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अरब देशों में बढ़ते सशस्त्र संघर्ष के कारण क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में है और 10 करोड़ से अधिक बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, पहले से कमज़ोर शिक्षा तंत्र अब टूटने की कगार पर पहुँच गया है और एक पूरी पीढ़ी के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 15 अरब देशों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है। स्कूल बंद होने, पढ़ाई तक सीमित पहुँच और ऑनलाइन शिक्षा पर अत्यधिक निर्भरता के कारण करीब 5.2 करोड़ स्कूली बच्चों की पढ़ाई में गंभीर बाधा आई है। गौरतलब है कि इस संकट से पहले ही इस क्षेत्र में लगभग 3 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर थे।
यूनेस्को ने यह भी रेखांकित किया कि बच्चों में मानसिक तनाव तेज़ी से बढ़ रहा है और लंबे समय तक पढ़ाई का नुकसान होने तथा स्कूल स्थायी रूप से छोड़ने का खतरा भी बढ़ गया है।
गाजा में शिक्षा व्यवस्था लगभग पूरी तरह ध्वस्त
गाजा पट्टी में हालात सबसे गंभीर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वहाँ की शिक्षा व्यवस्था लगभग पूरी तरह चरमरा चुकी है। कथित तौर पर 97.5 प्रतिशत स्कूल या तो क्षतिग्रस्त हो चुके हैं या पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इसके परिणामस्वरूप 6.37 लाख से अधिक बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं — यह आँकड़ा किसी एक क्षेत्र में शिक्षा के सबसे बड़े विघटनों में से एक है।
लेबनान और सीरिया की स्थिति
लेबनान भी इस संकट से बुरी तरह प्रभावित है। वहाँ 1,100 से अधिक सरकारी स्कूलों को शरण स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और कम से कम 570 स्कूल या तो बंद हैं या संघर्ष-प्रभावित इलाकों में स्थित हैं। इससे 2.4 लाख से अधिक छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है।
सीरिया में हालात और जटिल हो गए हैं क्योंकि लेबनान से विस्थापित लोगों की वापसी हो रही है। इससे पहले से कमज़ोर शिक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। लौटने वाले बच्चों को तत्काल पढ़ाई की ज़रूरत है, लेकिन स्कूल या तो भरे हुए हैं या शरण स्थल बने हुए हैं, जिससे दोबारा दाखिला लेना भी मुश्किल हो रहा है।
इराक और खाड़ी देशों पर असर
यह संकट केवल सीधे संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। इराक में करीब 7,500 स्कूल, जिनमें 20 लाख छात्र पढ़ते हैं, ऑनलाइन शिक्षा पर स्थानांतरित हो गए हैं। वहीं, खाड़ी देशों में एहतियात के तौर पर कुछ समय के लिए स्कूल बंद किए गए हैं और हाइब्रिड (ऑफलाइन + ऑनलाइन) मॉडल अपनाया गया है। हालाँकि इस मॉडल में सभी बच्चों को समान गुणवत्ता की शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
यूनेस्को की अपील और आगे की राह
यूनेस्को फिलहाल आपातकालीन सहायता बढ़ा रही है — जिसमें अस्थायी स्कूलों का निर्माण, डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिये पढ़ाई और बच्चों को मनोवैज्ञानिक सहायता देना शामिल है। संस्था ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल मदद की अपील की है ताकि बच्चों की पढ़ाई जारी रह सके और भविष्य में एक मज़बूत शिक्षा व्यवस्था फिर से खड़ी की जा सके। यूनेस्को ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इस क्षेत्र को दीर्घकालिक नुकसान होगा और एक पूरी पीढ़ी की शिक्षा स्थायी रूप से बाधित हो सकती है।