अमेरिका रूस के तेल पर प्रतिबंधों में अस्थायी राहत देने की योजना, भारत का सहयोग महत्वपूर्ण: बेसेंट

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अमेरिका रूस के तेल पर प्रतिबंधों में अस्थायी राहत देने की योजना, भारत का सहयोग महत्वपूर्ण: बेसेंट

सारांश

वॉशिंगटन ने संकेत दिया है कि वह रूस के तेल प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दे सकता है, जिससे भारत को रूसी तेल खरीद जारी रखने की अनुमति मिलेगी। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकता है।

Key Takeaways

  • अमेरिका ने रूस के तेल पर प्रतिबंधों में ढील देने का संकेत दिया है।
  • भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिल सकती है।
  • यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने में मदद करेगा।
  • स्कॉट बेसेंट ने भारत की जिम्मेदार भूमिका की सराहना की है।
  • भारत रियायती रूसी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार बना हुआ है।

वॉशिंगटन, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। स्कॉट बेसेंट ने यह संकेत दिया है कि मध्य-पूर्व संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने हेतु वॉशिंगटन रूस के तेल आपूर्ति पर लागू कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दे सकता है और भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति प्रदान कर सकता है।

फॉक्स बिजनेस को दिए एक साक्षात्कार में स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान के कारण कीमतों में वृद्धि होने पर अमेरिका ने पहले ही भारत को कुछ लचीलापन प्रदान किया था।

बेसेंट ने कहा, "भारतीयों ने एक बहुत जिम्मेदार भूमिका निभाई है। हमने उनसे कहा था कि वे प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद बंद करें और उन्होंने ऐसा किया।"

उन्होंने यह भी बताया कि भारत मूल रूप से उस आपूर्ति को अमेरिकी कच्चे तेल से बदलने की योजना बना रहा था। वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा और होर्मुज जलडमरू से गुजरने वाले टैंकरों के लिए बीमा प्रीमियम में वृद्धि के कारण वॉशिंगटन ने कमी से बचने के लिए अस्थायी समायोजन की अनुमति दी।

बेसेंट ने कहा, "दुनिया में तेल की अस्थायी कमी को कम करने के लिए हमने भारत को रूसी तेल स्वीकार करने की अनुमति दी है।"

यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, क्योंकि आशंका है कि ईरान से जुड़े तनाव इस संकरे जलमार्ग के शिपमेंट को बाधित कर सकते हैं, जो फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है। युद्ध-जोखिम बीमा की लागत बढ़ने के कारण दर्जनों टैंकरों में देरी हुई है।

इससे पहले, ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले तेल शिपमेंट के लिए सरकारी समर्थित बीमा कवरेज बढ़ाकर समुद्री ऊर्जा व्यापार को स्थिर करने की योजना की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य बीमा कंपनियों और शिपिंग कंपनियों को आश्वस्त करना है कि सुरक्षा चिंताओं के बावजूद कार्गो सुरक्षित रहेगा।

बेसेंट ने यह भी संकेत दिया कि वॉशिंगटन पहले से समुद्र में मौजूद रूसी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों की समीक्षा कर अतिरिक्त आपूर्ति जारी कर सकता है। उन्होंने कहा, "हम अन्य रूसी तेल पर लगे प्रतिबंध भी हटा सकते हैं।"

उन्होंने बताया कि बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित कच्चा तेल अभी समुद्र में फंसा हुआ है। समुद्र में सैकड़ों मिलियन बैरल प्रतिबंधित कच्चा तेल मौजूद है।

इन कार्गो पर प्रतिबंधों में ढील देने से आपूर्ति तेजी से बढ़ सकती है। उन्होंने कहा, "असल में, इन पर से प्रतिबंध हटाकर ट्रेज़री आपूर्ति पैदा कर सकता है और हम इस पर विचार कर रहे हैं।"

बेसेंट ने कहा कि जैसे-जैसे संघर्ष आगे बढ़ेगा, प्रशासन तेल बाजार को स्थिर करने के लिए और कदम उठाएगा। "हम इस संघर्ष के दौरान बाजार को राहत देने के लिए लगातार नए कदमों की घोषणा करते रहेंगे।"

2022 में यूक्रेन पर मॉस्को के आक्रमण के बाद से भारत रियायती रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक बना हुआ है। भारत का तर्क है कि ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आपूर्ति के स्रोतों में विविधता आवश्यक है।

Point of View

जो वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। यह कदम भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मददगार हो सकता है।
NationPress
07/03/2026

Frequently Asked Questions

क्या अमेरिका रूस के तेल प्रतिबंधों में ढील देने जा रहा है?
हाँ, अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह रूस के तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दे सकता है।
भारत को इसका क्या लाभ होगा?
भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिलने से उसकी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
क्या यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करेगा?
हाँ, यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने में मदद कर सकता है।
स्कॉट बेसेंट कौन हैं?
स्कॉट बेसेंट एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी हैं जो ऊर्जा नीतियों पर काम कर रहे हैं।
भारत रूस के तेल का सबसे बड़ा खरीदार क्यों है?
भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए विभिन्न स्रोतों से तेल खरीदने की आवश्यकता को महसूस किया है।
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