30 सितंबर 2026
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यूएन सेक्रेटरी-जनरल दौड़: रेबेका ग्रिनस्पैन की बढ़त मजबूत, P5 सदस्यों के हाथ में फैसला

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यूएन सेक्रेटरी-जनरल दौड़: रेबेका ग्रिनस्पैन की बढ़त मजबूत, P5 सदस्यों के हाथ में फैसला

सारांश

यूएन सेक्रेटरी-जनरल की दौड़ में रेबेका ग्रिनस्पैन चौथे स्ट्रॉ पोल में 10 सकारात्मक वोटों के साथ आगे हैं, लेकिन असली खेल P5 सदस्यों के हाथ में है। रूस के संकेत और 80 साल में पहली महिला नेतृत्व की माँग इस दौड़ को और पेचीदा बना रहे हैं — और परिषद के पास वक्त सिर्फ तीन महीने है।

मुख्य बातें

रेबेका ग्रिनस्पैन (यूएनसीटीएडी प्रमुख) को चौथे स्ट्रॉ पोल में 10 सकारात्मक, 3 नकारात्मक और 2 तटस्थ वोट मिले — पिछले पोल से एक अधिक।
कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट (गुयाना) 8 सकारात्मक वोटों के साथ दूसरे स्थान पर बनी रहीं।
IAEA महानिदेशक राफेल ग्रॉसी तीसरे, ओलारा ओतुन्नू चौथे स्थान पर रहे।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संकेत दिया कि मॉस्को मौजूदा उम्मीदवारों से संतुष्ट नहीं है।
1 जनवरी तक नया सेक्रेटरी-जनरल तय न होने पर यूएन संचालन की जिम्मेदारी अनिश्चित हो जाएगी।
80 वर्षों में पहली बार किसी महिला और 35 वर्षों बाद किसी लैटिन अमेरिकी को यह पद मिलने की संभावना चर्चा में है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों के बीच हुए चौथे अनौपचारिक 'स्ट्रॉ पोल' में यूएनसीटीएडी की प्रमुख रेबेका ग्रिनस्पैन ने संयुक्त राष्ट्र के अगले सेक्रेटरी-जनरल की दौड़ में अपनी बढ़त और पक्की कर ली है। 30 सितंबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, इस गुप्त प्रक्रिया पर नज़र रखने वाले सूत्रों ने बताया कि ग्रिनस्पैन को 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में 10 सकारात्मक, 3 नकारात्मक और 2 तटस्थ वोट मिले — जो पिछले पोल की तुलना में एक अतिरिक्त सकारात्मक वोट है।

मुख्य घटनाक्रम

इस महीने सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष और फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि जेरोम बोनाफोंट ने पुष्टि की कि पोल संपन्न हो चुका है, लेकिन उन्होंने तय प्रक्रिया के तहत नतीजे सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। हालांकि, नतीजे लीक हो गए और निष्पक्ष चुनाव के लिए अभियान चलाने वाले समूह '1 फॉर 8 बिलियन' (1F8B) तथा यूएन मीडिया साइट 'पास ब्लू' के आँकड़ों से यह जानकारी सामने आई।

गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट, जो एक पूर्व पोल में शीर्ष पर थीं, चौथे पोल में भी दूसरे स्थान पर बनी रहीं। उन्हें तीसरे पोल जितने ही 8 सकारात्मक, 6 नकारात्मक और 1 तटस्थ वोट मिले।

उम्मीदवारों की स्थिति

सात उम्मीदवारों में अर्जेंटीना के अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी तीसरे स्थान पर रहे। उनके बाद यूएन के पूर्व अंडर-सेक्रेटरी-जनरल और युगांडा के पूर्व विदेश मंत्री ओलारा ओतुन्नू चौथे स्थान पर रहे।

सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी साल — जिन्हें कथित तौर पर अपने देश का समर्थन हासिल नहीं है — पाँचवें स्थान पर रहे। जनरल असेंबली की पूर्व अध्यक्ष और इक्वाडोर की विदेश मंत्री मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा तथा अमेरिका और फ्रांस में इक्वाडोर की पूर्व राजदूत इवोन ए-बाकी क्रमशः छठे और सातवें स्थान पर रहीं।

P5 सदस्यों की भूमिका निर्णायक

वीटो शक्ति वाले पाँच स्थायी सदस्यों — अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस — का रुख अंततः निर्णायक होगा। यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किस स्थायी सदस्य ने किसे नकारात्मक वोट दिया।

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पिछले सप्ताह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संकेत दिया कि मॉस्को को मौजूदा उम्मीदवार उपयुक्त नहीं लगे और अन्य उम्मीदवार भी सामने आ सकते हैं। गौरतलब है कि बोनाफोंट ने बताया कि इस पोल में रंग-कोड वाले मतपत्रों का उपयोग नहीं किया गया, जो स्ट्रॉ पोलिंग के उन्नत चरण में स्थायी सदस्यों के मतों की अलग पहचान के लिए प्रयुक्त होते हैं।

लैटिन अमेरिका और महिला नेतृत्व की माँग

सभी सात उम्मीदवारों ने पिछले सप्ताह जनरल असेंबली के उच्च-स्तरीय सप्ताह के दौरान जमकर लॉबिंग की। इस दौरान इस बात पर विशेष ज़ोर दिया गया कि यूएन की कमान किसी महिला को सौंपी जाए, क्योंकि पिछले 80 वर्षों से इस पद पर केवल पुरुष ही रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब 1991 में जेवियर पेरेज डी कुएलर के पद छोड़ने के बाद से 35 वर्षों तक इस पद पर कोई लैटिन अमेरिकी नहीं रहा है। कैरिबियन समेत इस महाद्वीप के कई देशों का कहना है कि अब उनकी बारी है — एक तर्क जो ग्रिनस्पैन और रोड्रिग्स-बिर्केट, दोनों के पक्ष में जाता है।

क्या होगा आगे

सुरक्षा परिषद के पास उम्मीदवार चुनने के लिए केवल तीन महीने बचे हैं। यूएन चार्टर के तहत परिषद उम्मीदवार को जनरल असेंबली के अनुमोदन के लिए भेजती है — जो अब तक एक औपचारिकता ही रही है।

मौजूदा सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 जनवरी को कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे एक दिन भी अतिरिक्त पद पर नहीं रहेंगे। यदि समय पर सहमति नहीं बनी, तो परिषद को यह तय करना होगा कि नए नेतृत्व पर सहमति बनने तक यूएन का संचालन कौन करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब रंग-कोड वाले मतपत्र स्थायी सदस्यों के वोट उजागर करेंगे। लावरोव के बयान से स्पष्ट है कि रूस अपनी वीटो शक्ति का उपयोग किसी वैकल्पिक उम्मीदवार को आगे लाने के लिए कर सकता है — ठीक वैसे ही जैसा 2006 में हुआ था। यह दौड़ महज एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि यूएन की दिशा और भू-राजनीतिक संतुलन की भी परीक्षा है। मुख्यधारा की कवरेज जो नज़रअंदाज़ कर रही है वह यह है कि तीन महीने की समय-सीमा और गुटेरेस की 'एक दिन भी नहीं' वाली घोषणा मिलकर P5 पर असाधारण दबाव बना रही है — और यदि सहमति नहीं बनी, तो यूएन एक अभूतपूर्व नेतृत्व शून्य में प्रवेश कर सकता है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएन सेक्रेटरी-जनरल की दौड़ में रेबेका ग्रिनस्पैन कौन हैं?
रेबेका ग्रिनस्पैन कोस्टा रिका की नागरिक और यूएनसीटीएडी (व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन) की वर्तमान प्रमुख हैं। वे अगले यूएन सेक्रेटरी-जनरल की दौड़ में सबसे आगे चल रही उम्मीदवार हैं, जिन्हें चौथे स्ट्रॉ पोल में 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में 10 सकारात्मक वोट मिले हैं।
यूएन सेक्रेटरी-जनरल का चुनाव कैसे होता है?
यूएन चार्टर के तहत सुरक्षा परिषद उम्मीदवार का चयन करती है और उसे जनरल असेंबली के अनुमोदन के लिए भेजती है। वीटो शक्ति वाले पाँच स्थायी सदस्यों — अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस — की सहमति अनिवार्य है। जनरल असेंबली ने अब तक हमेशा परिषद के नामांकन को मंजूरी दी है।
क्या कोई महिला पहली बार यूएन सेक्रेटरी-जनरल बन सकती है?
हाँ, यदि ग्रिनस्पैन या रोड्रिग्स-बिर्केट चुनी जाती हैं, तो वे संयुक्त राष्ट्र के 80 वर्षों के इतिहास में पहली महिला सेक्रेटरी-जनरल होंगी। जनरल असेंबली के उच्च-स्तरीय सप्ताह के दौरान इस माँग को व्यापक समर्थन मिला।
रूस का इस दौड़ में क्या रुख है?
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संकेत दिया है कि मॉस्को मौजूदा उम्मीदवारों को उपयुक्त नहीं मानता और अन्य उम्मीदवार भी सामने आ सकते हैं। चूँकि रूस वीटो शक्ति वाला स्थायी सदस्य है, उसका नकारात्मक मत किसी भी उम्मीदवार की दावेदारी समाप्त कर सकता है।
यदि 1 जनवरी तक नया सेक्रेटरी-जनरल नहीं चुना गया तो क्या होगा?
मौजूदा सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 जनवरी को कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे एक दिन भी अतिरिक्त पद पर नहीं रहेंगे। ऐसी स्थिति में सुरक्षा परिषद को यह तय करना होगा कि सहमति बनने तक यूएन का कार्यभार कौन संभालेगा।
राष्ट्र प्रेस
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