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अमेरिका से 2026 में अब तक 2,273 भारतीय नागरिक वापस भेजे गए: विदेश मंत्रालय

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अमेरिका से 2026 में अब तक 2,273 भारतीय नागरिक वापस भेजे गए: विदेश मंत्रालय

सारांश

2026 में अब तक अमेरिका से 2,273 भारतीय नागरिक स्वदेश वापस भेजे जा चुके हैं — यह आंकड़ा तब सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन H-1B वीज़ा पर एक लाख डॉलर की फीस का बचाव कर रहा है, जिसे एक संघीय अदालत पहले ही रद्द कर चुकी है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 31 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि 1 जनवरी 2026 से अब तक अमेरिका से 2,273 भारतीय नागरिक वापस भेजे गए हैं।
तुलनात्मक रूप से, पूरे 2025 में अमेरिका से 3,567 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया था।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि राष्ट्रीयता की पुष्टि के बाद ही वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
भारत ने अवैध प्रवासन का विरोध और कानूनी प्रवासन को समर्थन देने की नीति दोहराई।
ट्रंप प्रशासन H-1B वीज़ा पर एक लाख डॉलर की फीस को लेकर संघीय अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करेगा।

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 31 जुलाई 2026 को अपनी द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में खुलासा किया कि 1 जनवरी 2026 से अब तक अमेरिका से 2,273 भारतीय नागरिकों को स्वदेश वापस भेजा जा चुका है। तुलनात्मक रूप से, पूरे वर्ष 2025 में यह संख्या 3,567 थी।

मुख्य घटनाक्रम

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि सरकार प्रत्येक डिपोर्टेशन मामले में नागरिकता की पुष्टि के बाद ही वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है। उन्होंने कहा, "जब भी कोई मामला हमारे पास आता है, तो हम पूरी जांच-पड़ताल करते हैं ताकि यह पुष्टि की जा सके कि जिस व्यक्ति को वापस भेजा जा रहा है, वह वास्तव में भारतीय नागरिक है या नहीं। जब हमें पूरी तरह से यकीन हो जाता है कि वह भारतीय नागरिक है, तभी हम उसके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद करते हैं।"

भारत की आधिकारिक नीति

भारत सरकार ने एक बार फिर अपनी स्थापित नीति दोहराई — वह अवैध प्रवासन का समर्थन नहीं करती और केवल कानूनी माध्यमों से प्रवासन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीयता की पुष्टि के बिना किसी भी व्यक्ति को वापस स्वीकार करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाती — चाहे वह अमेरिका हो या कोई अन्य देश।

H-1B वीज़ा फीस विवाद और अमेरिकी रुख

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में इमिग्रेशन नियम लगातार सख्त हो रहे हैं। व्हाइट हाउस ने पिछले महीने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू एक लाख डॉलर की H-1B वीज़ा फीस का बचाव किया, भले ही एक संघीय न्यायाधीश ने इसे अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया था। न्यायाधीश ने माना कि प्रशासन ने अपनी कानूनी सीमाओं से आगे बढ़कर यह शुल्क लगाया, जो एक गैरकानूनी कर के समान था।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप के पास यह स्पष्ट कानूनी अधिकार है कि वे ऐसे किसी भी वर्ग के विदेशी नागरिकों के प्रवेश को सीमित कर सकते हैं, जिन्हें वे अमेरिका के हित में नहीं मानते। उन्होंने वही किया है।" उन्होंने यह भी कहा कि "H-1B कार्यक्रम का कई दशकों से गलत इस्तेमाल होता रहा है" और प्रशासन को अपील में न्यायालय के फैसले को पलटने का भरोसा है।

आम जनता और प्रवासियों पर असर

गौरतलब है कि अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय H-1B वीज़ा पर कार्यरत हैं, विशेषकर प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य क्षेत्र में। बढ़ती वीज़ा फीस और सख्त इमिग्रेशन नीतियों से उन भारतीय पेशेवरों पर सीधा असर पड़ सकता है जो वैध तरीके से अमेरिका में काम कर रहे हैं या वहाँ जाने की योजना बना रहे हैं।

आगे क्या

अमेरिकी प्रशासन द्वारा H-1B फीस मामले में अपील दायर किए जाने की उम्मीद है। इस बीच, भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह विभिन्न विदेशी सरकारों के साथ डिपोर्टेशन से जुड़े मामलों पर संवाद जारी रखेगी और प्रत्येक मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

273 भारतीयों की वापसी का आंकड़ा, 2025 के पूरे साल के 3,567 के मुकाबले, बताता है कि डिपोर्टेशन की रफ्तार इस साल तेज है — और यह महज संयोग नहीं, बल्कि ट्रंप प्रशासन की सुनियोजित इमिग्रेशन कसावट का नतीजा है। असली सवाल यह है कि इनमें से कितने लोग वैध दस्तावेजों के बावजूद प्रक्रियागत कारणों से प्रभावित हुए। H-1B फीस विवाद यह भी दर्शाता है कि अमेरिका में भारतीय पेशेवरों की स्थिति अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक भी हो गई है। भारत सरकार की 'पुष्टि-पहले' नीति सराहनीय है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि डिपोर्ट किए गए नागरिकों को वापसी के बाद पुनर्वास में क्या सहायता मिल रही है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में अमेरिका से कितने भारतीय नागरिकों को वापस भेजा गया है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से 31 जुलाई 2026 तक अमेरिका से 2,273 भारतीय नागरिकों को वापस भेजा गया है। तुलनात्मक रूप से, पूरे 2025 में यह संख्या 3,567 थी।
भारत सरकार डिपोर्टेशन मामलों को कैसे संभालती है?
भारत सरकार प्रत्येक डिपोर्टेशन मामले में पहले संबंधित व्यक्ति की भारतीय नागरिकता की पुष्टि करती है। राष्ट्रीयता सत्यापित होने के बाद ही वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है, यह नीति अमेरिका सहित सभी देशों पर लागू होती है।
H-1B वीज़ा पर एक लाख डॉलर की फीस क्या है और इसे क्यों रद्द किया गया?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने H-1B वीज़ा पर एक लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस लागू की थी। एक संघीय न्यायाधीश ने इसे यह कहते हुए रद्द कर दिया कि प्रशासन ने अपनी कानूनी सीमाओं से आगे बढ़कर यह शुल्क लगाया, जो एक गैरकानूनी कर के समान था। ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील करने की योजना बना रहा है।
भारत की अवैध प्रवासन पर क्या नीति है?
भारत सरकार स्पष्ट रूप से अवैध प्रवासन का विरोध करती है और केवल कानूनी माध्यमों से प्रवासन को प्रोत्साहित करने की नीति पर कायम है। विदेश मंत्रालय ने इस नीति को बार-बार दोहराया है।
H-1B वीज़ा फीस विवाद का भारतीय पेशेवरों पर क्या असर होगा?
अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय H-1B वीज़ा पर प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत हैं। यदि अपील में यह फीस बहाल होती है, तो भारतीय पेशेवरों और उनके नियोक्ताओं पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा और वीज़ा प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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