बीजिंग में जिनपिंग ने ट्रंप का किया भव्य स्वागत, ग्रेट हॉल में मिलिट्री शो और द्विपक्षीय वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 14 मई 2025 को बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर चीनी सैनिकों ने सुव्यवस्थित कोरियोग्राफ्ड मिलिट्री शो का प्रदर्शन किया और मिलिट्री बैंड ने अमेरिकी राष्ट्रगान 'द स्टार स्पैंगल्ड बैनर' बजाया।
स्वागत समारोह का दृश्य
ट्रंप के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल पहुँचने पर दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाए। रेड कार्पेट पर दोनों राष्ट्राध्यक्ष साथ चले, जबकि चीनी सैनिक एक सुव्यवस्थित पंक्ति में खड़े रहे और पारंपरिक संगीत की धुन गूँजती रही। स्कूली बच्चों के एक समूह ने चीनी और अमेरिकी झंडे तथा फूलों के गुलदस्ते लहराते हुए उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
इसके बाद दोनों नेताओं ने चीनी और अमेरिकी अधिकारियों से हाथ मिलाया और चीनी सैन्य सेवा के सदस्यों की परेड देखी। चीनी सैनिकों ने दोनों देशों के झंडे लहराते हुए मार्च किया। गौरतलब है कि चीन अपने कोरियोग्राफ्ड मिलिट्री प्रदर्शनों के लिए विश्वभर में जाना जाता है — इससे पहले ऐसा पूर्ण प्रदर्शन पिछले सितंबर में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की स्मृति में आयोजित सैन्य परेड के दौरान देखा गया था।
द्विपक्षीय बैठक और एजेंडा
स्वागत समारोह के बाद ट्रंप और शी जिनपिंग ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों के साथ ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल में ही द्विपक्षीय बैठक आरंभ की। बैठक से पूर्व दोनों नेताओं ने संक्षिप्त प्रारंभिक वक्तव्य दिए। बताया जा रहा है कि इस बैठक में तकनीक, व्यापार, होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान जैसे अहम वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होनी है।
पिछली मुलाकात और व्यापार समझौता
यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव का लंबा दौर रहा है। ट्रंप और शी की आखिरी मुलाकात अक्टूबर में दक्षिण कोरिया में आयोजित एपीईसी (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी, जहाँ दोनों नेता एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए थे। इस पृष्ठभूमि में बीजिंग की यह मुलाकात दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
आगे क्या
दोनों नेताओं के बीच इस उच्चस्तरीय वार्ता के नतीजे वैश्विक व्यापार, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और पश्चिम एशिया की भू-राजनीति पर दूरगामी असर डाल सकते हैं। बैठक के बाद संयुक्त बयान या किसी समझौते की संभावना पर दुनियाभर की नज़रें टिकी हैं।