अमेरिका का ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान: लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रक्रिया जारी
सारांश
Key Takeaways
- ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ईरान के खिलाफ चल रहा है।
- अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत को काफी नुकसान पहुँचाया है।
- ईरान की नौसेना युद्ध के लिए असमर्थ हो गई है।
- राष्ट्रपति ट्रंप का बिना शर्त आत्मसमर्पण का जिक्र।
- ईरान का वर्तमान नेतृत्व कमजोर हो चुका है।
वाशिंगटन, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। व्हाइट हाउस ने जानकारी दी है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना का अभियान अपने उद्देश्यों की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देश में हथियारों के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं और ईरान में भविष्य की राजनीतिक स्थिति पर भी गहराई से विचार कर रहे हैं।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने संवाददाताओं से बताया कि ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान, जिसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ कहा जा रहा है, तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और इसके लक्ष्य अगले कुछ हफ्तों में पूरे हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस अभियान के लक्ष्यों को पूरा करने में लगभग चार से छह सप्ताह का समय लग सकता है और अमेरिका इस दिशा में तेजी से प्रगति कर रहा है।
लेविट ने कहा कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य शक्ति को काफी क्षति पहुँचाई है, विशेष रूप से उसकी नौसेना को।
उन्होंने बताया कि ईरान की नौसेना को लगभग पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। अब तक ईरान के 30 से अधिक जहाज और नौसैनिक पोत डुबो दिए गए हैं, जिसके कारण उसकी नौसेना युद्ध के लिए असमर्थ हो गई है।
व्हाइट हाउस के अनुसार, इस अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य ईरान की उन बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरे को समाप्त करना है, जो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों के लिए जोखिम पैदा कर सकती थीं। लेविट ने बताया कि इस दिशा में भी अमेरिका ने महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है।
उन्होंने बताया कि अभियान के शुरू होने के छह दिन के भीतर ही ईरान द्वारा किए जाने वाले जवाबी बैलिस्टिक मिसाइल हमले लगभग 90 प्रतिशत तक घट गए हैं। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ईरान के समर्थित समूहों की ओर से कोई बड़ा जवाबी हमला नहीं हुआ है। पिछले छह दिनों में हिज्बुल्लाह और हूती जैसे संगठनों ने भी कोई महत्वपूर्ण प्रतिरोध नहीं दिखाया है।
लेविट ने कहा कि इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को होने वाले खतरों को ख़त्म करना है। ईरान के “बिना शर्त आत्मसमर्पण” संबंधी ट्रंप की टिप्पणी पर भी लेविट ने स्पष्टीकरण दिया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का तात्पर्य यह है कि जब अमेरिकी सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में ट्रंप यह निर्णय लेंगे कि ईरान अब अमेरिका के लिए खतरा नहीं है और इस अभियान के सभी लक्ष्य पूर्ण हो चुके हैं, तब ईरान ऐसी स्थिति में होगा जिसे बिना शर्त आत्मसमर्पण कहा जा सकता है।
लेविट ने यह भी संकेत दिया कि ईरान का मौजूदा नेतृत्व काफी कमजोर हो चुका है।
उन्होंने कहा कि अब वहाँ ऐसे बहुत कम लोग बचे हैं जो सरकार का प्रतिनिधित्व कर सकें, क्योंकि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर पुराने शासन के 50 से अधिक नेताओं को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। ईरान के राजनीतिक भविष्य पर पूछे गए सवाल पर लेविट ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां वहां संभावित नेतृत्व के विकल्पों का मूल्यांकन कर रही हैं।
हालांकि, उन्होंने इस संबंध में अधिक जानकारी देने से इंकार कर दिया। साथ ही, रूस द्वारा ईरान को खुफिया सहायता देने की खबरों पर भी उन्होंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।