21 अगस्त 2026
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क्वेटा में दो बलूच महिलाओं और उनके मासूम बच्चों को जबरन गायब करने का आरोप, मानवाधिकार संगठनों ने उठाई आवाज़

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क्वेटा में दो बलूच महिलाओं और उनके मासूम बच्चों को जबरन गायब करने का आरोप, मानवाधिकार संगठनों ने उठाई आवाज़

सारांश

क्वेटा के गशकोरी टाउन से दो बलूच महिलाओं और उनके मासूम बच्चों को कथित तौर पर CTD और FC जवानों ने जबरन उठाया — एक आठ साल की बच्ची और डेढ़ साल का शिशु भी लापता। बलूच मानवाधिकार संगठनों ने इसे बाल अधिकार सम्मेलन का गंभीर उल्लंघन बताते हुए तत्काल रिहाई की माँग की है।

मुख्य बातें

20 अगस्त 2026 को क्वेटा के गशकोरी टाउन से उमैरा बलूच (27) , नजमा बलूच (28) और उनके दो नाबालिग बच्चों को कथित तौर पर CTD और FC जवानों ने जबरन उठाया।
लापता बच्चों में आठ वर्षीया परीसा और डेढ़ साल का जाकिर शामिल हैं — घटना के बाद से चारों का कोई पता नहीं।
बलूच विमेंस फोरम (BWF) , बलूचिस्तान ह्यूमन राइट्स काउंसिल (HRCB) और बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) ने घटना की कड़ी निंदा की।
HRCB ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और बाल अधिकार सम्मेलन का गंभीर उल्लंघन बताया।
BYC नेता सबीहा बलूच ने एक्स पर लिखा — बच्चों का 'अपराध' केवल बलूच होना है।
पाकिस्तान सरकार या सुरक्षा बलों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा से 20 अगस्त 2026 को एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन की खबर सामने आई है। कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने गशकोरी टाउन से दो बलूच महिलाओं — उमैरा बलूच (27 वर्ष) और नजमा बलूच (28 वर्ष) — तथा उनके नाबालिग बच्चों को उनके घरों से जबरन उठा लिया। घटना के बाद से चारों का कोई अता-पता नहीं है, और कई प्रमुख बलूच मानवाधिकार संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है।

घटनाक्रम: कौन, कहाँ, कब

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, बुधवार को क्वेटा के गशकोरी टाउन में स्थित उनके आवासों से पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) और फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) के जवानों ने कथित तौर पर इन चारों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए व्यक्तियों में उमैरा बलूच की आठ वर्षीया बेटी परीसा और नजमा बलूच का डेढ़ साल का बेटा जाकिर भी शामिल हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहले से ही गहरी चिंता का विषय बने हुए हैं। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र की समितियाँ पाकिस्तान में इस तरह की घटनाओं पर कई बार अपनी चिंता दर्ज करा चुकी हैं।

मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया

बलूच विमेंस फोरम (BWF) ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों का इस तरह उठाया जाना केवल व्यक्तिगत अधिकारों का हनन नहीं, बल्कि कानून द्वारा प्रदत्त बुनियादी सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। फोरम ने डेढ़ साल के बच्चे जाकिर के कथित जबरन गायब किए जाने को विशेष रूप से भयावह करार दिया।

बलूचिस्तान ह्यूमन राइट्स काउंसिल (HRCB) ने भी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नाबालिगों को मनमाने ढंग से स्वतंत्रता से वंचित करना और उनका कथित जबरन गायब किया जाना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून तथा बाल अधिकार सम्मेलन के तहत गंभीर उल्लंघन है।

बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में इस तरह की कार्रवाई करने वाले सुरक्षा बल बिना किसी जवाबदेही के काम कर रहे हैं और यह कानून के शासन के प्रति पूर्ण अनादर को दर्शाता है।

सबीहा बलूच का बयान

बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की नेता सबीहा बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि आठ साल की बच्ची और डेढ़ साल के मासूम का क्या अपराध हो सकता है — उनका एकमात्र 'अपराध' बलूच होना है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य एजेंसियों द्वारा महिलाओं और बच्चों को जबरन गायब करना सामूहिक सजा का सबसे क्रूर रूप है।

माँगें और आगे की राह

HRCB ने पाकिस्तान सरकार से माँग की है कि उमैरा, नजमा, परीसा और जाकिर का तत्काल पता सार्वजनिक किया जाए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें बिना शर्त रिहा किया जाए। संगठनों ने यह भी अपील की है कि परिवारों को उनकी स्थिति की जानकारी दी जाए और उन्हें किसी भी प्रकार की यातना से सुरक्षित रखा जाए।

पाकिस्तान सरकार या सुरक्षा बलों की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आलोचकों का कहना है कि जवाबदेही की यही अनुपस्थिति बलूचिस्तान में दंडमुक्ति की संस्कृति को और गहरा करती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दर्दनाक श्रृंखला की नई कड़ी है जिसमें अब महिलाओं और शिशुओं तक को निशाना बनाया जा रहा है। डेढ़ साल के बच्चे की कथित हिरासत अंतरराष्ट्रीय कानून की हर सीमा को लाँघती है, फिर भी पाकिस्तान सरकार की चुप्पी बनी हुई है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन घटनाओं को 'क्षेत्रीय मुद्दा' बताकर सीमित कर देती है, जबकि यह वास्तव में राज्य-प्रायोजित दंडमुक्ति का सवाल है। जब तक स्वतंत्र जाँच और जवाबदेही का कोई ठोस तंत्र नहीं बनता, ये निंदाएँ महज बयानबाज़ी बनकर रह जाएँगी।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्वेटा में किन बलूच महिलाओं और बच्चों को जबरन गायब किया गया?
कथित तौर पर उमैरा बलूच (27) और उनकी आठ वर्षीया बेटी परीसा , तथा नजमा बलूच (28) और उनके डेढ़ साल के बेटे जाकिर को क्वेटा के गशकोरी टाउन से CTD और FC जवानों ने बुधवार को उठाया। घटना के बाद से चारों का कोई पता नहीं है।
इस घटना की निंदा किन संगठनों ने की?
बलूच विमेंस फोरम (BWF), बलूचिस्तान ह्यूमन राइट्स काउंसिल (HRCB), बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) और बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। सभी संगठनों ने पाकिस्तान सरकार से चारों की तत्काल रिहाई की माँग की है।
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह घटना क्यों गंभीर मानी जा रही है?
HRCB के अनुसार, नाबालिगों को बिना किसी पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया के हिरासत में लेना और जबरन गायब करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और संयुक्त राष्ट्र के बाल अधिकार सम्मेलन का सीधा उल्लंघन है। डेढ़ साल के शिशु की कथित हिरासत को विशेष रूप से भयावह बताया गया है।
पाकिस्तान सरकार ने इस मामले पर क्या कहा?
अभी तक पाकिस्तान सरकार, CTD या FC की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यही चुप्पी बलूचिस्तान में दंडमुक्ति की संस्कृति को दर्शाती है।
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी की समस्या कितनी पुरानी है?
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामले वर्षों से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की समितियाँ पाकिस्तान में इस तरह की घटनाओं पर कई बार अपनी चिंता दर्ज करा चुकी हैं। आलोचकों का कहना है कि अब महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया जाना इस संकट की गंभीरता को नए स्तर पर ले जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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