अमेरिका का वीजा बॉन्ड नियम: 50 देशों पर $20,000 तक की शर्त, भारत को मिली राहत
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश विभाग ने 50 देशों के नागरिकों के लिए बी1/बी2 वीजा (बिजनेस एवं टूरिस्ट) आवेदन पर $10,000 से $20,000 तक का वीजा बॉन्ड जमा करने की अनिवार्यता लागू की है। राहत की बात यह है कि भारतीय पासपोर्ट धारकों को इस नियम से पूरी तरह बाहर रखा गया है, जबकि दक्षिण एशियाई पड़ोसी देश बांग्लादेश, भूटान और नेपाल इस सूची में शामिल हैं।
वीजा बॉन्ड कार्यक्रम क्या है
यह कार्यक्रम इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट की धारा 221(जी)(3) के तहत संचालित किया जा रहा है। एक अंतिम नियम के अंतर्गत यह व्यवस्था 3 अगस्त से प्रभावी हो चुकी है। इसके तहत कांसुलर अधिकारी को यह अधिकार है कि वह वीजा जारी करने से पहले आवेदक से बॉन्ड राशि जमा कराने को कह सके।
बॉन्ड की राशि — $10,000, $15,000 या $20,000 — का निर्धारण वीजा इंटरव्यू के दौरान संबंधित कांसुलर ऑफिसर द्वारा किया जाता है। यह राशि आवेदक स्वयं या उसकी ओर से कोई दोस्त, रिश्तेदार अथवा बिजनेस सहयोगी भी जमा कर सकता है।
किन देशों पर लागू हुआ और कब से
अमेरिकी विदेश विभाग की अपडेटेड सूची के अनुसार, बांग्लादेश और नेपाल पर यह नियम 21 जनवरी से लागू है, जबकि भूटान पर यह प्रतिबंध 1 जनवरी से ही प्रभावी हो चुका था। इसके अतिरिक्त, सूची में अफ्रीका, कैरेबियाई क्षेत्र, मध्य एशिया और प्रशांत क्षेत्र के कई देश भी शामिल हैं — कुल मिलाकर 50 देश।
गौरतलब है कि किन देशों के नागरिकों को इस सूची में रखा जाएगा, यह निर्णय अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) की 'एंट्री/एक्जिट ओवरस्टे रिपोर्ट' में दर्ज बी1/बी2 वीजा ओवरस्टे के आँकड़ों के आधार पर होता है — यानी उन मामलों को देखा जाता है जहाँ लोग अस्थायी वीजा पर अमेरिका गए और तय समयसीमा से अधिक रुके।
आवेदन प्रक्रिया और अतिरिक्त शर्तें
जिन आवेदकों पर यह नियम लागू होगा, उन्हें DHS फॉर्म आई-352 जमा करना होगा और अमेरिकी वित्त विभाग के ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म pay.gov के ज़रिए बॉन्ड की शर्तें स्वीकार करनी होंगी। विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदक कांसुलर अधिकारी के निर्देश मिलने से पहले कोई भुगतान न करें।
यात्रा के दौरान इन आवेदकों को केवल कमर्शियल एयरपोर्ट — जिनमें अमेरिकी कस्टम्स और बॉर्डर प्रोटेक्शन की प्रीक्लियरेंस सुविधा वाले स्थान भी शामिल हैं — का उपयोग करना होगा। चार्टर विमान, जनरल एविएशन, जमीन अथवा समुद्री मार्ग से प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
बॉन्ड वापसी और उल्लंघन की स्थिति
यदि बॉन्ड से जुड़ी सभी शर्तें पूरी की जाती हैं, तो जमा की गई राशि राशि-जमाकर्ता को वापस कर दी जाएगी। हालाँकि, विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि बॉन्ड जमा करना वीजा मिलने की गारंटी नहीं है।
यदि बॉन्ड शर्तों के संभावित उल्लंघन का मामला सामने आता है, तो उसे यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के पास भेजा जाएगा, जो अंतिम निर्णय करेगा।
भारत को राहत और क्षेत्रीय संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका अपनी वीजा और इमिग्रेशन नीतियों को कड़ा कर रहा है। भारत का इस सूची से बाहर रहना भारत-अमेरिका संबंधों और भारतीय यात्रियों के अपेक्षाकृत बेहतर वीजा-अनुपालन रिकॉर्ड का संकेत देता है। दूसरी ओर, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल के नागरिकों को अब अमेरिकी वीजा आवेदन में एक अतिरिक्त वित्तीय बाधा का सामना करना पड़ेगा, जो इन देशों के यात्रियों के लिए उल्लेखनीय बदलाव है।
आने वाले समय में DHS के ओवरस्टे आँकड़ों की अगली समीक्षा के आधार पर इस सूची में और बदलाव संभव हैं।