अफगानिस्तान: हेरात में महिला ड्रेस कोड विरोध पर तालिबान की गोलीबारी, 2 मौतें; संयुक्त राष्ट्र और EU ने की निंदा
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने 12 जून 2026 को अफगानिस्तान के हेरात शहर में महिलाओं के ड्रेस कोड विरोध-प्रदर्शन पर तालिबान द्वारा किए गए बल प्रयोग पर गहरी चिंता जताई है। इन प्रदर्शनों में एक लड़के समेत दो लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग घायल हुए। विशेषज्ञों ने तालिबान से तत्काल, निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच की माँग की है।
घटनाक्रम: कैसे भड़का विरोध
6 और 7 जून को हेरात में तालिबान अधिकारियों ने कई महिलाओं को कथित ड्रेस कोड उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया। इसके विरोध में 9 जून को नागरिक सड़कों पर उतर आए और लगातार बढ़ते कठोर प्रतिबंधों के खिलाफ आवाज़ उठाई। आरोप है कि तालिबान अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की और उनकी पिटाई भी की।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि कानून लागू करने के दौरान बल प्रयोग अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत केवल अत्यंत सीमित परिस्थितियों में ही वैध है। उन्होंने कहा, 'यह तभी जायज है जब यह कानूनी हो, जरूरी हो, आनुपातिक हो और सावधानी, गैर-भेदभाव तथा जवाबदेही जैसे सिद्धांतों का पालन करे।'
विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि तालिबान को — अफगानिस्तान में मौजूदा सत्ता के रूप में — उन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का पालन करना अनिवार्य है जिनका अफगानिस्तान पक्षकार है। इनमें नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय अनुबंध (ICCPR), यातना के खिलाफ संधि (CAT) और महिलाओं के खिलाफ सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन की संधि (CEDAW) शामिल हैं।
उन्होंने ड्रेस कोड उल्लंघन के आधार पर महिलाओं की हिरासत को 'अत्यंत चिंताजनक' और संभावित रूप से 'गैरकानूनी हिरासत' करार दिया, क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लैंगिक भेदभाव से मुक्त रहने के अधिकार का उल्लंघन है।
यूरोपीय संघ की कड़ी निंदा
यूरोपीय संघ (EU) ने भी हेरात की घटनाओं की कड़ी निंदा की। EU के विदेश मामलों के प्रवक्ता अनौअर अल अनौनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'हम हेरात में अत्यधिक बल प्रयोग और ड्रेस कोड निर्देशों के उल्लंघन के कारण महिलाओं की मनमानी गिरफ्तारी की निंदा करते हैं। मौजूदा प्रशासन को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का सम्मान करना चाहिए, जिसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार भी शामिल है। यूरोपीय संघ अफगान महिलाओं के साथ खड़ा है।'
व्यापक संदर्भ: तालिबान और महिला अधिकार
यह ऐसे समय में आया है जब 2021 में तालिबान के सत्ता में वापसी के बाद से अफगानिस्तान में महिलाओं पर प्रतिबंधों की श्रृंखला लगातार कड़ी होती रही है। लड़कियों की शिक्षा पर रोक, महिलाओं के काम करने पर पाबंदी और अब सार्वजनिक स्थानों पर सख्त ड्रेस कोड — ये सभी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना के केंद्र में रहे हैं। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान की स्थिति को 'लैंगिक रंगभेद' की संज्ञा दी है।
आगे क्या
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने तालिबान से माँग की है कि वे बल प्रयोग की घटनाओं की तत्काल, निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच कराएं तथा समानता, शांतिपूर्ण सभा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गैरकानूनी हिरासत से सुरक्षा जैसे अधिकारों की गारंटी सुनिश्चित करें। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने के बावजूद तालिबान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।