क्वेटा में दो बलूच महिलाओं और उनके मासूम बच्चों को जबरन गायब करने का आरोप, मानवाधिकार संगठनों ने उठाई आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा से 20 अगस्त 2026 को एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन की खबर सामने आई है। कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने गशकोरी टाउन से दो बलूच महिलाओं — उमैरा बलूच (27 वर्ष) और नजमा बलूच (28 वर्ष) — तथा उनके नाबालिग बच्चों को उनके घरों से जबरन उठा लिया। घटना के बाद से चारों का कोई अता-पता नहीं है, और कई प्रमुख बलूच मानवाधिकार संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है।
घटनाक्रम: कौन, कहाँ, कब
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, बुधवार को क्वेटा के गशकोरी टाउन में स्थित उनके आवासों से पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) और फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) के जवानों ने कथित तौर पर इन चारों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए व्यक्तियों में उमैरा बलूच की आठ वर्षीया बेटी परीसा और नजमा बलूच का डेढ़ साल का बेटा जाकिर भी शामिल हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहले से ही गहरी चिंता का विषय बने हुए हैं। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र की समितियाँ पाकिस्तान में इस तरह की घटनाओं पर कई बार अपनी चिंता दर्ज करा चुकी हैं।
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
बलूच विमेंस फोरम (BWF) ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों का इस तरह उठाया जाना केवल व्यक्तिगत अधिकारों का हनन नहीं, बल्कि कानून द्वारा प्रदत्त बुनियादी सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। फोरम ने डेढ़ साल के बच्चे जाकिर के कथित जबरन गायब किए जाने को विशेष रूप से भयावह करार दिया।
बलूचिस्तान ह्यूमन राइट्स काउंसिल (HRCB) ने भी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नाबालिगों को मनमाने ढंग से स्वतंत्रता से वंचित करना और उनका कथित जबरन गायब किया जाना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून तथा बाल अधिकार सम्मेलन के तहत गंभीर उल्लंघन है।
बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में इस तरह की कार्रवाई करने वाले सुरक्षा बल बिना किसी जवाबदेही के काम कर रहे हैं और यह कानून के शासन के प्रति पूर्ण अनादर को दर्शाता है।
सबीहा बलूच का बयान
बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की नेता सबीहा बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि आठ साल की बच्ची और डेढ़ साल के मासूम का क्या अपराध हो सकता है — उनका एकमात्र 'अपराध' बलूच होना है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य एजेंसियों द्वारा महिलाओं और बच्चों को जबरन गायब करना सामूहिक सजा का सबसे क्रूर रूप है।
माँगें और आगे की राह
HRCB ने पाकिस्तान सरकार से माँग की है कि उमैरा, नजमा, परीसा और जाकिर का तत्काल पता सार्वजनिक किया जाए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें बिना शर्त रिहा किया जाए। संगठनों ने यह भी अपील की है कि परिवारों को उनकी स्थिति की जानकारी दी जाए और उन्हें किसी भी प्रकार की यातना से सुरक्षित रखा जाए।
पाकिस्तान सरकार या सुरक्षा बलों की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आलोचकों का कहना है कि जवाबदेही की यही अनुपस्थिति बलूचिस्तान में दंडमुक्ति की संस्कृति को और गहरा करती जा रही है।