31 जुलाई 2026
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव चुनाव: सुरक्षा परिषद ने सात उम्मीदवारों पर 'स्ट्रॉ पोल' शुरू किया

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव चुनाव: सुरक्षा परिषद ने सात उम्मीदवारों पर 'स्ट्रॉ पोल' शुरू किया

सारांश

संयुक्त राष्ट्र में नए महासचिव की दौड़ शुरू हो गई है — सात उम्मीदवार, एक गुप्त 'स्ट्रॉ पोल', और 80 साल के इतिहास में पहली बार किसी महिला को यह पद मिलने की बढ़ती माँग। वीटो की दीवार पार करना ही असली परीक्षा है।

मुख्य बातें

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 30 जुलाई 2026 को सात उम्मीदवारों पर प्रारंभिक 'स्ट्रॉ पोल' संपन्न कराया।
मतदान के नतीजे गोपनीय रखे गए; उम्मीदवारों के नामांकनकर्ता देशों और महासभा अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक को भेजे जाएंगे।
प्रत्येक उम्मीदवार के लिए तीन विकल्प: एनकरेज, डिसकरेज, नो ओपिनियन ।
उम्मीदवारों में राफेल ग्रॉसी, मिशेल बैचेलेट, रेबेका ग्रिनस्पैन, ओलारा ओटुन्नू, मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा, कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट और मैकी सैल शामिल हैं।
अंतिम निर्णय 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा करेगी; अमेरिका, रूस, चीन सहित सभी पाँच स्थायी सदस्यों की स्वीकृति अनिवार्य।
यूएन के 80 साल के इतिहास में पहली बार किसी महिला को महासचिव बनाने की माँग वैश्विक स्तर पर तेज़ हो रही है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 30 जुलाई 2026 को अगले यूएन महासचिव के चयन की औपचारिक प्रक्रिया का आगाज़ करते हुए सात उम्मीदवारों पर एक प्रारंभिक 'स्ट्रॉ पोल' संपन्न कराया। इस मतदान का उद्देश्य यह जानना है कि किस उम्मीदवार को परिषद के सदस्यों का कितना समर्थन हासिल है और कौन किसी स्थायी सदस्य के वीटो से टकरा सकता है।

मतदान प्रक्रिया और गोपनीयता

सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जेनॉन मुकोंगो नगाय — जो कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के स्थायी प्रतिनिधि हैं और इस महीने परिषद की अध्यक्षता संभाल रहे हैं — ने बताया कि परिषद ने इस प्रारंभिक मतदान के नतीजे सार्वजनिक न करने का निर्णय लिया है। मतदान के परिणाम उम्मीदवारों को नामित करने वाले देशों के मिशनों और महासभा की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक को भेजे जाएंगे।

नगाय ने स्पष्ट किया कि मतपत्र में प्रत्येक उम्मीदवार के लिए तीन विकल्प थे: एनकरेज (प्रोत्साहित करें), डिसकरेज (हतोत्साहित करें), और नो ओपिनियन (कोई राय नहीं)

स्ट्रॉ पोल की प्रक्रिया कैसे काम करती है

यह 'स्ट्रॉ पोल' कई चरणों में होने वाले मतदान की एक क्रमबद्ध श्रृंखला का पहला पड़ाव है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी जब तक कोई ऐसा उम्मीदवार सामने नहीं आता जिसे सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थायी सदस्यअमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस — स्वीकार कर लें। गौरतलब है कि शुरुआती चरण पूरी तरह गुप्त होते हैं, जबकि बाद के चरणों में स्थायी सदस्यों के वोट अलग से दिखाए जाते हैं — हालाँकि यह नहीं बताया जाता कि कौन-सा वोट किस देश ने दिया।

सात उम्मीदवार कौन हैं

मैदान में उतरे सात उम्मीदवारों में से चार के पास संयुक्त राष्ट्र संगठनों में सीधे नेतृत्व का अनुभव है:

राफेल ग्रॉसी (अर्जेंटीना) — अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के वर्तमान प्रमुख। मिशेल बैचेलेट (चिली) — चिली की पूर्व राष्ट्रपति और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त की पूर्व पदधारी। रेबेका ग्रिनस्पैन (कोस्टा रिका) — संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास संगठन (यूएनसीटीएडी) की प्रमुख और कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति। ओलारा ओटुन्नू (युगांडा) — संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव, युगांडा के पूर्व विदेश मंत्री और सुरक्षा परिषद के पूर्व अध्यक्ष।

अन्य तीन उम्मीदवारों में मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा (इक्वाडोर) — संयुक्त राष्ट्र महासभा की पूर्व अध्यक्ष और इक्वाडोर की पूर्व विदेश मंत्री — शामिल हैं। इसके अलावा कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट (गुयाना) — गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री — और मैकी सैल (सेनेगल) — सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति — भी दौड़ में हैं।

खुली चर्चा और अब तक की भागीदारी

सभी उम्मीदवारों को महासभा के तत्वावधान में राजनयिकों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ लगभग तीन घंटे की खुली चर्चा में हिस्सा लेना होता है। अब तक ग्रिनस्पैन, बैचेलेट, ग्रॉसी, एस्पिनोसा और रोड्रिग्स-बिर्केट इन संवादों में अपने विचार और कार्ययोजनाएँ प्रस्तुत कर चुके हैं। ओटुन्नू ने पिछले सप्ताह ही अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की है, इसलिए उनकी चर्चा अभी शेष है।

आगे क्या होगा

अंतिम चुनाव तक और उम्मीदवार मैदान में आ सकते हैं। अंततः 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा सुरक्षा परिषद द्वारा अनुशंसित उम्मीदवार को औपचारिक मंजूरी देगी। यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में यह माँग तेज़ी से मज़बूत हो रही है कि संयुक्त राष्ट्र के 80 साल के इतिहास में पहली बार महासचिव पद किसी महिला को मिले — और इस बार के उम्मीदवारों की सूची में महिलाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति इस भावना को बल देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वीटो-प्रतिरोध जीत का पैमाना है। इस बार सूची में लैटिन अमेरिका का वर्चस्व है, जो भौगोलिक प्रतिनिधित्व के उस अलिखित नियम को चुनौती देता है जिसके तहत अफ्रीका या एशिया की बारी मानी जा रही थी। महिला महासचिव की माँग नैतिक रूप से सशक्त है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या वाशिंगटन, मॉस्को और बीजिंग एक साथ किसी एक नाम पर सहमत हो सकते हैं — और वह भी ऐसे वक्त में जब तीनों के आपसी संबंध ऐतिहासिक तनाव में हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का 'स्ट्रॉ पोल' क्या होता है?
'स्ट्रॉ पोल' एक अनौपचारिक प्रारंभिक मतदान है जिसमें सुरक्षा परिषद के सदस्य प्रत्येक उम्मीदवार के लिए 'एनकरेज', 'डिसकरेज' या 'नो ओपिनियन' में से एक विकल्प चुनते हैं। इसका उद्देश्य यह जानना है कि कौन-सा उम्मीदवार किसी स्थायी सदस्य के वीटो से बच सकता है।
यूएन महासचिव पद के लिए 2026 में कौन-से सात उम्मीदवार हैं?
सात उम्मीदवार हैं — राफेल ग्रॉसी (अर्जेंटीना), मिशेल बैचेलेट (चिली), रेबेका ग्रिनस्पैन (कोस्टा रिका), ओलारा ओटुन्नू (युगांडा), मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा (इक्वाडोर), कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट (गुयाना) और मैकी सैल (सेनेगल)। अंतिम चुनाव से पहले और उम्मीदवार भी मैदान में आ सकते हैं।
यूएन महासचिव का अंतिम चुनाव कैसे होता है?
सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थायी सदस्यों — अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस — की स्वीकृति के बाद परिषद एक उम्मीदवार की सिफारिश करती है। इसके बाद 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा उस उम्मीदवार को औपचारिक मंजूरी देती है।
क्या इस बार यूएन की पहली महिला महासचिव बन सकती हैं?
वैश्विक स्तर पर यह माँग तेज़ी से मज़बूत हो रही है कि यूएन के 80 साल के इतिहास में पहली बार महासचिव पद किसी महिला को मिले। इस बार की उम्मीदवारों की सूची में बैचेलेट, ग्रिनस्पैन, एस्पिनोसा और रोड्रिग्स-बिर्केट सहित कई प्रमुख महिला उम्मीदवार शामिल हैं।
'स्ट्रॉ पोल' के नतीजे सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते?
सुरक्षा परिषद ने प्रारंभिक चरण के नतीजे गोपनीय रखने का निर्णय लिया है ताकि उम्मीदवारों और नामांकनकर्ता देशों को बिना दबाव के रणनीति बनाने का अवसर मिले। नतीजे केवल संबंधित देशों के मिशनों और महासभा अध्यक्ष को भेजे जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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