युद्ध के बीच ईरान का दावा: एक साल में हथियार उत्पादन दोगुना, कुछ उत्पादों में तीन गुना बढ़ोतरी
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के रक्षा एवं सशस्त्र बल लॉजिस्टिक्स मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रजा तलाइ-निक ने दावा किया है कि पिछले एक वर्ष में देश का हथियार और सैन्य उपकरण उत्पादन दोगुना हो गया है — यह वृद्धि तब हुई जब 12 दिन के युद्ध के दौरान ईरान के रक्षा उद्योग के कुछ हिस्सों पर हमले भी हुए। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) के अनुसार, शुक्रवार देर रात दिए एक साक्षात्कार में तलाइ-निक ने ईरान की घरेलू रक्षा क्षमता को देश की 'सबसे बड़ी ताकत' बताया।
मुख्य घटनाक्रम
ब्रिगेडियर जनरल तलाइ-निक ने कहा कि ईरान का रक्षा उद्योग राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य तैयारियों का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। उनके अनुसार, देश में निर्मित हथियारों और गोला-बारूद को तेज़ गति से उत्पादित करने और ज़रूरत पड़ने पर तत्काल भरपाई करने की क्षमता इस उद्योग की सबसे बड़ी विशेषता है।
प्रवक्ता ने यह भी बताया कि संघर्ष के दौरान कुछ रणनीतिक रक्षा उत्पादों और युद्ध में उपयोग होने वाली आवश्यक सामग्रियों के उत्पादन में तीन गुना से भी अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई।
उत्पादन क्षमता का विस्तार
तलाइ-निक ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले ईरान का रक्षा उद्योग केवल 31 बुनियादी उत्पाद बनाता था। आज देश कथित तौर पर एक हजार से अधिक उन्नत रक्षा प्रणालियाँ, हथियार और गोला-बारूद तैयार कर रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ ईरानी रक्षा प्रणालियों की उत्पादन लागत समान विदेशी उत्पादों की तुलना में 20 गुना तक कम है।
यह क्षमता सशस्त्र बलों, रक्षा मंत्रालय, ज्ञान-आधारित कंपनियों, निजी क्षेत्र की फर्मों तथा वैज्ञानिक एवं शोध संस्थानों के सामूहिक सहयोग से विकसित की गई है।
बजट असमानता के बावजूद टिके रहने का दावा
तलाइ-निक ने कहा कि हालिया संघर्ष के दौरान अमेरिका, इज़राइल और उनके सहयोगियों का सैन्य बजट ईरान की तुलना में 100 गुना से भी अधिक था। इसके बावजूद ईरान इस संघर्ष का सामना करने में सफल रहा। उन्होंने इसका श्रेय देश की घरेलू उत्पादन क्षमता और 'राष्ट्रीय दृढ़ता' को दिया।
गौरतलब है कि ये सभी दावे ईरान सरकार की आधिकारिक मीडिया के माध्यम से आए हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
रणनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का दबाव बना हुआ है और क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि देश की रक्षा क्षमता को मज़बूत करना उन 'विदेशी शक्तियों' का मुकाबला करने के लिए ज़रूरी है जो ईरान की स्वतंत्रता को कमज़ोर करना चाहती हैं।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान के ये दावे अंतरराष्ट्रीय सैन्य विश्लेषकों की कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं।