अमेरिकी वीजा के लिए सोशल मीडिया स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ा, I-वीजा पत्रकार और H-1B धारक भी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने 3 अक्टूबर 2026 से वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया जांच का दायरा विदेशी पत्रकारों, H-1B वर्कर, विदेशी छात्रों और कई अन्य गैर-आप्रवासी श्रेणियों तक विस्तारित कर दिया है। वॉशिंगटन से घोषित इस नीति के अंतर्गत संबंधित वीजा श्रेणियों के आवेदकों को अपनी सभी सोशल मीडिया प्रोफाइल की प्राइवेसी सेटिंग 'पब्लिक' या 'ओपन' रखना अनिवार्य होगा। यह बदलाव बड़ी संख्या में भारतीय आवेदकों को सीधे प्रभावित करता है जो काम, पढ़ाई या पेशेवर उद्देश्यों से अमेरिका जाते हैं।
नई व्यवस्था में क्या बदला
स्टेट डिपार्टमेंट ने पिछले महीने इस विस्तार की घोषणा की थी, जो बुधवार को प्रभावी हो गई। नए नियमों के अनुसार I, TD और TN नॉन-इमिग्रेंट वीजा के सभी आवेदकों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट सार्वजनिक करने होंगे। इनमें I-वीजा पर अमेरिका जाने वाले विदेशी पत्रकार और मीडियाकर्मी विशेष रूप से शामिल हैं।
विभाग के अनुसार, 'इस जांच प्रक्रिया में मदद के लिए आई, टीडी और टीएन नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा के सभी आवेदकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने सभी सोशल मीडिया प्रोफाइल की प्राइवेसी सेटिंग पब्लिक या ओपन पर सेट करें।'
पहले से किन श्रेणियों पर लागू थी यह व्यवस्था
स्टेट डिपार्टमेंट ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन जांच की यह व्यवस्था पहले से H-1B अस्थायी कर्मचारियों, H-4 आश्रितों और H-3 ट्रेनी पर लागू है। इसके अलावा F-1 और M-1 छात्र और उनके F-2 व M-2 आश्रित, J-1 और J-2 एक्सचेंज विजिटर, कुछ कूटनीतिक और आधिकारिक वीजा धारक, धार्मिक कार्यकर्ता, अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान में भाग लेने वाले और मंगेतर वीजा आवेदक भी इसके दायरे में पहले से हैं।
गौरतलब है कि यह नई घोषणा इस स्क्रीनिंग व्यवस्था को कुछ और महत्त्वपूर्ण पेशेवर श्रेणियों तक विस्तारित करती है जो पहले इसमें शामिल नहीं थीं।
राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला
स्टेट डिपार्टमेंट ने इस पूरी प्रक्रिया को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा है। विभाग ने कहा, 'वीजा स्क्रीनिंग और जांच के दौरान विभाग जानकारी के हर उपलब्ध स्रोत का इस्तेमाल उन आवेदकों की पहचान करने के लिए करता है, जिन्हें शायद यूनाइटेड स्टेट्स में आने की इजाजत न मिले, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं।'
विभाग ने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिकी वीजा 'सरकार की मर्जी से मिलने वाला एक विशेषाधिकार है, न कि कोई अधिकार।' विभाग के अनुसार हर वीजा का फैसला असल में एक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा निर्णय है।
भारतीय आवेदकों पर असर
यह नियम उन लाखों भारतीयों को प्रभावित करता है जो हर साल H-1B, F-1, J-1 और अब I तथा TD/TN वीजा पर अमेरिका जाते हैं। विशेष रूप से भारतीय मीडिया संगठनों के पत्रकार और संवाददाता जो I-वीजा पर काम करते हैं, उन्हें अब अपनी संपूर्ण सोशल मीडिया उपस्थिति कॉन्सुलर अधिकारियों के लिए खुली रखनी होगी।
हालांकि, विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि आवेदकों की किस प्रकार की पोस्ट या ऑनलाइन गतिविधि वीजा के फैसले को प्रभावित कर सकती है, और इस मूल्यांकन की प्रक्रिया क्या होगी।
आगे क्या
यह विस्तार ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी प्रशासन इमिग्रेशन और वीजा प्रक्रिया को तेजी से कड़ा बना रहा है। आलोचकों का कहना है कि पत्रकारों को इस दायरे में शामिल करना प्रेस स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है, क्योंकि उनकी ऑनलाइन गतिविधि अक्सर पेशेवर रिपोर्टिंग का हिस्सा होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति के क्रियान्वयन के तरीके और मूल्यांकन मानदंडों पर आने वाले महीनों में और स्पष्टता आने की संभावना है।