हेरात में 21 महिलाओं की ड्रेस कोड पर गिरफ्तारी 'अवैध और अस्वीकार्य': यूएन विशेष दूत रिचर्ड बेनेट
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मानवाधिकार विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने 9 जून 2026 को तालिबान प्रशासन की कड़ी आलोचना करते हुए हेरात प्रांत में ड्रेस कोड उल्लंघन के आरोप में महिलाओं और लड़कियों की हिरासत को 'पूरी तरह अवैध और अस्वीकार्य' करार दिया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम 21 महिलाओं और लड़कियों को कथित तौर पर निर्धारित इस्लामी पहनावे के नियमों का पालन न करने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। बेनेट ने तालिबान से इन गिरफ्तारियों को तत्काल रोकने और हिरासत में ली गई सभी महिलाओं को रिहा करने की माँग की है।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान के 'नैतिकता कानून' की निगरानी करने वाली पुलिस ने हेरात शहर के कई इलाकों में यह कार्रवाई की। गिरफ्तारियाँ साउदर्न रोड, अल्मास मार्केट और क़सर क्षेत्र में की गईं। रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि हिरासत में ली गई महिलाओं में हेरात क्षेत्रीय अस्पताल में कार्यरत एक नर्स भी शामिल है।
एएमयू टीवी के अनुसार, निर्देश में स्पष्ट किया गया था कि सार्वजनिक स्थानों पर बिना उचित पर्दे, चेहरा उघाड़े, तंग कपड़े पहनकर या मेकअप करके निकलने वाली महिलाओं को हिरासत में लेकर महिला निरोध केंद्र भेजा जा सकता है।
यूएन विशेष दूत की प्रतिक्रिया
रिचर्ड बेनेट ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'लगातार तीसरे दिन बड़ी संख्या में महिलाओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया जा रहा है, जो न केवल चिंताजनक है बल्कि पूरी तरह अस्वीकार्य और अवैध भी है। ऐसी कार्रवाइयों को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।' यह बयान लगातार तीन दिनों की गिरफ्तारियों के बाद आया, जो इस कार्रवाई की व्यापकता और सुनियोजित स्वरूप को दर्शाता है।
तालिबान का आदेश और पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम उस निर्देश के बाद सामने आया जिसे हेरात में तालिबान के 'सदाचार के प्रचार और बुराई की रोकथाम' विभाग ने जारी किया था। इस आदेश में पुरुष अभिभावकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि परिवार की महिलाएँ तालिबान द्वारा निर्धारित इस्लामी पहनावे के नियमों का पालन करें। गौरतलब है कि 2021 में सत्ता संभालने के बाद से तालिबान ने महिलाओं और लड़कियों पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं — इनमें माध्यमिक शिक्षा पर रोक, विश्वविद्यालयों में पढ़ाई से प्रतिबंध, रोज़गार के अवसरों में कमी और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर नियंत्रण शामिल हैं।
आम जनता और महिलाओं पर असर
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हाल की गिरफ्तारियों ने अफगान महिलाओं की स्वतंत्रता और मूलभूत अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को और गहरा कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक समुदाय अफगानिस्तान में मानवाधिकार स्थिति पर पहले से ही गहरी नज़र रखे हुए है। हिरासत में एक कार्यरत नर्स का होना यह भी संकेत देता है कि ये प्रतिबंध स्वास्थ्यकर्मियों सहित कामकाजी महिलाओं को भी प्रभावित कर रहे हैं।
क्या होगा आगे
बेनेट की माँग के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की संभावना है। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठन तालिबान प्रशासन से हिरासत में ली गई महिलाओं की रिहाई और ऐसे आदेशों को वापस लेने की अपील कर रहे हैं। हालाँकि, तालिबान प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।