दक्षिणी लेबनान में जल संकट गहराया: 7 लाख लोग सुरक्षित पेयजल से वंचित, यूएन ने जताई गंभीर चिंता
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिणी लेबनान में संघर्ष के बाद जल आपूर्ति प्रणालियों को हुई व्यापक क्षति के कारण 7 लाख से अधिक लोगों की सुरक्षित पेयजल तक पहुँच बाधित हो गई है। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने 1 अगस्त को यह जानकारी देते हुए चेतावनी दी कि घर लौट रहे विस्थापितों की मानवीय ज़रूरतें अभी भी गंभीर बनी हुई हैं।
जल ढाँचे को नुकसान का दायरा
दक्षिण लेबनान जल प्राधिकरण के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, दक्षिण और नबातियेह गवर्नरेट्स में जल प्रणालियों को हुई क्षति ने 7 लाख से अधिक निवासियों को प्रभावित किया है। तालाबों, पंपिंग स्टेशनों, बोरहोल और अन्य जल सुविधाओं के नष्ट होने से न केवल पेयजल की उपलब्धता प्रभावित हुई है, बल्कि कृषि और आजीविका पर भी गहरा असर पड़ा है। ओसीएचए ने कहा कि इस क्षति से सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ता खतरा है।
विस्थापन की स्थिति
ओसीएचए के अनुसार, अब तक 8 लाख 21 हज़ार से अधिक लोग अपने समुदायों में वापस लौट चुके हैं, किंतु 3 लाख 60 हज़ार लोग अभी भी बेघर हैं। इनमें से लगभग 27,000 लोग सामूहिक आश्रय स्थलों में रह रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब समग्र विस्थापित आबादी 10 लाख से अधिक थी, जो अब धीरे-धीरे अपने घरों की ओर लौट रही है।
मानवाधिकार उल्लंघन पर यूएन की चेतावनी
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने अपने चार दिवसीय आधिकारिक दौरे के अंत में बेरूत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनके कार्यालय ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के बड़े पैमाने पर उल्लंघन दर्ज किए हैं, जिनमें से कुछ कथित तौर पर युद्ध अपराध हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लगातार हवाई हमलों, गोलाबारी और विस्फोटक हथियारों के उपयोग से भारी जनहानि हुई है।
टर्क ने बताया कि एक निष्पक्ष और स्वतंत्र आकलन मिशन ने 2 मार्च से संघर्ष में शामिल पक्षों द्वारा किए गए कथित उल्लंघनों पर साक्ष्य एकत्र करना शुरू कर दिया है।
हताहतों का आँकड़ा
लेबनानी अधिकारियों के हवाले से टर्क ने बताया कि 2 मार्च से अब तक लेबनान में 4,300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 12,200 से अधिक घायल हुए हैं। मृतकों में 135 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी और कई पत्रकार तथा मीडियाकर्मी भी शामिल हैं — जो संघर्ष की व्यापकता और नागरिक क्षेत्रों पर उसके असर को रेखांकित करता है।
आगे की राह
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि घर लौटने का अर्थ यह नहीं कि मानवीय संकट समाप्त हो गया। उन्होंने बुनियादी सेवाओं की बहाली, आजीविका के पुनर्निर्माण और समुदायों को सम्मान के साथ पुनर्स्थापित करने के लिए निरंतर मानवीय सहायता और त्वरित रिकवरी में निवेश की अपील की है। जल ढाँचे की मरम्मत को प्राथमिकता दिए बिना स्थायी पुनर्वास संभव नहीं होगा।