10 अक्टूबर 2026
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यूएन सुरक्षा परिषद आपात बैठक: सिबिहा बोले — रूस एक हफ्ते में 100 नागरिकों की जान ले चुका, ऊर्जा ढाँचे पर हमले जारी

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यूएन सुरक्षा परिषद आपात बैठक: सिबिहा बोले — रूस एक हफ्ते में 100 नागरिकों की जान ले चुका, ऊर्जा ढाँचे पर हमले जारी

सारांश

यूक्रेन के विदेश मंत्री सिबिहा ने यूएन सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में रूस पर एक हफ्ते में 100 नागरिकों की हत्या और ऊर्जा ढाँचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया। सर्दियों से ठीक पहले यूक्रेन को अंधेरे में धकेलने की यह रणनीति — और बेलारूस की कथित भूमिका — वैश्विक दबाव की माँग को और तीखा कर रही है।

मुख्य बातें

यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने 10 अक्टूबर 2026 को यूएन सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में रूस पर सीधे आरोप लगाए।
रूसी हमलों में सिर्फ एक सप्ताह में लगभग 100 नागरिकों की मौत; प्रभावित शहरों में क्रामाटोर्स्क, प्रिलुकी और कीव शामिल।
रूस पर आरोप — सर्दियों से पहले यूक्रेन के ऊर्जा ढाँचे को जानबूझकर नष्ट कर नागरिकों को ठंड और अंधेरे में धकेलने की कोशिश।
बेलारूस पर आरोप — रूस को ड्रोन हमलों के लिए अपना बुनियादी ढाँचा उपलब्ध कराने का; मिन्स्क से तत्काल रोक की माँग।
काला सागर में जहाज़रानी पर हमलों से वैश्विक खाद्य सुरक्षा को खतरा।
सिबिहा ने चेताया — रूस पर प्रतिबंध कमज़ोर करना मॉस्को को गलत संदेश देगा और युद्ध को लंबा खींचेगा।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2026 को बुलाई गई आपात बैठक में यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने आरोप लगाया कि रूस के विनाशकारी हमलों में केवल एक सप्ताह के भीतर लगभग 100 नागरिकों की मौत हो चुकी है और रूस जानबूझकर यूक्रेन के ऊर्जा ढाँचे को निशाना बना रहा है। यह आपात बैठक 7-8 अक्टूबर को हुए बड़े रूसी हमलों के बाद यूक्रेन के अनुरोध पर बुलाई गई थी।

बैठक का संदर्भ और पृष्ठभूमि

यूक्रेन ने 7 और 8 अक्टूबर 2026 को हुए भीषण रूसी हमलों के बाद तत्काल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक की माँग की। इन हमलों में क्रामाटोर्स्क, प्रिलुकी और राजधानी कीव जैसे शहरों में नागरिक हताहत हुए। सिबिहा ने परिषद के सदस्य देशों को बताया कि यह हमले युद्ध के मोर्चे तक सीमित नहीं, बल्कि आम आबादी और नागरिक बुनियादी ढाँचे को जानबूझकर निशाना बनाने का प्रयास हैं।

ऊर्जा ढाँचे पर हमले — ठंड और अंधेरे की रणनीति

विदेश मंत्री सिबिहा ने आरोप लगाया कि रूस सर्दियों के आने से पहले यूक्रेनी जनता को ठंड और अंधेरे में धकेलने की मंशा से ऊर्जा प्रणाली को बार-बार निशाना बना रहा है। उनके अनुसार, कब्जे वाले शहर ओलेश्की में लोग भोजन, पीने के पानी और दवाओं जैसी बुनियादी ज़रूरतों से भी महरूम हैं। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप में सर्दी की शुरुआत होने वाली है और ऊर्जा आपूर्ति की बाधा लाखों नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल सकती है।

बेलारूस की कथित भूमिका पर चेतावनी

सिबिहा ने आरोप लगाया कि बेलारूस एक बार फिर रूस को अपने बुनियादी ढाँचे का उपयोग करने दे रहा है, जिसके ज़रिये यूक्रेन के शहरों पर ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने माँग की कि बेलारूस की राजधानी मिन्स्क तत्काल रूस के कथित युद्ध अपराधों में अपनी भूमिका समाप्त करे और इस तरह के ढाँचे के उपयोग पर रोक लगाए। गौरतलब है कि बेलारूस पर इससे पहले भी रूसी सैन्य अभियान को सुविधा देने के आरोप लग चुके हैं।

वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर असर

सिबिहा ने यह भी रेखांकित किया कि काला सागर में जहाज़रानी पर रूसी हमलों से वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। यूक्रेन दुनिया के प्रमुख अनाज निर्यातकों में से एक है और बंदरगाहों पर हमले वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकते हैं — विशेषकर एशिया और अफ्रीका के उन देशों में जो यूक्रेनी गेहूँ पर निर्भर हैं।

सुरक्षा परिषद से अपील और आगे की राह

सिबिहा ने सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों से रूस की आक्रामकता रोकने, नागरिकों की रक्षा करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप स्थायी शांति स्थापित करने हेतु ठोस कदम उठाने की अपील की। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को कमज़ोर करने वाला कोई भी फैसला मॉस्को को गलत संदेश देगा और युद्ध को और लंबा खींचेगा। उनके अनुसार, ऐसे कदम दूरदृष्टि की कमी वाले हैं जो समस्या का समाधान करने के बजाय उसे और गंभीर बना सकते हैं। आने वाले दिनों में सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर और चर्चा अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सुरक्षा परिषद हर बार रूस की वीटो शक्ति की दीवार से टकराती रही है। असली सवाल यह है कि क्या इस बार पश्चिमी देश प्रतिबंधों को और धारदार बनाएँगे या केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहेंगे। बेलारूस पर लगाए गए आरोप — यदि सत्यापित हों — तो यह संघर्ष को और व्यापक भौगोलिक आयाम देते हैं। काला सागर में जहाज़रानी पर हमले दर्शाते हैं कि यह युद्ध अब केवल यूरोप का संकट नहीं, बल्कि वैश्विक खाद्य और ऊर्जा व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बन चुका है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएन सुरक्षा परिषद की यह आपात बैठक क्यों बुलाई गई?
यह बैठक 7-8 अक्टूबर 2026 को रूस द्वारा किए गए बड़े हमलों के बाद यूक्रेन के अनुरोध पर बुलाई गई। इन हमलों में क्रामाटोर्स्क, प्रिलुकी और कीव सहित कई शहरों में नागरिक हताहत हुए और ऊर्जा ढाँचे को नुकसान पहुँचा।
सिबिहा ने रूस पर क्या आरोप लगाए?
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने आरोप लगाया कि रूस जानबूझकर यूक्रेन के ऊर्जा ढाँचे को निशाना बना रहा है ताकि सर्दियों से पहले यूक्रेनी जनता को ठंड और अंधेरे में धकेला जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि एक सप्ताह में लगभग 100 नागरिकों की मौत हुई है।
बेलारूस की इस संघर्ष में क्या कथित भूमिका है?
सिबिहा ने आरोप लगाया कि बेलारूस रूस को अपने बुनियादी ढाँचे का उपयोग करने दे रहा है, जिससे यूक्रेन के शहरों पर ड्रोन हमले जारी रखे जा रहे हैं। उन्होंने मिन्स्क से तत्काल यह सुविधा रोकने की माँग की।
यूक्रेन युद्ध का वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर क्या असर पड़ रहा है?
सिबिहा के अनुसार काला सागर में जहाज़रानी पर रूसी हमलों से वैश्विक खाद्य सुरक्षा को गंभीर खतरा है। यूक्रेन प्रमुख अनाज निर्यातक है और बंदरगाहों पर हमले एशिया व अफ्रीका के उन देशों को प्रभावित कर सकते हैं जो यूक्रेनी गेहूँ पर निर्भर हैं।
यूक्रेन ने सुरक्षा परिषद से क्या माँग की है?
यूक्रेन ने सदस्य देशों से रूस की आक्रामकता रोकने, नागरिकों की रक्षा करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप स्थायी शांति के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। सिबिहा ने चेताया कि रूस पर प्रतिबंध कमज़ोर करना मॉस्को को गलत संदेश देगा।
राष्ट्र प्रेस
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