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रेबेका ग्रिन्सपैन बन सकती हैं यूएन की पहली महिला महासचिव, सुरक्षा परिषद स्ट्रॉ पोल में मिले 10 वोट

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रेबेका ग्रिन्सपैन बन सकती हैं यूएन की पहली महिला महासचिव, सुरक्षा परिषद स्ट्रॉ पोल में मिले 10 वोट

सारांश

कोस्टा रिका की राजनयिक रेबेका ग्रिन्सपैन यूएन महासचिव की दौड़ में सबसे आगे हैं — सुरक्षा परिषद के स्ट्रॉ पोल में 15 में से 10 वोट मिले। चुनी गईं तो वे यूएन की पहली महिला और पहली यहूदी महासचिव होंगी। असली दांव अब वीटो-धारक देशों पर टिका है।

मुख्य बातें

रेबेका ग्रिन्सपैन (कोस्टा रिका) सुरक्षा परिषद के शुरुआती स्ट्रॉ पोल में 10 समर्थन, 4 तटस्थ, 1 विरोध के साथ सबसे आगे हैं।
चुनी गईं तो वे यूएन की पहली महिला महासचिव और पहली यहूदी महासचिव होंगी।
वर्तमान महासचिव अंतोनियो गुटेरेस का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा।
प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कैरोलिन रोड्रिग्स-बर्केट (गुयाना) को 9 समर्थन मिले; मिशेल बाचेलेट (चिली) को कथित अमेरिकी विरोध का सामना।
स्थायी सदस्यों का वीटो निर्णायक होगा; अंतिम चयन 2026 के अंत तक अपेक्षित।
ग्रिन्सपैन के नेतृत्व में यूएनसीटीएडी ने 2000–2024 के बीच फिलिस्तीनी अर्थव्यवस्था को $212.2 अरब के नुकसान की रिपोर्ट दी।

कोस्टा रिका की वरिष्ठ राजनयिक और पूर्व उपराष्ट्रपति रेबेका ग्रिन्सपैन संयुक्त राष्ट्र (UN) की अगली महासचिव बनने की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरी हैं। यदि वे इस पद पर चुनी जाती हैं, तो वे संयुक्त राष्ट्र के 79 वर्षों के इतिहास में पहली महिला महासचिव होंगी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के शुरुआती गोपनीय 'स्ट्रॉ पोल' में उन्हें 15 में से 10 समर्थन मिले हैं।

स्ट्रॉ पोल में ग्रिन्सपैन की बढ़त

सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों के बीच हुए प्रारंभिक गोपनीय मतदान में ग्रिन्सपैन को 10 समर्थन, 4 तटस्थ और केवल 1 विरोध मिला। उनकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी, गुयाना की पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजदूत कैरोलिन रोड्रिग्स-बर्केट, को 9 समर्थन, 4 तटस्थ और 2 विरोधी वोट मिले। दौड़ में चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बाचेलेट का नाम भी शामिल है, हालांकि उन्हें कथित तौर पर अमेरिका के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार अंतिम परिणाम अभी अनिश्चित है। द गार्डियन ने एक पश्चिमी राजनयिक के हवाले से बताया कि निर्णायक प्रश्न यह होगा कि विरोध के वोट सुरक्षा परिषद के किन स्थायी सदस्यों — अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन या फ्रांस — से आते हैं। यदि कोई भी स्थायी सदस्य किसी उम्मीदवार का विरोध करता है, तो वीटो की संभावना पूरी प्रक्रिया को गतिरोध में डाल सकती है।

क्षेत्रीय व्यवस्था और लैटिन अमेरिका की बारी

संयुक्त राष्ट्र में दशकों से चली आ रही अनौपचारिक क्षेत्रीय रोटेशन व्यवस्था के तहत इस बार लैटिन अमेरिका से महासचिव आने की उम्मीद है। वर्तमान महासचिव अंतोनियो गुटेरेस का दूसरा कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। नए महासचिव का चयन 2026 के अंत तक किए जाने का लक्ष्य है।

ग्रिन्सपैन की पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक महत्व

ग्रिन्सपैन वर्तमान में यूएनसीटीएडी (UNCTAD) की महासचिव के पद पर कार्यरत हैं। उनके माता-पिता द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड से मध्य अमेरिका पहुँचे थे, और उनके नाना-नानी में से एक जोड़े की नाज़ी शासन के दौरान हत्या कर दी गई थी। यदि वे चुनी जाती हैं, तो वे संयुक्त राष्ट्र की पहली यहूदी महासचिव भी होंगी।

महासभा में एक संबोधन में उन्होंने कहा था कि उनके माता-पिता द्वितीय विश्व युद्ध के शरणार्थी थे और कोस्टा रिका में उन्हें सम्मान और गरिमा के साथ जीवन मिला। उनके अनुसार, वे इस बात का उदाहरण हैं कि शांति क्या संभव बना सकती है। उनकी बहन किशोरावस्था में इजरायल चली गई थीं, जहाँ उन्होंने हिब्रू यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की, और उनके भांजे-भांजी ने इजरायल की अनिवार्य सैन्य सेवा भी पूरी की है।

फिलिस्तीन मुद्दे पर यूएनसीटीएडी की रिपोर्ट

गाजा युद्ध और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के बीच ग्रिन्सपैन के नेतृत्व में यूएनसीटीएडी ने इजरायल के कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर आर्थिक प्रभाव का विस्तृत आकलन प्रकाशित किया है। फरवरी 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2000 से 2024 के बीच फिलिस्तीनी अर्थव्यवस्था को अनुमानित $212.2 अरब का नुकसान हुआ, जिसे कब्जे की नीतियों, प्रतिबंधों और बार-बार होने वाले सैन्य अभियानों से जोड़ा गया। यह आकलन उनकी निष्पक्षता और पेशेवर साख दोनों को रेखांकित करता है।

चयन प्रक्रिया और आगे की राह

महासचिव के चयन में पहले सुरक्षा परिषद किसी उम्मीदवार की सिफारिश करती है, जिसके बाद 193 सदस्यीय महासभा उसका अनुमोदन करती है। सुरक्षा परिषद में उम्मीदवार को कम से कम 9 वोट और किसी भी स्थायी सदस्य का वीटो न मिलना अनिवार्य है। आगे और दौर की चर्चा और मतदान होने हैं। यह ऐतिहासिक चुनाव तय करेगा कि क्या संयुक्त राष्ट्र अपने अस्तित्व के आठवें दशक में पहली बार किसी महिला के नेतृत्व में काम करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

पहली यहूदी, और लैटिन अमेरिका से पहली महासचिव — लेकिन स्ट्रॉ पोल की बढ़त को असली जीत मानना जल्दबाज़ी होगी। संयुक्त राष्ट्र का इतिहास बताता है कि प्रारंभिक मतदान में आगे रहने वाले उम्मीदवार भी वीटो की एक चाल से दौड़ से बाहर हो सकते हैं। गाजा संघर्ष के बीच उनका यहूदी पारिवारिक इतिहास और यूएनसीटीएडी की फिलिस्तीन-केंद्रित आर्थिक रिपोर्ट — दोनों एक साथ उनकी ताकत और संभावित विवाद का स्रोत हैं। असली परीक्षा यह है कि वाशिंगटन, मॉस्को और बीजिंग तीनों एक साथ उन्हें स्वीकार कर सकते हैं या नहीं।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेबेका ग्रिन्सपैन कौन हैं और यूएन महासचिव पद की दौड़ में क्यों आगे हैं?
रेबेका ग्रिन्सपैन कोस्टा रिका की वरिष्ठ राजनयिक, पूर्व उपराष्ट्रपति और वर्तमान में यूएनसीटीएडी की महासचिव हैं। सुरक्षा परिषद के शुरुआती स्ट्रॉ पोल में उन्हें 15 में से 10 समर्थन मिले, जो उन्हें अभी तक की सबसे मजबूत स्थिति में रखता है।
क्या रेबेका ग्रिन्सपैन वाकई यूएन की पहली महिला महासचिव बन सकती हैं?
हाँ, यदि वे चुनी जाती हैं तो वे संयुक्त राष्ट्र के 79 वर्षों के इतिहास में पहली महिला महासचिव होंगी। वे पहली यहूदी महासचिव भी होंगी। हालांकि, अंतिम निर्णय सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के वीटो पर निर्भर करेगा।
यूएन महासचिव के चुनाव की प्रक्रिया क्या है?
पहले सुरक्षा परिषद किसी उम्मीदवार की सिफारिश करती है, जिसके लिए कम से कम 9 वोट और किसी भी स्थायी सदस्य का वीटो न होना ज़रूरी है। इसके बाद 193 सदस्यीय महासभा उस सिफारिश का अनुमोदन करती है। नए महासचिव का चयन 2026 के अंत तक होना है।
ग्रिन्सपैन की मुख्य प्रतिद्वंद्वी कौन हैं?
उनकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गुयाना की पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजदूत कैरोलिन रोड्रिग्स-बर्केट हैं, जिन्हें स्ट्रॉ पोल में 9 समर्थन मिले। चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बाचेलेट भी दौड़ में हैं, लेकिन उन्हें कथित तौर पर अमेरिका के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
वीटो का खतरा ग्रिन्सपैन की उम्मीदवारी को कैसे प्रभावित कर सकता है?
सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों — अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस — में से कोई भी किसी उम्मीदवार को वीटो कर सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, स्ट्रॉ पोल में मिला एकमात्र विरोध किस स्थायी सदस्य से आया, यह जानना निर्णायक होगा। वीटो की स्थिति में पूरी प्रक्रिया गतिरोध में फँस सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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