16 अक्टूबर 2026
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ट्रंप प्रशासन का ईरान पर नया आर्थिक प्रहार: इराकी बैंक, दुबई नेटवर्क और क्यूबाई बैंक पर प्रतिबंध

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ट्रंप प्रशासन का ईरान पर नया आर्थिक प्रहार: इराकी बैंक, दुबई नेटवर्क और क्यूबाई बैंक पर प्रतिबंध

सारांश

ट्रंप प्रशासन ने 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत एक और बड़ा कदम उठाते हुए इराक, दुबई, हांगकांग और क्यूबा तक फैले ईरान के वित्तीय नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाए। वित्त मंत्री बेसेंट और विदेश मंत्री रुबियो दोनों मोर्चों से — यह संकेत है कि अमेरिका ईरान की फंडिंग के हर दरवाज़े को बंद करने पर आमादा है।

मुख्य बातें

ट्रंप प्रशासन ने 16 अक्टूबर 2026 को ईरान से जुड़े बैंकों, कंपनियों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाए।
निशाने पर: इराक का इंटरनेशनल डेवलपमेंट बैंक , हांगकांग की एलीटस्फीयर ट्रेडिंग कंपनी , दुबई-आधारित तेल कारोबारी सैयद रूहोल्लाह रजावी , और क्यूबा का BICSA बैंक ।
अमेरिकी दावे के अनुसार इन नेटवर्कों ने मध्य पूर्व और एशिया में सैकड़ों मिलियन डॉलर का लेन-देन किया।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबाई बैंक पर 2022 से ईरान के प्रतिबंधित कराफरीन बैंक को सेवाएँ देने का आरोप लगाया।
'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' की शुरुआत 24 अगस्त को हुई थी; प्रतिबंधित संस्थाओं से जुड़े विदेशी बैंकों पर सेकेंडरी सैंक्शंस की चेतावनी भी दी गई है।

अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने 16 अक्टूबर 2026 को ईरान पर अधिकतम आर्थिक दबाव की रणनीति के तहत कई बैंकों, कंपनियों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाए। इन प्रतिबंधों में एक इराकी बैंक, ईरान से जुड़े ऑफशोर बैंक, दुबई-आधारित एक ईरानी तेल कारोबारी नेटवर्क, हांगकांग की एक फ्रंट कंपनी और क्यूबा के एक सरकारी बैंक को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन नेटवर्कों ने मध्य पूर्व और एशिया में शेल कंपनियों और विदेशी मुद्रा कारोबारियों के ज़रिए सैकड़ों मिलियन डॉलर का लेन-देन किया है।

मुख्य घटनाक्रम

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, 'ईरान की अर्थव्यवस्था पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है और उसके तथाकथित सहयोगी भी अब उसे नहीं बचा सकते।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी वित्त मंत्रालय तब तक पीछे नहीं हटेगा, जब तक ईरानी सरकार के आर्थिक संसाधन समाप्त नहीं हो जाते और उसकी सैन्य गतिविधियों को सहारा देने वाले सभी वित्तीय रास्ते बंद नहीं हो जाते।

प्रतिबंधित व्यक्तियों में सैयद रूहोल्लाह रजावी भी शामिल हैं, जिन्हें अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी सरकार के प्रमुख तेल कारोबारियों में से एक बताया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, रजावी दुबई में रहते हैं और पहले अमेरिकी प्रतिबंधों से पूर्व ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी की ओर से हर महीने लाखों बैरल तेल विदेश भेजने का काम करते थे।

वित्तीय नेटवर्क की कार्यप्रणाली

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ये नेटवर्क हांगकांग के रास्ते धन को यूएई और तुर्किये तक पहुँचाते हैं, जहाँ उसे सोने और नकदी में बदला जाता है। इसके बाद यह धन 'माहान एयर' की उड़ानों के ज़रिए ईरान और उसके समर्थक समूहों तक पहुँचाया जाता है।

'एलीटस्फीयर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड' नाम की हांगकांग स्थित फ्रंट कंपनी पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। आरोप है कि यह कंपनी ईरान के 'शहर बैंक' से जुड़े नेटवर्क के लिए धन के लेन-देन में मदद कर रही थी। इसके अलावा, दुबई में रहने वाले ईरानी-डोमिनिकन नागरिक सादेघ बावी पर भी प्रतिबंध लगाया गया है — अमेरिका का आरोप है कि वह ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स-कुद्स फोर्स (IRGC-QF) से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग कर रहे थे।

बैंकों पर कार्रवाई

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इराक स्थित इंटरनेशनल डेवलपमेंट बैंक फॉर इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस पर प्रतिबंध लगाए हैं। आरोप है कि यह बैंक ईरान को अमेरिकी डॉलर तक पहुँच उपलब्ध करा रहा था। साथ ही ईरान के दो ऑफशोर बैंक — जजीरेह इंटरनेशनल बैंक कंपनी और चाबहार इंटरनेशनल बैंक ओवरसीज कंपनी — भी प्रतिबंधों के दायरे में आ गए हैं।

अलग से, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा के सरकारी बैंक बैंको इंटरनेशनल डी कॉमर्सियो एस.ए. (BICSA) पर प्रतिबंधों की घोषणा की। रुबियो का आरोप है कि यह बैंक 2022 से ईरान के पहले से प्रतिबंधित कराफरीन बैंक को वित्तीय सेवाएँ दे रहा था। उन्होंने कहा, 'काफी लंबे समय से कम्युनिस्ट क्यूबा को ऐसे देशों और संगठनों के लिए ठिकाने की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अमेरिका के लिए खतरा पैदा करते हैं, जिनमें ईरान भी शामिल है।'

धार्मिक नेटवर्क के दुरुपयोग पर चेतावनी

एक अलग कदम में, अमेरिकी वित्तीय अपराध प्रवर्तन नेटवर्क ने बैंकों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है और ऐसे लेन-देन की रिपोर्ट करने को कहा है जिनमें ईरान धार्मिक चैरिटी नेटवर्क का दुरुपयोग कर रहा हो। अमेरिका को आशंका है कि धार्मिक दान, विशेष रूप से 'खुम्स' के रूप में दिए जाने वाले योगदान, का इस्तेमाल अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। बेसेंट ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में हम ईरानी सरकार को धार्मिक संस्थाओं का इस्तेमाल करके अपने नेताओं को फायदा पहुँचाने और आतंकवाद के वित्तपोषण की अनुमति नहीं देंगे।'

क्या होगा आगे

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि जिन विदेशी वित्तीय संस्थानों का संबंध प्रतिबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं के साथ पाया जाएगा, उन पर द्वितीयक प्रतिबंध (सेकेंडरी सैंक्शंस) लगाए जा सकते हैं। गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' की शुरुआत 24 अगस्त को की थी, और इससे पहले भी यूएई, हांगकांग, चीन और अन्य देशों में ईरान से जुड़े शिपिंग, खरीद-फरोख्त और वित्तीय नेटवर्कों पर कार्रवाई हो चुकी है। यह अभियान तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक ईरान अपनी परमाणु और सैन्य गतिविधियों पर वार्ता के लिए तैयार नहीं होता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक व्यापक संदेश है — कि जो भी देश या संस्था ईरान के वित्तीय पाइपलाइन का हिस्सा बनेगी, वह अमेरिकी निशाने पर होगी। क्यूबा जैसे छोटे, पहले से अलग-थलग देश को इस अभियान में घसीटना दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन भौगोलिक सीमाएँ नहीं देख रहा। परंतु आलोचकों का कहना है कि व्यापक सेकेंडरी सैंक्शंस की धमकी उन देशों को भी नाराज़ कर सकती है जो अमेरिका के संभावित मध्यस्थ बन सकते थे। असली प्रश्न यह है कि क्या आर्थिक घेराबंदी ईरान को वार्ता की मेज़ पर लाएगी, या इतिहास की तरह उसे और अधिक वैकल्पिक रास्ते खोजने पर मजबूर करेगी।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर नए प्रतिबंध क्यों लगाए?
ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य ईरान की अर्थव्यवस्था पर अधिकतम दबाव बनाना और उसकी सैन्य व आतंकवाद-समर्थक गतिविधियों को वित्त देने वाले सभी रास्ते बंद करना है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक ईरानी सरकार के आर्थिक संसाधन समाप्त नहीं हो जाते।
'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' क्या है?
'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' ट्रंप प्रशासन का वह अभियान है जिसकी शुरुआत 24 अगस्त को हुई थी। इसका उद्देश्य ईरान के उन वित्तीय और कारोबारी नेटवर्कों को ध्वस्त करना है जिनके ज़रिए वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने की कोशिश करता है — इसमें यूएई, हांगकांग, चीन और अन्य देशों में मौजूद नेटवर्क शामिल हैं।
क्यूबा के बैंक पर प्रतिबंध किस कारण लगाया गया?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार, क्यूबा का सरकारी बैंक BICSA वर्ष 2022 से ईरान के पहले से प्रतिबंधित कराफरीन बैंक को वित्तीय सेवाएँ दे रहा था। रुबियो ने आरोप लगाया कि क्यूबा को अमेरिका के लिए खतरनाक देशों और संगठनों के लिए ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
सेकेंडरी सैंक्शंस क्या होते हैं और इनसे कौन प्रभावित होगा?
सेकेंडरी सैंक्शंस वे प्रतिबंध हैं जो अमेरिका उन विदेशी बैंकों या कंपनियों पर लगाता है, जो प्रतिबंधित देशों या व्यक्तियों के साथ व्यापार करती हैं। इसका अर्थ यह है कि यदि कोई भारतीय, यूरोपीय या एशियाई बैंक भी प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं से जुड़ा पाया जाए, तो उस पर भी कार्रवाई हो सकती है।
धार्मिक 'खुम्स' दान पर अमेरिका की चिंता क्या है?
अमेरिकी वित्तीय अपराध प्रवर्तन नेटवर्क को आशंका है कि ईरान धार्मिक दान, विशेष रूप से 'खुम्स' के रूप में एकत्र योगदान, का इस्तेमाल आतंकवाद के वित्तपोषण या नेताओं को लाभ पहुँचाने के लिए कर सकता है। इसलिए बैंकों को ऐसे संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।
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