जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन 13वें दिन भी जारी, 13 साल के जैद की पीड़ा — 'पेपर लीक या परीक्षा रद्द'
सारांश
मुख्य बातें
रांची में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन 6 अगस्त 2026 को अपने 13वें दिन भी जारी रहा। राजधानी के खुले आसमान तले डटे उम्मीदवार पेपर लीक और परीक्षाओं के रद्द होने के खिलाफ अपनी मांगें मनवाने पर अड़े हैं। इस आंदोलन में अब आम जनता और स्कूली बच्चे भी शामिल हो रहे हैं, जो इसकी व्यापकता को रेखांकित करता है।
जयराम महतो का सरकार पर दबाव का दावा
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के अध्यक्ष और डुमरी विधायक जयराम महतो ने कहा कि सत्ताधारी पक्ष इस आंदोलन से स्पष्ट रूप से दबाव में है। उन्होंने कहा, 'सरकार पर दबाव है। वे बहुत दबाव में हैं। मुख्यमंत्री, सभी मंत्री और सत्ताधारी पार्टी के अन्य विधायक दबाव महसूस कर रहे हैं। विधानसभा के अंदर उनके हाव-भाव से यह साफ पता चलता है।'
महतो ने बताया कि विधानसभा की कार्यवाही के बाद सरकार ने कैबिनेट समन्वय समिति की बैठक बुलाई, जो स्पीकर की अध्यक्षता में हुई और जिसमें सभी विधायी दलों के नेता उपस्थित थे। उन्होंने इस बैठक में भी सरकार से सीधे छात्रों से संवाद करने और लंबित मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई की माँग दोहराई।
13 वर्षीय जैद की पीड़ा — आंदोलन की सबसे मार्मिक आवाज़
इस आंदोलन में छठी कक्षा के 13 वर्षीय छात्र जैद की उपस्थिति ने सबका ध्यान खींचा। जैद ने कहा, 'हम सभी छात्र, हम सभी युवा, इस देश को और आगे ले जाने की पूरी कोशिश करते हैं। हम कड़ी मेहनत करते हैं, दिन-रात एक कर देते हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। उसके बाद हमें क्या देखने को मिलता है? या तो परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है या फिर परीक्षा ही रद्द कर दी जाती है।'
जैद ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधी अपील करते हुए कहा, 'मैं सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सर से विनम्र अनुरोध करता हूँ कि वे सभी जरूरतों को पूरा करें और हमारी बात पर ध्यान दें, ताकि भविष्य में हमें ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।' यह अपील झारखंड के उन लाखों युवाओं की व्यथा को प्रतिबिंबित करती है जो बार-बार परीक्षा प्रक्रिया की विफलता का शिकार हो रहे हैं।
11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित
आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार से बातचीत के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है। एक छात्र प्रतिनिधि ने बताया, 'इस प्रतिनिधिमंडल में 8 छात्र प्रतिनिधि, अभिभावकों की ओर से 2 पत्रकार और 1 कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं। जब भी बैठक तय होगी, हमें तारीख और समय बता दिया जाएगा।' यह संरचित दृष्टिकोण दर्शाता है कि आंदोलन संगठित और दीर्घकालिक रुख अपना चुका है।
सरकार की प्रतिक्रिया
सरकार की ओर से मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने कहा, 'ये हमारे युवा और हमारे बच्चे हैं। हम समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं। हम बातचीत करेंगे। एक समिति बनाई गई है और समिति उनसे मुलाकात करेगी।' हालाँकि, अभी तक बातचीत की कोई निश्चित तारीख तय नहीं हुई है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह आंदोलन झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों की पृष्ठभूमि में हो रहा है। 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच बातचीत की तारीख तय होना अगला अहम कदम होगा। आंदोलन में आम जनता और स्कूली बच्चों की भागीदारी बढ़ने से सरकार पर जल्द ठोस कदम उठाने का दबाव और तीव्र होता जा रहा है।