अफगानिस्तान में हर घंटे एक माँ की मौत: WHO ने बताया मातृ मृत्यु दर 521 प्रति लाख, महिला स्वास्थ्यकर्मियों की कमी गहरा रही संकट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अफगानिस्तान में हर घंटे एक माँ की मौत: WHO ने बताया मातृ मृत्यु दर 521 प्रति लाख, महिला स्वास्थ्यकर्मियों की कमी गहरा रही संकट

सारांश

अफगानिस्तान में हर घंटे एक माँ की मौत — और यह आँकड़ा सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि महिलाओं पर लगाई गई पाबंदियों का प्रत्यक्ष परिणाम है। WHO और UNICEF के ताज़ा आँकड़े बताते हैं कि महिला स्वास्थ्यकर्मियों और शिक्षकों की घटती संख्या एक ऐसे दुष्चक्र को जन्म दे रही है जिसकी सबसे बड़ी कीमत माताएँ और बच्चे चुका रहे हैं।

मुख्य बातें

WHO के अनुसार अफगानिस्तान में मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 521 है — दुनिया में सर्वाधिक में से एक।
हर घंटे एक माँ की मौत रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, संक्रमण या प्रसव अवरोध जैसे रोके जा सकने वाले कारणों से होती है।
प्रसव-पूर्व जाँच 31% से बढ़कर 76% और प्रशिक्षित देखरेख में प्रसव 24% से 67% हुए, फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में खतरा बरकरार।
UNICEF की रिपोर्ट: 2023-2025 के बीच सरकारी नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 21% से घटकर 17.7% हुई।
2030 तक लगभग 20,000 महिला शिक्षक और 5,400 स्वास्थ्यकर्मी कम होने की आशंका।
महिलाओं की शिक्षा व रोज़गार पर पाबंदी से अफगानिस्तान को सालाना करीब 8.4 करोड़ डॉलर का आर्थिक नुकसान।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान में हर घंटे एक माँ की मौत उन जटिलताओं से हो रही है जिन्हें रोका जा सकता था — यह स्थिति देश की टूटती स्वास्थ्य व्यवस्था और महिलाओं पर लगाई गई पाबंदियों का सीधा परिणाम है। 6 मई 2026 को 'अंतर्राष्ट्रीय दाई दिवस' (International Day of Midwifery) के अवसर पर जारी बयान में WHO ने बताया कि अफगानिस्तान की मातृ मृत्यु दर दुनिया में सर्वाधिक में से एक है — प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 521 मौतें

मातृ मृत्यु के प्रमुख कारण

WHO के अनुसार, इनमें से अधिकांश मौतें उन कारणों से होती हैं जिनका उपचार या बचाव पूरी तरह संभव है — जैसे अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, संक्रमण और प्रसव में अवरोध। जो महिलाएं इन जटिलताओं से बच भी जाती हैं, उन्हें अक्सर दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

एक विशेष रूप से गंभीर समस्या 'ऑब्स्टेट्रिक फिस्टुला' है, जो लंबे समय तक प्रसव में रुकावट रहने पर उत्पन्न होती है। इससे महिलाओं को शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ गहरी सामाजिक शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ती है। WHO के मुताबिक यह समस्या अक्सर सामने नहीं आ पाती, क्योंकि कई महिलाओं को उचित उपचार की सुविधा नहीं मिलती या उन्हें यह पता ही नहीं होता कि इसका इलाज संभव है।

दो दशकों में सुधार, लेकिन खाई अभी भी गहरी

WHO के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2000 के बाद से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में कुछ सकारात्मक बदलाव ज़रूर आए हैं। प्रसव-पूर्व जाँच (एंटीनैटल केयर) कराने वाली महिलाओं का अनुपात 31 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हो गया है, और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में होने वाले प्रसव 24 प्रतिशत से बढ़कर 67 प्रतिशत पहुँच गए हैं। बाल मृत्यु दर भी 2000 में प्रति 1,000 जन्मों पर 129 से घटकर 2023 में 56 रह गई है।

गौरतलब है कि ये सुधार मुख्यतः शहरी क्षेत्रों तक सीमित हैं। ग्रामीण और दूरदराज़ के इलाकों में रहने वाली महिलाओं के लिए जोखिम अब भी कहीं अधिक बना हुआ है। WHO इस स्थिति को सुधारने के लिए इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक के साथ मिलकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देने का प्रयास कर रहा है।

महिला कर्मचारियों की घटती भागीदारी

यूनिसेफ (UNICEF) ने भी इस संकट पर गंभीर चेतावनी दी है। संस्था की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच सरकारी नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत से घटकर 17.7 प्रतिशत रह गई है। यह गिरावट लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं के कार्यस्थल पर लगाई गई पाबंदियों का सीधा परिणाम बताई जा रही है।

UNICEF ने आगाह किया है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो 2030 तक अफगानिस्तान में लगभग 20,000 महिला शिक्षक और 5,400 महिला स्वास्थ्यकर्मी कम हो सकते हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में यह कमी विशेष रूप से गंभीर होगी, क्योंकि अफगान समाज के कई हिस्सों में महिलाएं पुरुष चिकित्सकों से उपचार कराने में सहज नहीं होतीं।

आर्थिक नुकसान और बच्चों का भविष्य

UNICEF की रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा तथा रोज़गार पर लगी रोक के कारण अफगानिस्तान को प्रतिवर्ष लगभग 8.4 करोड़ डॉलर (करीब ₹700 करोड़) का आर्थिक नुकसान हो रहा है, और संस्था के अनुसार समय के साथ यह नुकसान और बढ़ता जाएगा। संस्था ने स्पष्ट किया कि यदि महिलाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अनिवार्य क्षेत्रों से बाहर किया जाता रहा, तो इसका सबसे गहरा असर बच्चों पर पड़ेगा — कम लड़कियाँ स्कूल जाएंगी और माताओं, नवजात शिशुओं तथा बच्चों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएँ और सिकुड़ती जाएंगी।

यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफगानिस्तान में मानवीय सहायता की निरंतरता को लेकर पहले से ही चिंतित है। आने वाले महीनों में WHO और UNICEF दोनों की नज़र इस बात पर होगी कि तालिबान प्रशासन स्वास्थ्य एवं शिक्षा क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी के मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह अब उन्हीं महिला स्वास्थ्यकर्मियों की बदौलत था जिन्हें आज काम से रोका जा रहा है। 2030 तक 5,400 महिला स्वास्थ्यकर्मियों की संभावित कमी का अर्थ है कि मातृ मृत्यु दर में गिरावट की जो धीमी लेकिन वास्तविक प्रगति हुई थी, वह पलट सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह एक कठिन सवाल है — क्या मानवीय सहायता उस व्यवस्था को टिकाए रख सकती है जो खुद अपनी नींव खोद रही है?
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अफगानिस्तान में मातृ मृत्यु दर कितनी है?
WHO के अनुसार अफगानिस्तान में मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 521 है, जो दुनिया में सर्वाधिक में से एक है। हर घंटे एक माँ की मौत उन जटिलताओं से होती है जिन्हें रोका जा सकता था, जैसे अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण और प्रसव अवरोध।
ऑब्स्टेट्रिक फिस्टुला क्या है और यह अफगानिस्तान में इतनी बड़ी समस्या क्यों है?
ऑब्स्टेट्रिक फिस्टुला एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है जो लंबे समय तक प्रसव में रुकावट रहने से उत्पन्न होती है और महिलाओं को शारीरिक व सामाजिक दोनों तरह की पीड़ा देती है। अफगानिस्तान में यह समस्या इसलिए और गंभीर है क्योंकि कई महिलाओं को उचित उपचार की सुविधा नहीं मिलती और उन्हें यह भी नहीं पता होता कि इसका इलाज संभव है।
UNICEF ने 2030 तक अफगानिस्तान में किस संकट की चेतावनी दी है?
UNICEF के अनुसार अगर मौजूदा हालात जारी रहे तो 2030 तक अफगानिस्तान में करीब 20,000 महिला शिक्षक और 5,400 महिला स्वास्थ्यकर्मी कम हो सकते हैं। यह कमी लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं के रोज़गार पर लगाई गई पाबंदियों का परिणाम है।
महिलाओं पर पाबंदियों से अफगानिस्तान को आर्थिक नुकसान कितना है?
UNICEF की रिपोर्ट के अनुसार लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा व रोज़गार पर रोक के कारण अफगानिस्तान को प्रतिवर्ष लगभग 8.4 करोड़ डॉलर (करीब ₹700 करोड़) का आर्थिक नुकसान हो रहा है। संस्था ने चेतावनी दी है कि समय के साथ यह नुकसान और बढ़ेगा।
अफगानिस्तान में महिला स्वास्थ्यकर्मियों की कमी का बच्चों पर क्या असर होगा?
UNICEF के अनुसार महिला स्वास्थ्यकर्मियों की घटती संख्या का सबसे गहरा असर माताओं, नवजात शिशुओं और बच्चों पर पड़ेगा, क्योंकि अफगान समाज के कई हिस्सों में महिलाएं पुरुष चिकित्सकों से उपचार कराने में सहज नहीं होतीं। इससे महिलाओं और बच्चों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएँ और सिकुड़ती जाएंगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले