22 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूएन महासचिव पद: 7 उम्मीदवार, कोई स्पष्ट बढ़त नहीं — अमेरिका-चीन की सहमति से तय होगा अगला नाम

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूएन महासचिव पद: 7 उम्मीदवार, कोई स्पष्ट बढ़त नहीं — अमेरिका-चीन की सहमति से तय होगा अगला नाम

सारांश

तीन दौर के गुप्त मतदान के बाद भी कोई उम्मीदवार आगे नहीं निकल सका — और अब यूएन महासचिव की कुर्सी का फैसला अमेरिका-चीन की सहमति पर टिका है। 31 दिसंबर 2026 की डेडलाइन से पहले दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच किस नाम पर बनेगी सहमति, यही असली सवाल है।

मुख्य बातें

एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा; नए महासचिव का कार्यभार 1 जनवरी 2027 से शुरू होगा।
तीन दौर के गुप्त स्ट्रॉ पोल के बाद भी 7 उम्मीदवारों में से कोई स्पष्ट बढ़त नहीं बना सका।
चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बाचेलेट ने 20 सितंबर 2026 को उम्मीदवारी वापस ली; अब करीब तीन उम्मीदवार असली दौड़ में माने जा रहे हैं।
अंतिम फैसला अमेरिका और चीन समेत सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के बीच संभावित समझौते पर निर्भर करेगा।
अमेरिका 'यूएन80' सुधार पहल पर जोर दे रहा है; अगले महासचिव को वित्तीय संकट और महाशक्ति प्रतिस्पर्धा दोनों से जूझना होगा।

संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के चयन की दौड़ निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पाँच वर्षीय कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा, और नए महासचिव का कार्यभार 1 जनवरी 2027 से शुरू होना है। तीन दौर के गुप्त स्ट्रॉ पोल के बाद भी मौजूदा सात उम्मीदवारों में से कोई भी स्पष्ट बढ़त हासिल नहीं कर सका है, जिससे यह संभावना बलवती हो गई है कि अंतिम फैसला अमेरिका और चीन समेत सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों के बीच संभावित समझौते पर निर्भर करेगा।

चुनाव प्रक्रिया: कैसे तय होता है महासचिव

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में 15 सदस्य हैं, जिनमें पाँच स्थायी सदस्य — अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन — शामिल हैं। किसी उम्मीदवार को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 9 सदस्यों का समर्थन जरूरी है और किसी भी स्थायी सदस्य को वीटो का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा उस नाम को औपचारिक रूप से नियुक्त करती है।

'स्ट्रॉ पोल' वास्तव में औपचारिक चुनाव नहीं होते — ये गोपनीय मतदान होते हैं जिनमें सदस्य किसी उम्मीदवार के सामने 'एंकरेज' (प्रोत्साहित), 'डिस्करेज' (हतोत्साहित) या कोई विकल्प नहीं — में से एक चुनते हैं। चूँकि ये मतदान गोपनीय होते हैं, इसलिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आँकड़े पूरी तस्वीर नहीं दर्शाते।

मुख्य उम्मीदवार और दौड़ की स्थिति

इस बार की दौड़ में लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के कई उम्मीदवार शामिल हैं। इनमें प्रमुख हैं — कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति और यूएनसीटीएडी की महासचिव रेबेका ग्रिन्सपैन, गुयाना की राजनयिक कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट, अर्जेंटीना के आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी, इक्वाडोर की पूर्व विदेश मंत्री और संयुक्त राष्ट्र महासभा की पूर्व अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा, इक्वाडोर की पूर्व राजदूत इवोन ए-बाकी, और सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी साल

चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बाचेलेट भी इस दौड़ में थीं, लेकिन 20 सितंबर 2026 को उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। यह निर्णय स्ट्रॉ पोल में उनके समर्थन में आई गिरावट के बाद आया। शुरुआती दौर में ग्रिन्सपैन को समर्थन मिलने की खबरें थीं, लेकिन बाद के दौरों में तस्वीर जटिल हो गई। द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल करीब तीन उम्मीदवारों को ही आवश्यक समर्थन हासिल करने की वास्तविक दौड़ में माना जा रहा है। अंतिम समय में कुछ नए नाम भी संभावित विकल्प के रूप में चर्चा में आ रहे हैं।

अमेरिका-चीन की भूमिका क्यों निर्णायक है

दोनों महाशक्तियाँ — अमेरिका और चीन — सुरक्षा परिषद में वीटो अधिकार रखती हैं, जिससे उनकी सहमति या असहमति किसी भी उम्मीदवार का भविष्य तय कर सकती है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने जून 2026 में ग्रिन्सपैन और एस्पिनोसा से अलग-अलग मुलाकात की थी। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों उम्मीदवारों ने बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मज़बूत करने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।

दूसरी ओर, अमेरिका ऐतिहासिक रूप से संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा है, लेकिन मौजूदा अमेरिकी प्रशासन के तहत फंडिंग में बड़ी कटौती की गई है। अमेरिका 'यूएन80' पहल के तहत संगठन की एजेंसियों के एकीकरण, मुख्यालय खर्चों में कमी और संसाधनों को जमीनी कार्यक्रमों की ओर मोड़ने पर जोर दे रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र गंभीर वित्तीय दबाव में है।

नए महासचिव के सामने वैश्विक चुनौतियाँ

संयुक्त राष्ट्र इस समय एक साथ कई संकटों से जूझ रहा है — रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियाँ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सुरक्षा परिषद में बढ़ती महाशक्ति प्रतिस्पर्धा। गौरतलब है कि जब स्थायी सदस्य ही आपस में असहमत हों, तो महासचिव की भूमिका और भी नाजुक हो जाती है।

नए महासचिव को न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ निभानी होंगी, बल्कि अमेरिका की सुधार-संबंधी प्राथमिकताओं और चीन समेत अन्य बड़ी शक्तियों की अपेक्षाओं के बीच नाजुक संतुलन भी बनाना होगा। यह देखना होगा कि 31 दिसंबर 2026 की समयसीमा से पहले सुरक्षा परिषद किसी एक नाम पर सहमति बना पाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार दाँव असामान्य रूप से ऊँचे हैं — अमेरिका फंडिंग काटकर संरचनात्मक सुधार माँग रहा है, जबकि चीन बहुपक्षवाद की अपनी परिभाषा थोपना चाहता है। तीन स्ट्रॉ पोल के बाद भी गतिरोध बना रहना यह संकेत देता है कि समस्या उम्मीदवारों की नहीं, बल्कि स्थायी सदस्यों के बीच गहरे वैचारिक टकराव की है। ऐसे में जो नाम अंततः सामने आएगा, वह संभवतः सबसे योग्य नहीं, बल्कि सबसे कम आपत्तिजनक होगा — और यही संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा सीमाओं की सबसे बड़ी गवाही होगी।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव का चुनाव कब होगा?
मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा और नए महासचिव का कार्यभार 1 जनवरी 2027 से शुरू होना है। इसलिए सुरक्षा परिषद को इस वर्ष के अंत तक किसी एक नाम पर सहमति बनानी होगी।
यूएन महासचिव पद के लिए अभी कौन-कौन से उम्मीदवार हैं?
फिलहाल सात उम्मीदवार हैं — रेबेका ग्रिन्सपैन (कोस्टा रिका), कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट (गुयाना), राफेल ग्रॉसी (अर्जेंटीना), मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा (इक्वाडोर), इवोन ए-बाकी (इक्वाडोर) और मैकी साल (सेनेगल)। चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बाचेलेट ने 20 सितंबर 2026 को अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली।
स्ट्रॉ पोल क्या होता है और इसमें क्या हुआ?
स्ट्रॉ पोल सुरक्षा परिषद द्वारा किए जाने वाले गोपनीय अनौपचारिक मतदान होते हैं जिनमें यह अंदाज़ा लगाया जाता है कि कौन उम्मीदवार आगे बढ़ सकता है। तीन दौर के मतदान के बावजूद किसी भी उम्मीदवार ने स्थायी सदस्यों के बीच व्यापक स्वीकार्यता हासिल नहीं की है।
इस चुनाव में अमेरिका और चीन की भूमिका इतनी अहम क्यों है?
दोनों देश सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और उनके पास वीटो अधिकार है, यानी किसी भी उम्मीदवार को उनकी सहमति के बिना नियुक्त नहीं किया जा सकता। इसके अलावा अमेरिका यूएन80 सुधार पहल के तहत संरचनात्मक बदलाव चाहता है जबकि चीन की अलग प्राथमिकताएँ हैं, जिससे किसी एक नाम पर सहमति बनाना और भी जटिल हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया क्या है?
सुरक्षा परिषद के कम से कम 9 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है और किसी भी स्थायी सदस्य को वीटो नहीं करना चाहिए। इसके बाद सुरक्षा परिषद द्वारा सिफारिश किए गए नाम को संयुक्त राष्ट्र महासभा औपचारिक रूप से नियुक्त करती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले