लेबनान हिंसा में 7.7 लाख बच्चे मानसिक तनाव की चपेट में: यूनिसेफ की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि लेबनान में जारी हिंसा और बड़े पैमाने पर हुए विस्थापन के कारण करीब 7.7 लाख बच्चे गंभीर मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। संस्था ने कहा है कि यदि तत्काल मनो-सामाजिक सहायता नहीं पहुँचाई गई, तो इन बच्चों के मानसिक घाव आने वाले कई वर्षों तक बने रह सकते हैं।
मुख्य घटनाक्रम
17 अप्रैल 2026 को घोषित संघर्षविराम के बावजूद हालात नियंत्रण में नहीं आए हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सात दिनों में करीब 59 बच्चे या तो मारे गए हैं या घायल हुए हैं।
लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, संघर्षविराम के बाद से अब तक 23 बच्चों की मौत हो चुकी है और 93 बच्चे घायल हुए हैं। वहीं, 2 मार्च से अब तक कुल 200 बच्चों की जान जा चुकी है और 806 बच्चे घायल हुए हैं — यानी औसतन हर दिन लगभग 14 बच्चे इस हिंसा की चपेट में आ रहे हैं।
बच्चों पर मानसिक असर
यूनिसेफ ने कहा कि ये बच्चे लगातार हिंसा, अपनों को खोने और बार-बार घर छोड़ने की मजबूरी जैसी विकट परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों और उनके देखभालकर्ताओं में अत्यधिक डर और चिंता, बुरे सपने, नींद न आना तथा भविष्य को लेकर गहरी निराशा जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं।
संस्था के 2025 के 'चाइल्ड-फोकस्ड रैपिड असेसमेंट (CFRA)' में पाया गया था कि 2024 में सैन्य तनाव बढ़ने के बाद बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य में तेज गिरावट आई। इस अध्ययन के अनुसार, 72 प्रतिशत देखभालकर्ताओं ने बताया कि बच्चे 'चिंतित या घबराए हुए' थे, जबकि 62 प्रतिशत ने कहा कि बच्चे उदास या अवसादग्रस्त महसूस कर रहे थे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
यूनिसेफ के मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका के क्षेत्रीय निदेशक एडुआर्ड बेइगबेडर ने कहा, 'यदि तुरंत मदद नहीं पहुँचाई गई, तो इस संकट के मानसिक घाव बच्चों के साथ कई साल तक रह सकते हैं। इसका असर सिर्फ उनकी जिंदगी पर नहीं, बल्कि देश के भविष्य — दोनों पर पड़ेगा।'
उन्होंने आगे कहा, 'जिन बच्चों को अब स्कूल लौटकर सामान्य जीवन जीना चाहिए, दोस्तों के साथ खेलना चाहिए और डर के माहौल से बाहर निकलना चाहिए, वे आज हिंसा में मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर संघर्षविराम को प्रभावी बनाने का दबाव बढ़ रहा है।
आम जनता पर असर
यूनिसेफ ने स्पष्ट किया है कि यदि सुरक्षित माहौल में मानसिक स्वास्थ्य और मनो-सामाजिक सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई, तो ये बच्चे स्थायी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ सकते हैं। गौरतलब है कि लगातार जारी हिंसा और अस्थिरता ने इन प्रभावों को और गहरा कर दिया है, जिससे बच्चों को उबरने के लिए न तो समय मिल पा रहा है, न सुरक्षित वातावरण और न ही पर्याप्त सहायता।
क्या होगा आगे
यूनिसेफ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि लेबनान में बच्चों तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जा सकें और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके। संस्था का कहना है कि संघर्षविराम को स्थायी रूप देना और मानवीय सहायता की पहुँच सुनिश्चित करना अब सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।