शी जिनपिंग का ऐलान: चीन में अमेरिकी कंपनियों के लिए और बड़े मौके, ट्रंप संग ऐतिहासिक बैठक
सारांश
मुख्य बातें
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 14 मई 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक के दौरान स्पष्ट संकेत दिया कि चीन अमेरिकी व्यापारिक निवेश के लिए अपने दरवाज़े और चौड़े करने को तैयार है। इस बैठक में दोनों देशों के शीर्ष कारोबारी नेता भी शामिल हुए, जो अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देती है।
शी जिनपिंग का बयान
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, 'चीन के खुलने का दरवाजा और भी बड़ा होता जाएगा। चीन, अमेरिका के साथ आपसी फायदे वाले सहयोग को मजबूत करने का स्वागत करता है। मेरा मानना है कि चीन में अमेरिकी कंपनियों के लिए और भी बड़े मौके होंगे।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव को कम करने की कोशिशें जारी हैं।
कौन-कौन से अमेरिकी कारोबारी नेता थे शामिल
राष्ट्रपति ट्रंप के प्रतिनिधिमंडल में अमेरिकी उद्योग जगत के शीर्ष नाम शामिल थे — टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क, एप्पल के सीईओ टिम कुक, और एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग इनमें प्रमुख थे।
इसके अलावा ब्लैकरॉक के लैरी फिंक, ब्लैकस्टोन के स्टीफन श्वार्जमैन, बोइंग की केली ऑर्टबर्ग, कारगिल के ब्रायन साइक्स, सिटी की जेन फ्रेजर, सिस्को के चक रॉबिंस, कोहेरेंट के जिम एंडरसन, जीई एयरोस्पेस के एच. लॉरेंस कल्प, गोल्डमैन सैक्स के डेविड सोलोमन, इलुमिना के जैकब थायसेन, मास्टरकार्ड के माइकल मिबैक, मेटा की डिना पॉवेल मैककॉर्मिक, माइक्रोन के संजय मेहरोत्रा, क्वालकॉम के क्रिस्टियानो अमोन और वीज़ा के रयान मैकइनर्नी भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे। यह प्रतिनिधिमंडल एयरोस्पेस, प्रौद्योगिकी, वित्त और बैंकिंग सहित विविध क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है।
ट्रंप ने शी को क्या कहा
बैठक की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप ने शी जिनपिंग से कहा, 'हमने दुनिया के टॉप 30 लोगों से पूछा। उनमें से हर एक ने हाँ कहा और मुझे कंपनी में दूसरे या तीसरे नंबर के लोग नहीं चाहिए थे। मुझे सिर्फ टॉप वाले चाहिए थे। और वे आज यहाँ आपको और चीन को सम्मान देने आए हैं और वे व्यापार करने के लिए उत्सुक हैं।' गौरतलब है कि इस स्तर का अमेरिकी कारोबारी प्रतिनिधिमंडल बीजिंग के लिए एक असाधारण राजनयिक संकेत माना जा रहा है।
व्यापक संदर्भ और महत्व
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार शुल्क और तकनीकी प्रतिबंधों को लेकर तनाव चल रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के उच्च-स्तरीय कारोबारी संवाद से दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को नई दिशा मिल सकती है, हालाँकि नीतिगत बदलाव के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना होगा। यह बैठक इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि इसमें अमेरिकी तकनीक, वित्त और औद्योगिक क्षेत्र के शीर्ष प्रतिनिधि एक साथ बीजिंग पहुँचे — जो अमेरिकी कारोबार जगत की चीन में रुचि को रेखांकित करता है।
आगे क्या
इस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश पर ठोस समझौतों की संभावना पर नज़र रहेगी। कथित तौर पर दोनों पक्षों के बीच आर्थिक सहयोग के नए ढाँचे पर चर्चा जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस शिखर-स्तरीय संवाद का असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी साझेदारी पर भी पड़ सकता है।