लेबनान हिंसा में 7.7 लाख बच्चे मानसिक तनाव की चपेट में: यूनिसेफ की चेतावनी

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लेबनान हिंसा में 7.7 लाख बच्चे मानसिक तनाव की चपेट में: यूनिसेफ की चेतावनी

सारांश

संघर्षविराम के बावजूद लेबनान में बच्चों की पीड़ा थमी नहीं है। यूनिसेफ के अनुसार 7.7 लाख बच्चे मानसिक तनाव में हैं, 2 मार्च से 200 की मौत और 806 घायल हो चुके हैं। हर दिन औसतन 14 बच्चे इस हिंसा की भेंट चढ़ रहे हैं — यह सिर्फ आँकड़े नहीं, एक पीढ़ी के भविष्य पर खतरा है।

मुख्य बातें

यूनिसेफ के अनुसार लेबनान में करीब 7.7 लाख बच्चे हिंसा और विस्थापन के कारण गंभीर मानसिक तनाव झेल रहे हैं।
17 अप्रैल 2026 को घोषित संघर्षविराम के बाद भी पिछले सात दिनों में करीब 59 बच्चे मारे गए या घायल हुए।
लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार 2 मार्च से अब तक 200 बच्चों की मौत और 806 घायल ; औसतन हर दिन 14 बच्चे प्रभावित।
यूनिसेफ के 2025 CFRA अध्ययन में 72% देखभालकर्ताओं ने बच्चों में चिंता और 62% ने अवसाद के लक्षण बताए।
क्षेत्रीय निदेशक एडुआर्ड बेइगबेडर ने तत्काल मनो-सामाजिक सहायता न मिलने पर स्थायी मानसिक क्षति की चेतावनी दी।

यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि लेबनान में जारी हिंसा और बड़े पैमाने पर हुए विस्थापन के कारण करीब 7.7 लाख बच्चे गंभीर मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। संस्था ने कहा है कि यदि तत्काल मनो-सामाजिक सहायता नहीं पहुँचाई गई, तो इन बच्चों के मानसिक घाव आने वाले कई वर्षों तक बने रह सकते हैं।

मुख्य घटनाक्रम

17 अप्रैल 2026 को घोषित संघर्षविराम के बावजूद हालात नियंत्रण में नहीं आए हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सात दिनों में करीब 59 बच्चे या तो मारे गए हैं या घायल हुए हैं।

लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, संघर्षविराम के बाद से अब तक 23 बच्चों की मौत हो चुकी है और 93 बच्चे घायल हुए हैं। वहीं, 2 मार्च से अब तक कुल 200 बच्चों की जान जा चुकी है और 806 बच्चे घायल हुए हैं — यानी औसतन हर दिन लगभग 14 बच्चे इस हिंसा की चपेट में आ रहे हैं।

बच्चों पर मानसिक असर

यूनिसेफ ने कहा कि ये बच्चे लगातार हिंसा, अपनों को खोने और बार-बार घर छोड़ने की मजबूरी जैसी विकट परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों और उनके देखभालकर्ताओं में अत्यधिक डर और चिंता, बुरे सपने, नींद न आना तथा भविष्य को लेकर गहरी निराशा जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं।

संस्था के 2025 के 'चाइल्ड-फोकस्ड रैपिड असेसमेंट (CFRA)' में पाया गया था कि 2024 में सैन्य तनाव बढ़ने के बाद बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य में तेज गिरावट आई। इस अध्ययन के अनुसार, 72 प्रतिशत देखभालकर्ताओं ने बताया कि बच्चे 'चिंतित या घबराए हुए' थे, जबकि 62 प्रतिशत ने कहा कि बच्चे उदास या अवसादग्रस्त महसूस कर रहे थे।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

यूनिसेफ के मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका के क्षेत्रीय निदेशक एडुआर्ड बेइगबेडर ने कहा, 'यदि तुरंत मदद नहीं पहुँचाई गई, तो इस संकट के मानसिक घाव बच्चों के साथ कई साल तक रह सकते हैं। इसका असर सिर्फ उनकी जिंदगी पर नहीं, बल्कि देश के भविष्य — दोनों पर पड़ेगा।'

उन्होंने आगे कहा, 'जिन बच्चों को अब स्कूल लौटकर सामान्य जीवन जीना चाहिए, दोस्तों के साथ खेलना चाहिए और डर के माहौल से बाहर निकलना चाहिए, वे आज हिंसा में मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर संघर्षविराम को प्रभावी बनाने का दबाव बढ़ रहा है।

आम जनता पर असर

यूनिसेफ ने स्पष्ट किया है कि यदि सुरक्षित माहौल में मानसिक स्वास्थ्य और मनो-सामाजिक सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई, तो ये बच्चे स्थायी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ सकते हैं। गौरतलब है कि लगातार जारी हिंसा और अस्थिरता ने इन प्रभावों को और गहरा कर दिया है, जिससे बच्चों को उबरने के लिए न तो समय मिल पा रहा है, न सुरक्षित वातावरण और न ही पर्याप्त सहायता।

क्या होगा आगे

यूनिसेफ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि लेबनान में बच्चों तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जा सकें और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके। संस्था का कहना है कि संघर्षविराम को स्थायी रूप देना और मानवीय सहायता की पहुँच सुनिश्चित करना अब सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उससे भी चिंताजनक यह है कि संघर्षविराम घोषित होने के बाद भी बच्चों की मौतें रुकी नहीं हैं — यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की सीमाओं को उजागर करता है। 7.7 लाख बच्चों का मानसिक संकट केवल मानवीय त्रासदी नहीं, बल्कि लेबनान के दीर्घकालिक पुनर्निर्माण के लिए एक ढाँचागत खतरा है। मनो-सामाजिक सहायता को युद्ध के बाद की राहत में सबसे अंत में नहीं, सबसे पहले रखा जाना चाहिए — यह सबक दुनिया बार-बार भूलती है। जब तक सुरक्षित वातावरण और निरंतर सहायता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक ये आँकड़े केवल रिपोर्टों की शोभा बढ़ाते रहेंगे।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेबनान में कितने बच्चे मानसिक तनाव का शिकार हैं?
यूनिसेफ के अनुसार लेबनान में जारी हिंसा और विस्थापन के कारण करीब 7.7 लाख बच्चे गंभीर मानसिक तनाव झेल रहे हैं। इनमें अत्यधिक डर, बुरे सपने, नींद न आना और भविष्य को लेकर निराशा जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं।
लेबनान में संघर्षविराम के बाद भी बच्चों की मौतें क्यों हो रही हैं?
17 अप्रैल 2026 को संघर्षविराम घोषित होने के बावजूद हिंसा पूरी तरह नहीं थमी है। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार संघर्षविराम के बाद से अब तक 23 बच्चों की मौत हो चुकी है और 93 घायल हुए हैं।
2 मार्च से लेबनान में कुल कितने बच्चे प्रभावित हुए हैं?
लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार 2 मार्च से अब तक कुल 200 बच्चों की जान जा चुकी है और 806 बच्चे घायल हुए हैं। यह औसतन हर दिन लगभग 14 बच्चों के प्रभावित होने के बराबर है।
यूनिसेफ के CFRA अध्ययन में बच्चों की मानसिक स्थिति के बारे में क्या पाया गया?
यूनिसेफ के 2025 के 'चाइल्ड-फोकस्ड रैपिड असेसमेंट (CFRA)' में पाया गया कि 72 प्रतिशत देखभालकर्ताओं ने बच्चों में चिंता और घबराहट के लक्षण बताए, जबकि 62 प्रतिशत ने कहा कि बच्चे उदास या अवसादग्रस्त महसूस कर रहे थे। यह अध्ययन 2024 में सैन्य तनाव बढ़ने के बाद किया गया था।
यूनिसेफ ने लेबनान के बच्चों के लिए क्या माँग की है?
यूनिसेफ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल मनो-सामाजिक सहायता और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की अपील की है। संस्था ने चेतावनी दी है कि बिना समय पर हस्तक्षेप के ये बच्चे स्थायी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ सकते हैं, जिसका असर लेबनान के भविष्य पर भी पड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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